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शोध का विषय बना मारुति की घटना

Gurgaon

Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
गुड़गांव। इस समय देश के बड़े प्रबंधन संस्थानों के लिए मारुति प्रकरण काफी चर्चित है। मारुति के मानेसर प्लांट में जो भी घटना हुई है, उसे प्रबंधन की दृष्टि से जोड़कर देखा जा रहा है। यह शोध का विषय बना गया है कि आखिर प्रबंधन में ऐसी कौन सी खामी रही, जिससे तालाबंदी जैसी स्थिति आ पड़ी और एक एचआर अधिकारी को जान तक गंवानी पड़ी? प्रबंधन के विद्यार्थी मारुति के मुद्दे पर विशेषज्ञों से ऑनलाइन भी राय ले और दे रहे हैं।
कुछ दिनाें से मारुति प्रकरण प्रबंध संस्थानों के लिए बिग केस स्टडी बन गया है। इस पर सेमीनार, पैनल और ग्रुप डिस्कशन का दौर शुरू हो गया है। ऐसा ही माहौल पूरे देश के प्रबंधन संस्थानों में देखा जा रहा है। देश के पांच बड़े बी स्कूलों में शुमार मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एमडीआई) में भी इस दिशा में पहल शुरू हो गई है। एमडीआई में प्रो. गीता बजाज ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि एचआर की दृष्टि से मारुति मामला काफी महत्वपूर्ण है। क्योंकि वहां का पूरा घटनाक्रम एचआर के निर्णयों से ही संबंधित है। यही वजह है कि एचआर प्रबंधन के विद्यार्थियों के लिए अध्ययन का यह खास मुद्दा बन गया है।
जेके पद्मपत सिंघानिया बिनजेस स्कूल के डायरेक्टर डॉ. रघुवीर सिंह ने बताया कि मारुति की ताजा घटनाओं ने प्रबंधन संस्थानों का ध्यान तेजी से आकर्षित किया है। मारुति के घटनाक्रम को क्या टाला जा सकता था? इस पर उनके संस्थान के विद्यार्थियों की राय ली जा रही है। उन्हें यह बताया जा रहा है कि पढ़ाई के बाद कार्यक्षेत्र में ऐसी परेशानियों से भी रूबरू होना पड़ सकता है। जेकेपीएस के डायरेक्टर डॉ. रघुवीर सिंह ने बताया कि वर्ष 2008-09 के दौरान वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान प्रबंधन संस्थानों को केस स्टडी का मुद्दा मिला था। इस बार मारुति के माध्यम से इस एक अलग प्रकार का केस मिला है।

क्या-क्या हो रहा है संस्थानों में
-मारुति में लगातार ऐसा क्या चल रहा है जिससे परेशानी आ रही है
-मारुति के प्रबंधन कौशल में क्या खामी या लापरवाही रही
-यूनियनों का उद्योग जगत में प्रभाव और उनका बदलता रवैया
-एचआर पॉलिसी में क्या बदलाव होने चाहिए
-प्रबंधन की शिक्षा में और क्या बदलाव होना चाहिए
-संस्थानों में एचआर प्रबंधन की शिक्षा को सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक बनाने पर भी बल
-श्रमिक विवादों को लेकर सेमीनार, पैनल डिस्कशन, ग्रुप डिस्कशन और सिंपोजियम का आयोजन
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