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अंतर्राष्ट्रीय स्वयं सेवा दिवस पर विशेष

Ambala

Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
अंबाला। एनएसएस के माध्यम से विद्यार्थियों को समाज सेवा के लिए प्रेरित किया जाता है, लेकिन जिला के मात्र 75 स्कूलों में ही इसका पाठ पढ़ाया जाता है। नियम ही ऐसे हैं कि समाज सेवा के इस महत्वपूर्ण पाठ से जिला के 723 स्कूल वंचित हैं। सरकार ने अभी तक सीनियर सेकेेंडरी स्तर पर ही एनएसएस इकाइयां खोलने की इजाजत दी है। ऐसे में समाज सेवा का जज्बा जो बचपन से ही बच्चों में जगाया जाना चाहिए, उससे बच्चे दूर हैं।
स्वयंसेवा यानी अपने स्तर पर समाज व उसके लोगों की मदद करने का जज्बा विद्यार्थियों में स्कूल स्तर पर पैदा किया जाता है। इसका मकसद यही है कि बच्चों के मन में समाज के प्रति उनके कर्तव्यों का बोध कराया जाए, ताकि समाज को एक सही दिशा प्रदान की जा सके। यह कार्य स्कूल स्तर पर ही किया जाता है ताकि आगे चलकर उनमें यह भावना जागृत रहे। लेकिन सरकारी नियम ही ऐसे हैं कि स्कूल स्तर पर ही एनएसएस की योजना फेल होती दिखाई दे रही है। सरकारी स्तर पर बात करें, तो एनएसएस इकाईयां जिला के 75 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में ही है, जबकि सरकारी स्कूलों की संख्या 798 है। इनमें से प्राइमरी स्तर के 505, मिडिल स्तर के 139, हाई स्कूल स्तर के 79 तथा सीनियर सेकेंडरी स्तर के 75 स्कूल हैं। ऐसे में जिला के 723 स्कूलों में एनएसएस की गतिविधियां ही नहीं हैं। इसके अलावा कालेज स्तर पर एनएसएस इकाइयां हैं।

आयोजन के लिए राशि भी नाममात्र
अंबाला। एसएसए की गतिविधियां बेशक सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में हैं, लेकिन इनका बजट इतना कम है कि एनएसएस शिविर मात्र आयोजन भर ही साबित हो रहे हैं। नियमों के अनुसार सरकारी स्कूल को साल भर में तीन कैंप एक-एक दिन के लगाने होते हैं, जिसमें कम से कम सौ बच्चे होने चाहिएं। इस एक दिन के कैंप के आयोजन के लिए प्रति कैंप मात्र 1200 रुपये मिलते हैं, जिसमें प्रति बच्चे के हिस्से सिर्फ 12 रुपये ही आते हैं। इसी प्रकार सात दिन का सालाना एक कैंप लगाया जाता है, जिसमें कम से कम पचास बच्चे होने चाहिए।
क्या कहना है पूर्व वालंटीयर का
अंबाला। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के बेस्ट एनएसएस वालंटीयर रहे एवं वर्तमान में एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल रमेश बंसल का कहना है कि प्राइमरी या फिर मिडिल स्तर से ही एनएसएस की भावना बच्चों में जागृत करनी चाहिए। यदि छोटी क्लासों से ही यह भावना जागृत होगी, तो आगे चलकर बच्चों में समाज सेवा की भावना बढ़ेगी, जिसका फायदा समाज को होगा। एनएसएस की भावना जागृत करने के प्राइमरी, मिडिल या फिर हाई स्कूल के बच्चों के अनुसार ही आयोजन किया जा सकता है।
कोट

‘सरकारी स्कूलों में सीनियर सेकेंडरी स्कूल स्तर पर ही एनएसएस इकाइयां हैं, जबकि अन्य स्तर के स्कूलों में नहीं हैं। जो भी नियम हैं, उनके अनुसार एनएसएस कैंप लगाए जाते हैं। प्राइमरी, मिडिल अथवा हाई स्कूल के बच्चों को भी सामाजिक गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जाता है।’
- अवधेश पांडे, कार्यक्रम अधिकारी, शिक्षा विभाग अंबाला
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