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लंका जारि असुर संहारे सियारामजी के काज संवारे

Gurgaon

Updated Mon, 22 Oct 2012 12:00 PM IST
गुड़गांव। श्री दुर्गा रामलीला कमेटी जैकमपुरा में रविवार को लंका दहन का मंचन किया गया। कलाकारों की प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा।
सीता हरण के बाद हनुमानजी लंका पहुंचते हैं। वहां श्रीराम की मुद्रिका लेकर अशोक वाटिका पहुंचते हैं। हनुमानजी पेड़ पर बैठकर मुद्रिका गिराते हैं। इसे देख सीता विह्वल हो जाती हैं। तभी हनुमानजी ने कहा कि उन्हें श्रीराम ने भेजा है। सीता को सहजता से विश्वास नहीं होता। हनुमानजी के समझाने पर उन्हें विश्वास होता है। वह सीता जी को ढांढस बंधाते हैं कि जल्द ही श्रीराम अपनी सेना सहित लंका पर आक्रमण कर उन्हें मुक्त करा लेंगे।
फिर हनुमानजी ने अशोक वाटिका में ऐसा तांडव मचाया कि राक्षसाें में खलबली मच गई। तभी रावण का पुत्र अक्षय कुमार अपने पिता लंकेश की आज्ञा से उन्हें बंदी बनाने आता है। उसे हनुमानजी एक ही लात में प्राण हर लेते हैं। मेघनाद उन पर ब्रह्मास्त्र चलाता है। इसमें वह बंध कर बंदी हो जाते हैं। उन्हें रावण के दरबार में ले जाया जाता है। वहां रावण और हनुमान के बीच तीखा संवाद होता है। इसके मंचन का दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया।
रावण ने हनुमान को सुनाया मृत्युदंड
हनुमानजी ने रावण को समझाने का बहुत प्रयास कि वह सीता को वापस कर श्रीराम से क्षमा मांग ले। इस पर रावण कहता है कि ‘मृत्यु निकट आई होती लागेसि अधम सिखावन मोहि’। इस पर हनुमान जी कहते हैं ‘उल्टा होइहि अति भ्रम तोर प्रगट है जाना’। रावण हनुमान को दरबार में मृत्युदंड सुनाता है। विभीषण उसे ऐसा कहने से मना करता है। विभीषण कहता है कि बंदर की सबसे प्रिय उसकी पूूंछ होती है, इसी में आग लगा दो।
लंका को जला किया खाक
पूंछ में आग लगते ही हनुमानजी ने लंका में आग लगा दी। सोने की लंका धू-धू कर जलने लगी। जै श्रीराम-जै श्रीराम के नाद से पूरी लंका गूंज उठी।
राम सुग्रीव मिलन का भव्य मंचन
सीता की खोज में श्रीराम वन-वन भटकते हैं। तभी वह किष्किंधा पर्वत की ओर बढ़ने हैं। दो सुंदर राजकुमारों को देख सुग्रीव का मन भय से भर गया। वह हनुमानजी को पता लगाने भेजते हैं। शंका का निवारण होने के बाद वह दोनों भाइयाें को सुग्रीव के पास ले जाते हैं। जहां दोनों में मित्रता होती है। इसके बाद बालि बध का मंचन होता है।
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