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जमीन की जीएलआर भी संदेह के घेरे मे

Ambala

Updated Sat, 10 Nov 2012 12:00 PM IST
अंबाला। छावनी के धोबी घाट के पास स्थित बेशकीमती करोड़ों की लीज लैंड पर कब्जा करने के मामले में जमीन की जारी की गई जीएलआर (जनरल लैंड रजिस्टर) भी संदेह के घेरे में आ गई है। े जीएलआर की प्रति बनारसी दास ट्रस्ट को अंबाला स्थित रक्षा संपदा कार्यालय द्वारा जारी की गई थी।
हैरत की बात यह है कि जीएलआर रिकार्ड की ये प्रति संशोधित करते हुए अलग-अलग छह बार जारी की गई, जबकि फरवरी 1977 के बाद इस जमीन की देखरेख का काम रक्षा संपदा कार्यालय द्वारा बंद कर दिया था। पांच फरवरी 1977 में यह जमीन मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस ने हरियाणा सरकार को हैंड ओवर कर दी थी। फरवरी 1977 के बाद इस जमीन की देखरेख नगर परिषद अंबाला छावनी द्वारा की जा रही थी।
धोबीघाट के पास रॉबर्ट मैमोरियल पैविलियन साइट के नाम से मौजूद 4.16 एकड़ इस जमीन पर फिलहाल आरबीएल ट्रस्ट का कब्जा है। इस जमीन की चहारदीवारी भी करवा दी गई है। जोकि अवैध है। इस जमीन पर पुख्ता कब्जा करने के लिए न केवल नायब तहसील अंबाला छावनी कार्यालय से फर्जी लैंड सर्टिफिकेट तैयार करवाया गया, बल्कि निदेशालय हरियाणा शहरी स्थानीय निकाय कार्यालय से निदेशक के फर्जी आदेश भी तैयार करवा लिए गए।
अब इस जमीन का रक्षा संपदा कार्यालय अंबाला द्वारा जो जीएलआर रिकार्ड की जो प्रतियां जारी की गई है, वो भी संदेह के घेरे में है। क्योंकि इसी रिकार्ड में ये स्पष्ट होना है कि इस जमीन की लीज कितने समय के लिए है?
आरटीआई कार्यकर्ता और समाजसेवी बृज मोहन विग ने रक्षा संपदा कार्यालय अंबाला परिमंडल से आरटीआई एक्ट के तहत ये सूचना मांगी थी कि 164-सी सर्वे साइट की जो जीएलआर विभाग ने संबंधित ट्रस्ट को जारी किया है, उसकी सत्यापित प्रति उपलब्ध करवाई जाए। इसी संबंध में जितनी बार भी जीएलआर रिकार्ड की प्रति जारी की गई, वो भी उपलब्ध करवाई जाए।
लेकिन इस आरटीआई के जवाब में विभाग ने बताया कि 05 फरवरी 1977 की अधिसूचना के अनुसार कैंटोनमेंट से सदर क्षेत्र को अलग किया गया था। तभी से सदर क्षेत्र में आने वाली जमीनों की देखरेख रक्षा संपदा विभाग द्वारा नहीं की जाती। इसी जमीन को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे समाज सेवी मास्टर मदन लाल शर्मा बताते हैं कि इस जवाब में रक्षा संपदा विभाग कहता है कि विभाग इसलिए जीएलआर की प्रति उपलब्ध नहीं करवा सकता, क्योंकि विभाग इस जमीन की देखरेख ही नहीं करता। इसकी शिकायत केंद्रीय जनसूचना अधिकारी, रक्षा संपदा अधिकारी को भेज दी गई है।
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