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आखिर कौन करेगा ‘रेडिएशन’ की जांच

Faridabad

Updated Sun, 09 Dec 2012 05:30 AM IST
फरीदाबाद। शहर विभिन्न मोबाइल कंपनियों के टावरों से पट गया है, जिनसे निगम प्रशासन टैक्स तो वसूलता है लेकिन, रेडिएशन को लेकर उसकी ओर से कंपनियों पर कोई अंकुश नहीं है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी यह कहकर पल्ला झाड़ लेता है कि उसका काम तो सिर्फ प्रदूषण की जांच करना है। नगर निगम अधिकारी कहते हैं कि उनके पास कोई रेडिएशन मापक यंत्र नहीं है। इस लीपापोती में पिस रही है शहर की जनता। सवाल यह उठता है कि आखिर टावरों से निकलने वाले रेडिएशन के खतरों की जांच कौन करेगा।
नगर निगम के लगभग 208 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विभिन्न कंपनियों के 470 टावर हैं। नगर निगम सिर्फ इन टावरों से आने वाली स्ट्रक्चरल परेशानी को दूर करने का काम करता है। वह भी शिकायत पर। भले ही यह काम
क मर्शियल है लेकिन अधिकांश टावर रिहायशी क्षेत्रों में लगे हुए हैं। जबकि, स्वास्थ्य पर इससे पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर भी समय-समय पर लोग आवाज बुलंद करते रहे हैं।
नगर निगम कार्रवाई तब करता है जब किसी टावर की इंस्टालेशन फीस न आई हो या फिर उसका वार्षिक रिनुअल न हुआ हो। कुछ सीलिंग स्ट्रक्चरल शिकायतों को लेकर भी हुई है। परंतु अब तक एक भी टावर रेडिएशन के मसले को लेकर सील नहीं हुआ है।
निगम के लैंड एंड लाइसेंसिंग ऑफिसर बलबीर सिंह पंवार का कहना है कि यहां पर रेडिएशन को लेकर टावरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यहां पर रेडिएशन मापक मशीन ही नहीं है। आमतौर पर यहां पर जो शिकायतें आती हैं वह स्ट्रक्चर से जुड़ी होती हैं कि इससे दूसरे के घर को नुकसान पहुंच सकता है।
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‘टावरों के स्ट्रक्चरल खतरों पर नजर रखने के साथ-साथ नगर निगम और हुडा अधिकारियों के पास रेडिएशन रीडिंग मीटर होना चाहिए, जिससे रेडियो मैगनेटिक वेव्स मापी जा सकें। तभी पता चलेगा कि कौन सा टावर खतरनाक है। क्योंकि इसकी तरंगों से कई प्रकार के कैंसर एवं सुनने की क्षमता कम होने की संभावना है। गौरय्या एवं अन्य पक्षियों का कलरव भी इन टावरों की वजह से कम हुआ है’।
-डॉ. सुरेंद्र दत्ता, फिजीशियन।
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-नगर निगम ने यह नियम बनाया है कि किसी सेलुलर ऑपरेटर को मोबाइल टावर लगाने के लिए सबसे पहले नगर निगम के पार्क का चुनाव करना पड़ेगा। पार्क में जगह नहीं मिलने पर ही वह किसी के घर पर टावर लगा सकते हैं।
-दिसंबर 2009 में यह भी योजना बनी थी कि टावर लगाने की अनुमति तभी मिलेगी जब घर के चारों तरफ रहने वाले पड़ोसियों से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) आएगी। बिना इसके निगम में रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाएगा।
(इन दोनों का पालन नहीं हो पा रहा है)
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इन संस्थानों का मान्य है स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट:
-आईआईटी दिल्ली एवं आईआईटी रुड़की
-नेशनल काउंसिल फॉर बिल्डिंग मैटीरियल बल्लभगढ़
-सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट रुड़की
-रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकॉनॉमिक सर्विसेस लिमिटेड
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स्वास्थ्य खतरों से जुड़ी कुछ शिकायतें
-जून 2009 में नंगला रोड स्थित सुंदर कालोनी में अवैध रूप से टावर निर्माण व रेडिएशन के खतरों को लेकर निगम मुख्यालय में प्रदर्शन हुआ था।
-अगस्त 2009 में एनएच-दो-के ब्लाक निवासियों ने समाजसेवी अश्विनी आजाद के नेतृत्व में टावरों के खिलाफ नगर निगम को शिकायत दी थी, जिसमें लोगों ने आरोप लगाया था कि टावर लगाने से पहले कंपनी ने आस पड़ोस के लोगों से कोई राय नहीं ली। लोगों ने यह भी आरोप लगाए थे कि टावर लगने के तीन साल के भीतर आसपास के पांच व्यक्तियों की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।
-इसके अलावा संजय कालोनी, नंगला एंक्लेव, पांच नंबर, सेक्टर-21 आदि में कई लोगों का अपने पड़ोसियों के साथ इस मामले को लेकर नगर निगम में शिकायत की।


नगर योजनाकार ने भेजे 100 को नोटिस

हुडा ने 70 को चिह्नित कर भेजी रिपोर्ट
लेकिन कार्रवाई के नाम से झाड़ रहे हैं पल्ला
कुंदन तिवारी
फरीदाबाद। हुडा के रिहायशी सेक्टरों बल्कि अन्य रिहायशी क्षेत्रों में भी लगे मोबाइल टावर लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बने हुए हैं। जिला एवं नगर योजनाकार ने ऐसे सौ लोगों को नोटिस जारी कर दिए हैं, वहीं हुडा ने 70 मोबाइल टावरों को चिह्नित कर उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी है। लेकिन इस समूचे प्रकरण में खास बात यह है कि किसी ने लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में नहीं रखा है। ध्यान रखा है तो सिर्फ रेवेन्यु का। डीटीपी ने जहां सीएलयू कराने को कहा है तो हुडा ने फीस जमा करने को कहा है।
हुडा बॉयलॉज के हिसाब से रिहायशी सेक्टरों में मोबाइल टावरों को नहीं लगाया जा सकता है। क्योंकि यह एक तरह से कमर्शिलय एक्टिविटीज है। ऐसे में कमर्शिलय साइट पर ही इन टावरों को लगाने का प्रावधान है, जिसकी वन टाइम फीस को हुडा में जमा करना होता है। हुडा के रिहायशी सेक्टरों में जितने भी मोबाइल टावरों को लगाया गया है, उसमें से किसी ने भी हुडा से अनुमति नहीं ले रखी है। हुडा के सर्वे ब्रांच ने इसकी रिपोर्ट हुडा संपदा अधिकारी को सौंप रखी है, जिसमें करीब 70 मोबाइल टावरों को चिह्नित किया गया है। लेकिन इन टावरों के खिलाफ आज तक हुडा अधिकारियाें ने किसी भी प्रकार की कार्रवाई करना तो दूर की बात नोटिस भी जारी नहीं किया है।
हुडा के पास ऐसा भी ऐसा कोई पैरामीटर नहीं है कि कौन सा टावर कितना रेडिएशन फैला रहा है। वहीं जिला एवं नगर योजनाकार के क्षेत्र में आने वाले कंट्रोल एरिया में मोबाइल टावरों को लगाने का प्रावधान है। लेकिन इसके लिए सरकार से सीएलयू लेनी होती है। नगर योजनाकार विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, विभाग ने सीएलयू आवेदन करने के लिए कंट्रोल एरिया में करीब 100 मोबाइल टावरों को पिछले तीन माह में नोटिस जारी किए हैं।
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कंट्रोल एरिया में लगे मोबाइल टावरों को नोटिस जारी करने पर 50 ने सीएलयू का आवेदन कर दिया है। लेकिन अभी तक सीएलयू की अनुमति नहीं आई है। सीएलयू नहीं मिलने पर इन टावरों को सील कर दिया जाएगा।
-सुधीर सिंह चौहान, नगर योजनाकार (तोड़फोड़) फरीदाबाद
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उच्च अधिकारियो को बहुत सी सर्वे रिर्पोट भेजी जाती है। लेकिन कितनों पर कार्रवाई होती है, इसकी जानकारी उनके पास नहीं भेजी जाती। अगर कार्रवाई के लिए उनके पास आदेश आते हैं तो उसे अमल में लाया जाता है। लेकिन नहीं आने पर शांत बैठने के अलावा कोई भी रास्ता नहीं है।
-अजीत सिंह, एसडीओ(सर्वे) हुडा, फरीदाबाद
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