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मुफ्त में नहीं पढ़ाएंगे बच्चों को

Ambala

Updated Tue, 04 Dec 2012 05:30 AM IST
अंबाला। जिला शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए तीन नोटिस के बावजूद निजी स्कूल संचालक हरियाणा शिक्षा नियमावली 134-ए को मानने को तैयार नहीं है। स्कूल संचालकों ने दो टूक कह दिया है कि वे मुफ्त बच्चों को तालीम नहीं देंगे। शिक्षा विभाग द्वारा दिए गए नोटिस की मियाद भी पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद निजी स्कूल संचालकों की फेडरेशन ने शिक्षा विभाग के नोटिस का जवाब देते हुए साफ कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर छात्रों को मुफ्त शिक्षा नहीं दे पाएंगे। फेडरेशन का कहना है कि निजी स्कूल राइट टु एजूकेशन एक्ट के तहत तो गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान कर देंगे, मगर हरियाणा शिक्षा नियमावली 134-ए के तहत गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा नहीं देंगे।
आरटीई और 134-ए में फर्क
प्राइवेट स्कूल द्वारा राइट टु एजूकेशन एक्ट में निर्धारित अनुपात के तहत स्कूलों में गरीब बच्चों को जो निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी, उसमें जो खर्च आएगा, उसका वहन सरकार द्वारा किया जाएगा। लेकिन हरियाणा शिक्षा नियमावली 134 ए के तहत स्कूल में 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूल निशुल्क शिक्षा प्रदान करेगा, मगर उसका वहन हरियाणा सरकार नहीं करेगी। यानी प्राइवेट स्कूलों को ही गरीब बच्चों को पढ़ाने का खर्च उठाना होगा।

अड़ी फेडरेशन, पसोपेश में शिक्षा विभाग
अंबाला में तकरीबन 225 मान्यता प्राप्त प्राइवेट व अनुदान प्राप्त स्कूल ऐसे हैं, जिन्हें 134-ए की शर्त का अपने स्कूलों में लागू करवाना है। अनुदान प्राप्त स्कूल के शिक्षक तो खैर इस बात का खुलकर विरोध नहीं कर रहे हैं। मगर अधिकतर प्राइवेट स्कूल फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले लामबंद होकर इसका विरोध कर रहे हैं। फेडरेशन के प्रदेशाध्यक्ष कुलभूषण शर्मा, प्रदेश महासचिव सुशील शर्मा, प्रदेश सचिव बलदेव सैनी व जिलाध्यक्ष बंसी लाल कपूर के अनुसार फेडरेशन इस मामले में सरकार के फैसले का इंतजार कर रही है। लेकिन प्राइवेट स्कूल अपने फैसले पर अडिग है। स्कूल 134-ए नियमावली के तहत छात्रों को निशुल्क नहीं पढ़ाएंगे। उधर, जिला शिक्षा अधिकारी जोगेंद्र हुड्डा के अनुसार मामले से निदेशालय को अवगत करवा दिया है। अब सरकारी निर्देशों का इंतजार है।

अब गेंद सरकार के पाले में
फेडरेशन के प्रदेशाध्यक्ष कुलभूषण शर्मा के अनुसार शिक्षा विभाग से जो नोटिस मिले थे, उसके जवाब में शिक्षा विभाग से ही ये पूछा गया है कि शिक्षा विभाग ही बताए कि यदि 25 प्रतिशत बच्चों को प्राइवेट स्कूल फ्री पढ़ाएंगे तो खर्चों को कहां से पूरा करेंगे? साथ ही स्कूल जब आरटीई के तहत गरीब बच्चाें को पढ़ाने को तैयार है, तो उन पर 134-ए नियम क्यों थोपा जा रहा है। प्रदेशाध्यक्ष के अनुसार पिछले दिनों मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मिलकर उन्हें भी फेडरेशन ने 134-ए को लेकर पैदा होने वाली स्कूलों की समस्या व निर्णय से अवगत करवा दिया है। सीएम ने आश्वासन दिया है कि कैबिनट की बैठक में चरचा कर जल्द ही इसका हल निकाला जाएगा। उनके अनुसार प्राइवेट स्कूल संचालक इस मुद्दे को लेकर लामबंद है और सरकार द्वारा सकारात्मक निर्णय नहीं देने तक संघर्षरत रहेंगे।

विवाद में पिस रहे बच्चे
प्राइवेट स्कूल आरटीई के तहत तो बच्चों को निशुल्क पढ़ाएंगे, मगर हरियाणा शिक्षा नियमावली 134-ए के तहत नहीं। ये विवाद प्राइवेट स्कूल व हरियाणा शिक्षा विभाग के बीच चल रहा है, लेकिन इसमें वो जरूरतमंद पिस रहे हैं, जिन्हें इस योजना का लाभ मिलना है। प्राइवेट स्कूल संचालकों ने अभी तक इसी विवाद के चलते गरीब बच्चों को इसका लाभ नहीं दिया है। जिसकी वजह से छात्रों के अभिभावक भी परेशान है।

100 से ज्यादा शिकायतें
विवाद निपटान तक प्राइवेट स्कूलों द्वारा जरूरतमंद बच्चों को दाखिला न देने के रवैये से क्षुब्ध छात्रों के अभिभावक लगातार शिक्षा विभाग में शिकायत करते रहते हैं। शिक्षा विभाग में इस संबंध में 100 से अधिक शिकायतें पहुंच चुकी है। जिसके बाद शिक्षा विभाग ने स्कूलों को हरियाणा शिक्षा नियमावली 134-ए के तहत स्कूलों में गरीब बच्चों को दाखिला देने के निर्देश भी दिए। मगर किसी स्कूल ने ये निर्देश नहीं मानें, लिहाजा इन शिकायतों पर आज भी कुछ ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई।

सरकार निपटाए विवाद
अभिभावक मंच के नेता ओंकार नाथ परूथी, सुनील वर्मा व अन्य अभिभावक विक्रम चौहान व दीपिका, प्रदीप कुमार, संतोष कुमार, भरत व सुमित सिंह कहते हैं कि मौजूदा सेशन में तो जरूरतमंद बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। मगर सरकार जल्द से जल्द विवाद को निपटाए, ताकि अगले साल नए सैशन में कम से कम बच्चों को आरटीई या 134-ए के तहत लाभ तो मिल सके। सरकार ये सुनिश्चित करवाएं कि प्राइवेट स्कूल नियमों का प्रतिबद्धता के साथ पालन करते हुए छात्रों का इसका लाभ दें।
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