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56 भोग लगाकर किया गोवर्धन पूजा

Gurgaon

Updated Thu, 15 Nov 2012 12:00 PM IST
गुड़गांव। शहर में गोवर्धन, विश्वकर्मा और अन्नकूट का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर कई स्थानों पर अन्नकूट का प्रसाद भी वितरित किया गया।
कार्तिक मास की शुल्क प्रतिपदा को मनाए जाने वाले गोवर्धन पर्व को लेकर लोग सुबह से ही तैयारियों में जुट गए। गोवर्धन और गायों के पूजन का सिलसिला देर शाम तक चला। शहर के कुछ चुनिंदा मंदिरों में गोवर्धन पूजन के लिए खास इंतजाम किए गए थे। वहां गोवर्धन का प्रारूप बनाकर पूजन की व्यवस्था की गई थी। अर्जुन नगर के गीता भवन मंदिर सहित, सदर बाजार से लगते सिद्धेश्वर मंदिर, घंटेश्वर मंदिर, शीतला माता मंदिर, बजघेड़ा रोड स्थित बाबा प्रकाशपुरी आश्रम, सेक्टर 10ए के श्री कृष्ण मंदिर में खास व्यवस्थाएं की गईं। सिद्धेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के सचिव लोेकेश कुमार ने बताया कि गोवर्धन पूजन सुबह साढ़े नौ बजे ही शुरू कर दिया गया था। लोगों की सुविधा के लिए यहां पूजन की विशेष तैयारी की गई थी। पूजन के बाद अन्नकूट का प्रसाद वितरित किया गया। बाबा प्रकाश पुरी आश्रम के प्रवक्ता आरएस गोयल ने बताया कि हर साल इस दिन विधि-विधान से गोवर्धन पूजन की व्यवस्था की जाती है। यहां श्रद्धालुओं ने गोवर्धन के साथ ही भगवान श्रीकृष्ण की भी पूजा-अर्चना की। सेक्टर चार-सात चौक पर भगवान विश्वकर्मा मंदिर में श्रद्धालुओं ने भगवान विश्वकर्मा से शांति अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। पूजन से पूर्व मंदिर प्रांगण में हवन का आयोजन किया गया।
क्यों होती है गोवर्धन पूजा
शहर के प्रसिद्ध ज्योतिष पं. दानवीर शास्त्री के मुताबिक गोवर्धन के दिन केवल गोवर्धन की पूजा ही नहीं बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के साथ उनके बड़े भाई बलराम, भगवान इंद्र, वायु देवता, अग्नि देवता, जल देवता, वृक्ष देवता का भी पूजन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत से मदद मांगी थी। भगवान श्रीकृष्ण के आदेश पर गोवर्धन के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करने लिए गोवर्धन पूजन किया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने लोगों से गोवर्धन को 56 प्रकार के भोग लगाने को कहा था। लिहाजा दूध, मेवा, मौसमी फल एवं सब्जियों के साथ अन्न को शामिल कर अन्नकूट बनाया जाता है और गोवर्धन के साथ भगवान श्रीकृष्ण व अन्य देवताओं को इसका भोग लगाया जाता है। उधर, पं. दानवीर शास्त्री ने बताया कि चूंकि यह मौसम नई फसल की बिजाई का होता है। लिहाजा बेहतर फसल की कामना के लिए लोग सभी देवताओं का पूजन करते हैं। इनमें भगवान इंद्र से भरपूर बारिश की कामना की जाती है।
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