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..और खाली हो सकती है निगम की तिजोरी

Faridabad

Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
फरीदाबाद। हाउसटैक्स (प्रॉपर्टी टैक्स) एक रुपये प्रति गज (250 वर्ग गज तक के मकानों के लिए) होने से आम लोगों को फौरी राहत मिली है, लेकिन नगर निगम के उन अधिकारियों की हालत खराब है, जिन पर विकास कार्यों की जिम्मेदारी है। क्योंकि, नए पैटर्न से हाउसटैक्स में काफी कमी आने की संभावना है।
निगम अधिकारी इसलिए नए पैटर्न को एक वित्तीय झटके के रूप में देख रहे हैं। इससे पहले भी चुंगी समाप्त करने जैसे अपने कई फैसलों से राज्य सरकार ने नगर निगम को वित्तीय स्तर पर खस्ताहाल बनाया है। इस वजह से निगम प्रशासन को विभिन्न परियोजनाओं में अपनी हिस्सेदारी देने के लिए कर्ज पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
नगर निगम के क्षेत्रीय एवं कर अधिकारी बलबीर सिंह पंवार के मुताबिक नए पैटर्न पर हाउसटैक्स पहले से कम हो जाएगा, क्योंकि यहां ज्यादातर लोग छोटे घरों में रहते हैं। कितना कम होगा इसका पता सर्वे और मूल्यांकन के बाद पता चलेगा।
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एक रुपये गज में शामिल होगा पूरा एनआईटी
-नए पैटर्न के हाउसटैक्स से 1 लाख 58 हजार मकान मालिक एक रुपये प्रति गज के हिसाब से हाउसटैक्स देंगे। यानी अधिकतम 250 रुपये सालाना। इसमें भी मकान मालिक खुद रह रहा है तो उसे 50 फीसदी की छूट मिल जाएगी। यानी वह सवा सौ रुपये टैक्स देगा। एनएच (निस्सन हट) एक, दो, तीन, पांच का 95 फीसदी हिस्सा इसी ग्रुप में शामिल होगा। क्योंकि यहां पर अधिकांश मकान 233-233 गज के हैं। नगर निगम क्षेत्र में फिलहाल 2 लाख 31 हजार यूनिटें हैं।
-जवाहर कॉलोनी, डबुआ कॉलोनी, पर्वतीय कॉलोनी बल्लभगढ़ एवं ओल्ड फरीदाबाद आदि में भी ज्यादातर घरों पर यही हिसाब लागू होगा। अधिकारियों का कहना है कि सेक्टरों में पहले से थोड़ा ज्यादा हाउसटैक्स लगेगा। जो एक रुपये गज के हाउसटैक्स से होने वाले घाटे की भरपाई नहीं कर पाएगा। फरीदाबाद में करीब 75 वैध एवं इतनी ही अवैध कॉलोनियां भी हैं।
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-2008-09 के कलेक्टर रेट (सर्कल रेट) पर सालाना करीब 45 करोड़ रुपये हाउसटैक्स आता था। पुराने पैटर्न का हाउस टैक्स 2012-13 के सर्कल रेट से लगाने पर लगभग 90-95 करोड़ टैक्स बनता। जो नया पैटर्न लागू होने के बाद फिर 45-50 करोड़ पर खिसक आएगा। (कर अधिकारियों के अनुमान पर आधारित)
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‘यह गरीबों के हित का फैसला है। नए पैटर्न से राजस्व में जो घाटा होगा उसकी भरपाई के लिए सरकार से मांग की जाएगी, ताकि विकास कार्य प्रभावित न हो।’
-मुकेश शर्मा, सदस्य, फाइनेंस कमेटी, नगर निगम।
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