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मालिकाना हक दिखाओ, फिर होंगे नक्शे पास

Ambala

Updated Mon, 05 Nov 2012 12:00 PM IST
अंबाला। छावनी के सदर इलाके में रिहाइशी और व्यावसायिक भवनों को बनाने वाले लोगों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। उनके भवनों के नक्शे आने वाले समय में भी पास हो जाएंगे, ऐसी कोई उम्मीद नहीं है। डीसी अंबाला ने फरमान जारी कर दिया है कि जब तक व्यक्ति संबंधित प्रापर्टी पर अपने मालिकाना हक और एग्रीमेंट आफ लीज के दस्तावेज रूपी प्रमाण प्रस्तुत नहीं करेगा, तब तक नक्शे पास नहीं किए जाएंगे। इसके चलते डीसी ने छावनी के सदर इलाके की 70 फाइलों को यही आबजेक्शन लगाकर रिजेक्ट कर दिया है और भविष्य में भी उक्त शर्तें पूरी किए बिना नक्शा पास होने की संभावना से भी इनकार कर दिया है। छावनी का सदर क्षेत्र में इस वक्त नक्शा पास होने के लिए काफी संख्या में फाइलें पेंडिंग पड़ी है। दरअसल, अंबाला छावनी को 1843 में अंग्रेजों ने बसाया था, 1947 के बाद छावनी का सारा इलाका इंडियन आर्मी के पास चला गया। उसके बाद इसका रखरखाव सैन्य प्रशासन के कैंटोनमेंट बोर्ड के पास था। मगर 1977 में सदर क्षेत्र का 1068 एकड़ इलाका सदर क्षेत्र घोषित कर दिया, यहां सिविलियन रहते थे। ये इलाका हरियाणा सरकार के पास चला गया और सदर नगर परिषद इसका रखरखाव करती थी। लेकिन अब समस्या यह थी कि इस 1068 एकड़ जमीन की मालिक तो सरकार थी, मगर यहां जमीनों पर हजारों परिवार बहुत पहले से बसे हुए थे। ये सारा इलाका सदर क्षेत्र कहलाता था। अब यहां जमीनें तो सरकार की है, मगर जमीनों पर बने भवन लोगों के हैं। ऐसी ही जगहों पर डीसी अंबाला ने रिहाइशी और व्यवसायिक भवनों के नक्शे पास करने से साफ इनकार कर दिया है और नक्शा पास करने के लिए आई सभी फाइलों पर आबजेक्शन लगाते हुए यह कहते हुए रिजेक्ट कर दी है कि आवेदनकर्ता संबंधित प्रापर्टी के मालिकाना हक और एग्रीमेंट आफ लीज का प्रमाण पेश करें, उसके बाद ही नक्शे पास किए जाएंगे।
पहले कैसे पास हुए 900 नक्शे
डीसी शेखर विद्यार्थी ने फरमान तो जारी कर दिया, मगर पिछले डीसी के कार्यकाल में इसी क्षेत्र के 900 नक्शे पास किए गए। इतना ही नक्शा पास होने के बाद बाकायदा इन मकानों की रजिस्ट्रियां भी लोगों के पास है। लेकिन ये रजिस्ट्रियां जमीन पर बने ढांचे की है, जमीनों की नहीं। इसके आधार पर लोग न केवल अपना आशियाना बना लेते थे, बल्कि जरूरत पड़ने पर अपनी संपत्तियों की खरीद-फरोख्त भी कर लेते थे। लेकिन अब मौजूदा डीसी ने इन जमीनों पर भवनों के नक्शे पास करने से इनकार कर दिया है।

जनता और जनप्रतिनिधियों में रोष
इस संबंध में निर्वमान पार्षद कमल किशोर जैन, सुरेश गर्ग, गगन डांग, नवीन यादव, बाबू कनौजिया, महेश गोयल, ओंकार नाथ परुथी, समेत राहुल शर्मा, सचिन गुप्ता, सोहनलाल, शम्मी चौहान, पुरुषोत्तम शर्मा व प्रवीण कुमार कहते हैं कि यहां लोग केवल कुछ सालों से नहीं रह रहे, बल्कि आजादी से पहले के रह रहे हैं। बहुत से लोगों के पास मकानों की रजिस्ट्रियां हैं। ऐसे में अब उन्हें ये कहा जा रहा है कि जमीनों के मालिकाना हक का प्रमाण लाओ। जनप्रतिनिधियों के अनुसार सरकार भी ये बात भली प्रकार जानती है और इसका हल भी सरकार के पास ही है तो जनता को क्यों परेशान किया जा रहा है।

सरकार के निर्देशों के बाद पास होंगे नक्शे
डीसी शेखर विद्यार्थी कहते हैं कि पिछले कार्यकाल में 900 नक्शे कैसे पास हुए, मैं नहीं जानता। लेकिन जिस जमीन का मालिक जनता है ही नहीं, उस जमीन पर बनाए मकान का नक्शा कैसे पास हो सकता है। इसलिए मैने 70 के करीब नक्शे रिजेक्ट करते हुए मालिकाना हक का प्रमाण या एग्रीमेंट आफ लीज की प्रति नक्शे के आवेदन के साथ लगाने को कहा है। दूसरा, इस बारे में सरकार को लिख दिया गया है और सारी स्थिति से अवगत करवा दिया गया है। सरकार चाहेे तो इसके लिए पॉलिसी तैयार करके लोगों को राहत दे सकती है, मगर नियमों के विरुद्ध प्रशासन नक्शे पास नहीं कर सकता। जब तक सरकार की ओर से निर्देश नहीं आएंगे, तब तक नक्शे पास नहीं होेंगे।
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