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15 दिन, तीन हादसे, जिम्मेदार कौन

Faridabad

Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
फरीदाबाद। लगता है कि फरीदाबाद को किसी की नजर लग गई है या फिर यहां सब कुछ सिर्फ कागजी हो रहा है। इसमें बिल्डरों, अवैध निर्माणकर्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, खाकी और खादी की मिलीभगत से हादसे पर हादसे होते जा रहे हैं।
चाहे इस साल 24 नवंबर को सरूरपुर में निर्माणाधीन फैक्ट्री की बिल्डिंग गिरने का हादसा हो, 10 दिसंबर को पाली-मोहब्बताबाद क्रेशर जोन में दीवार ढहने का मामला हो या फिर मंगलवार को सेक्टर-88 में स्कूल की बिल्डिंग गिर जाने का ताजा घटनाक्रम हो। ऐसे हादसे कब रुकेंगे कहा नहीं जा सकता। इससे पहले एनआईटी में सिटी मार्केट गिरने का हादसा, सेक्टर-24 में औद्योगिक निर्माण गिरने की घटना और पलवल में निर्माणाधीन कॉलेज की बिल्डिंग के गिरने जैसे कई हादसे शहर देख चुका है। यह इन निर्माणकर्ताओं के लिए कोई हृदय विदारक घटना नहीं है। बल्कि त्रासदी उन मजदूरों के परिवार के लिए होती है जो चंद रुपये की दिहाड़ी मजदूरी करते हुए कुछ लोगों की गलती के कारण जान गंवाने को मजबूर हैं।
शहर के जानेमाने श्रमिक नेता बेचू गिरी कहते हैं इन हादसों के लिए पूरा प्रशासनिक तंत्र जिम्मेदार है। चाहे वह जिला प्रशासन हो, नगर निगम हो, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य या फिर पुलिस। सबकी मिलीभगत से ही अवैध निर्माण होते हैं। वह गिरते हैं। इनमें मरने वाले मजदूरों के परिवार वालों को न्याय नहीं मिलता। ऐसे अधिकांश मामलों में पुलिस बिल्डिंग के मालिक के खिलाफ केस तक दर्ज करने से बचती है। निर्माण साइटों पर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होता।
इस बारे में श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) शिवचरण लाल शर्मा कहते हैं कि जिसकी भी गलती पाई गई उसे छोड़ा नहीं जाएगा। दोषी कोई बिल्डर हो या फिर किसी विभाग का अधिकारी। मुझे मालूम है कि पिछले कुछ दिनों में इमारतें गिरने की कई घटनाएं हुई हैं। यह चिंता का विषय है। इस पर सरकार जांच कराएगी। मृतक मजदूरों के परिवार वालों को पूरा मुआवजा दिलाया जाएगा।

-श्रम विभाग की औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य शाखा के डिप्टी डायरेक्टर केएस चहल के मुताबिक बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स (बीओसीडब्ल्यू) एक्ट-1996 के तहत क्रेशर जोन हादसे में मृतक मजदूरों का रजिस्ट्र्रेशन नहीं हुआ था। क्योंकि, अभी वहां क्रेशर नहीं चल रहा था। इसीलिए वहां निरीक्षण भी नहीं हुआ था। जहां तक सेक्टर-88 की साइट का मामला है तो वहां का रजिस्ट्रेशन है। निर्माण मजदूरों की सुरक्षा से संबंधित निरीक्षण हुआ था। यह डिजाइन फेलियर का हादसा है। हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं।

कितना मिल सकता है मुआवजा:
-कामगार क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत श्रमिक को नौकरी देने वाले से पांच लाख रुपये दिलाए जा सकते हैं।
-बीओसीडब्ल्यू एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन हो या न हो। श्रम कल्याण बोर्ड से मृतकों के परिवार को 75-75 हजार रुपये मिल सकते हैं।

क्या है बीओसीडब्ल्यू एक्ट:
-बीओसीडब्ल्यू एक्ट के तहत कंस्ट्रक्शन साइट एवं वर्करों का रजिस्ट्रेशन करके निर्माण लागत का एक फीसदी हिस्सा श्रम कल्याण बोर्ड में जमा होता है। यह रकम श्रमिकों के कल्याण में खर्च होती है। कोई हादसा होने पर इसी बोर्ड से रकम दी जाती है।
निरीक्षण में क्या देखते हैं:
-शटरिंग कैसी हुई है। क्या बल्लियों के नीचे बेस प्लेट लगी है (बेस न होने पर नीचे धंसने का खतरा रहता है)।
-मजदूरों को हेल्मेट मुहैया कराया गया या नहीं। उन्होंने उसे पहना है या नहीं। सेफ्टी बेल्ट का प्रयोग हो रहा है या नहीं।
-बिल्डिंग के किनारों पर या जरूरी स्थानों पर सेफ्टी नेट लगाई गई है या नहीं (ताकि मजदूर ऊपर से गिरे तो वह बच जाए)।
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