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बैंकों में हड़ताल, 700 करोड़ का लेनदेन ठप

Faridabad

Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
फरीदाबाद। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हड़ताल के चलते बुधवार को शहर भर की शाखाओं में कामकाज ठप रहा। इस हड़ताल के चलते लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। जिले की बैंक शाखाओं में करीब 700 करोड़ का लेनदेन प्रभावित होने का अनुमान है। करोड़ों के चेक अटक गए हैं। उधर, बैंक कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर के सामने धरना दिया। इसके बाद बाटा चौक से नीलम चौक और फिर वापस बाटा तक रैली निकाली।
द यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन ने बैंककर्मियों की लंबित मांगों के समर्थन में दो दिवसीय हड़ताल की घोषणा थी। इस आह्वान के चलते सुबह से शहर की सरकारी बैंकों की करीब सवा सौ शाखाएं नहीं खुलीं। हरियाणा बैंक एंप्लायज फेडरेशन के चेयरमैन भोले सिंह एवं सचिव कृपाराम शर्मा ने कहा कि सेवा शर्तों के एकतरफा फैसले, बैंकों में ठेकेदारी प्रथा, बैंकिंग नियमों का बदलाव एवं ग्रामीण शाखाओं को बंद करने के विरोध में कर्मचारी हड़ताल पर हैं। बुधवार को निकाली गई रैली में आरएस राघव बीर सिंह, अजय राय एवं ऑफिसर्स एसोसिएशन के एके सिन्हा आदि मौजूद थे। बैंककर्मियों की मांगों के समर्थन में ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के नेता दर्शन सिंह, बेचू गिरी एवं तरसेम सिंह भी रैली और धरना प्रदर्शन में पहुंचे।

एटीएम ने दिया सहारा
बैंकों की हड़ताल के चलते एटीएम से उन लोगों को बहुत सहारा मिला, जिन्हें नगदी की आवश्यकता थी। हालांकि कुछ एटीएम में नगदी समाप्त हो जाने पर लोगों को चक्कर लगाने पड़े।


पलवल में 22 बैंकों की 90 शाखाएं बंद रहीं
पलवल। जिले के 22 सरकारी बैंकों की 90 शाखाओं में बुधवार को कामकाज बंद रहा, इस अवसर पर कर्मचारियों ने बैंकों के सामने प्रदर्शन किया और मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, सिंडीकेट बैंक, पीएनबी बैंक, ओबीसी बैंक, इलाहाबाद व केनरा बैंक समेत सभी सरकारी बैंकों में लेनदेन नहीं हुआ। कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी और ओबीसी बैंक के कर्मचारी भगवान सहाय ने बताया कि हड़ताल से 220 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ है।
यूनियन के पदाधिकारी जे.एस. मैमी, भगवान सहाय, रामबीर सिंह, सुंदर व रापूचंद ने कहा कि सरकार आउटसोर्सिंग के बहाने बैंकों का निजीकरण करना चाहती है। हम पुरजोर ढंग से खंडेलवाल कमेटी की रिपोर्ट और ठेकेदारी प्रथा का विरोध करते हैं।
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