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पारंपरिक बर्तन छोड़, इलेक्ट्रिक आइटमों पर जोर

Faridabad

Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
फरीदाबाद। धन संपदा व आरोग्यता के पर्व धनतेरस की पूर्व संध्या पर बाजारों में खरीदारों की जबरदस्त भीड़ उमड़ी। इसके चलते दुकानदारों ने अतिरिक्त सेल्समैन रखे गए। सुबह से ही बाजारों में खासी रौनक रही। परंपरा निभाने के लिए भले ही पारंपरिक बर्तन खरीदे गए हों, लेकिन इस बार इलेक्ट्रिक आइटमों पर खासा जोर रहा।
अधिकांश लोगों के घरों में अब अवन, इंडक्शन चूल्हे एवं बिजली से चलने वाले अन्य अप्लाएंसेज जगह ले रहे हैं। ऐसे में इससे जुड़े बर्तनों की खरीदारी काफी बढ़ी है। एनएच-एक मार्केट स्थित बर्तन भंडार के संचालक प्रवीण गुलाटी कहते हैं कि पारंपरिक कड़ाही, कूकर एवं अन्य सामान की जगह अब नॉन स्टिक बर्तनों ने ले ली है।
बर्तन खरीदारी का ट्रेंड बदल रहा है। अब लोग इंडक्शन चूल्हे, गैस टोस्टर इलेक्ट्रिक टोस्टर, तंदूर, अवन, कॉफी मेकर, जूसर-मिक्सर खरीद रहे हैं। हालांकि, लोग इनके साथ परंपरा निभाने के लिए स्टील व पीतल के बर्तन भी खरीदना नहीं भूल रहे हैं। यह सारे सामान 600 रुपये से लेकर 10-12 हजार रुपये तक हैं।

शुभ के लिए चांदी के सिक्कों की खरीदारी ज्यादा
महंगाई के बावजूद शुभ के लिए सोने चांदी की खरीदारी हो रही है। ज्वैलर बोधराज कपूर का कहना है कि इस बार सिक्कों एवं नोटों के अलावा 35-35 सौ रुपये में चांदी के गिलास भी मौजूद हैं। 400 से 1200 रुपये तक में चांदी के आकर्षक फोटो फ्रेम मौजूद हैं। सोने की गिन्नी 1, 2, 5, 10 ग्राम में मौजूद हैं। चांदी के 500 एवं 1000 रुपये के नोट सात-सात रुपये में मिल रहे हैं। सोना महंगा होने के कारण सबसे ज्यादा खरीदारी चांदी के सिक्कों की हो रही है। इस बार गोल्ड एवं सिल्वर प्लेटेड ताश के पत्ते भी बाजार में हैं, जिनकी कीमत 900 रुपये है।

मैढ क्षत्रिय स्वर्णकार सभा के महासचिव रवि सोनी का कहना है कि इस बार मार्केट बहुत मंदा है। शहर में ज्वैलरी की करीब एक हजार दुुकानें हैं। तेजी रही तो धनतेरस एवं दिवाली पर एक से सवा अरब रुपये का कारोबार हो सकता है। लेकिन, अब अनुमान यह लगाया गया है कि शहर में इस बार सोने-चांदी का 70 से 80 करोड़ रुपये का कारोबार होगा।

धनतेरस का क्या है महत्व
फरीदाबाद। ज्योतिषाचार्य पंडित रंजित झा कहते हैं कि इस पर्व के साथ मान्यता है कि वैद्य धन्वंतरि इसी दिन सागर मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। इसलिए धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। धन-धान्य के साथ इस त्योहार को आरोग्य और स्वस्थ जीवन की कामना के पर्व के तौर भी मनाया जाता है। धनतेरस को स्वास्थ्य के साथ संपन्नता का पर्व माना जाता है। इस दिन बहुत से लोग सोने जैसी महंगी धातु में निवेश करने के पक्ष में रहते हैं। पीतल को धन्वंतरि की धातु माना जाता है। इसे खरीदने से आरोग्य और स्वास्थ्य की दृष्टि से शुभ माना जाता है साथ ही सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पीतल के साथ चांदी की वस्तुओं को खरीदने का भी महत्व माना जाता है। चांदी को संपन्नता के देवता कुबेर की धातु कही जाती है। ऐसे में धनतेरस के दिन चांदी खरीदने से यश, कीर्ति, ऐश्वर्य व संपदा की वृद्धि होती है।
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