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‘दशानन’ बनी दस ‘समस्याओं’ से मुक्ति चाहिए

Ambala

Updated Wed, 24 Oct 2012 12:00 PM IST
अंबाला। ऐसा कहा जाता है कि विजयदशमी पर दशानन के दहन के साथ-साथ बुराइयों और समस्याओं का भी अंत हो जाता है। इसलिए बुधवार को अंबाला में विभिन्न जगहों पर बुराई के प्रतीक रावण का दहन किया जाएगा। इस तथ्य के बिल्कुल विपरित यदि हम कहें कि अंबाला में भी दस समस्याएं ऐसी है, जो दशानन के दस मुखों की तरह सालों से मुखर है और लोगों को इन दस समस्याओं वाले दशानन से भी मुक्ति चाहिए, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। स्थानीय लोग और समाजसेवी संगठन भी इस बात को लेकर न केवल सजग हैं, बल्कि जिला प्रशासन से इन समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस दशहरे पर प्रशासन को उन्हें इन दस समस्याओं के जल्द समाधान करवाने का पक्का आश्वासन देना चाहिए।
समस्या-एक
गंदा है शहर, देखो डीसी साहब
शहर व छावनी की सबसे बड़ी दस समस्याओं में पहली समस्या है गंदगी। ट्विनसिटी में किसी भी मोहल्ले और कालोनी में जाकर कभी भी अफसरगण जायजा ले लें। वहां न तो नालों की नियमित सफाई मिलेगी, न ही नियमित सफाई कर्मी। खाली प्लाट कूड़ेदान बन चुके हैं, नालों की सफाई की याद केवल बरसाती दिनों में इसलिए आती है कि बारिश का पानी अवरुद्ध होकर शहर व छावनी में जलभराव की वजह न बन जाए। खैर, कूड़ा निस्तारण से करोड़ों की लागत से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनवाया गया, जो सालों से ठप पड़ा है, करोड़ों रुपये कचरा हो गए। सुबह-सुबह सफाई के मुद्दे पर या तो लोग कई दिन बाद आने वाले सफाई कर्मी से भिड़ रहे होते हैं या खुद ही हाथों में डंडे लेकर घर के आगे की नालियां साफ कर रहे होते हैं। लोगों के अनुसार डीसी साहब इन हालातों को देखों और गंदगी से निजात दिलवाओ।

डीसीपी साहब, ‘अब’ तो आम बन गया जाम
शहर व छावनी के मेन बाजारों में जाम की समस्याओं से लोग इस कदर दुखी है कि उनके लिए जाम अब आम बात बन गई है। कई पुलिस अफसर अंबाला में आए बाजारों में ट्रैफिक सुधारों को लेकर कई प्लानिंग तैयार की गई, लेकिन कोई सिरे नहीं चढ़ी। सब, ढाक के तीन पात। इस समस्या ने तो पुलिस और जिला प्रशासन ने पसीने छुड़वा दिए। डीसी व डीसीपी साहब कुछ ऐसी प्लानिंग चाहिए, जो बाजारों के जाम से लोगों को मुक्ति दिलवा सके।

पुराना शहर, पर सीवरेज ही नहीं
शहर व छावनी में यदि देखा जाए तो छावनी के कुछ हिस्से को छोड़कर शहर व छावनी के अधिकतर हिस्से सीवरेज सुविधा से वंचित है। इस मामले में तो अंबाला शहर में सबसे ज्यादा समस्या है। लोगों के घरों से आने वाला मल-जल कहां जाएं, कोई साधन नहीं। खुलेआम ये मल-जल नालियों में बहाया जा रहा है और इसकी बदबू से लोगों का जीना मुहाल है। लोगों का कहना है जन स्वास्थ्य महकमे के एसई साहब को देखना चाहिए कि अंबाला इतना पुराना शहर है और सीवरेज तो बुनियादी सुविधा है, कम से कम पूरे शहर में सीवरेज तो होना चाहिए।

सीएमओ साहब, बीमार है कैंट सिविल अस्पताल
अंबाला छावनी की आबादी लगभग पौने दो लाख के करीब है। इस आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए कैंट में सिविल अस्पताल खोला गया। लेकिन ये सिविल अस्पताल आज खुद ही बीमार है। इस अस्पताल में ट्रामा सेंटर खोलने की योजना बनाई। मगर इस सेंटर को शहर सिविल अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। शहर व सिटी अस्पतालों में विशेषज्ञ डाक्टर ही नहीं है। अस्पताल से मिलने वाली दवाओं को टोटा, बाहर से महंगी दाम पर खरीदते हैं दवाइयां। अस्पतालों में बेड कम है और कई जरूरी सेवाएं भी नहीं है, जिस वजह रेफर टू चंडीगढ़ कर दिया जाता है।

जल विभाग की मेहरबानी, पीओ गंदा पानी
पानी सबसे बड़ी मूलभूत सुविधा है। हैरानी की बात यूं होती है, जब शहर में गंदे पानी की सप्लाई अमूमन हो रही हो। शहर व छावनी के बहुत से इलाके खासकर सबसे पाश इलाके कहे जाने वाले हुडा के सेक्टर और हाउसिंग बोर्ड कालोनी में भी लोगों को गंदा व काले रंग का पानी पीना पड़ रहा है। कुछ दिन पहले तो एक नल में से सांप का बच्चा निकल आया, जिसे देखकर कालोनीवासी घबरा गए। शिकायतें तो जल महकमे के पास ढेरों हैं, मगर इन शिकायतों का निदान कब होगा ये तो राम जाने।

डीईओ मैडम, स्कूलों पर कसो शिकंजा
आज महंगी शिक्षा भी लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या है। चलो महंगी शिक्षा तो समझ में आता है, मगर मनमानी फीसों की कहानी गले नहीं उतरती। इस सेशन में अभिभावक प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीसों के खिलाफ सड़कों पर उतरे, धरने दिए, प्रदर्शन किए, डीसी के दरबार तक पहुंचे, लेकिन नतीजा सिफर। डीईओ मैडम कहती है प्राइवेट स्कूलों से उनका फीस स्ट्रक्चर मंगवाने के निर्देश दिए हैं, मगर यहां कौन ऐसे निर्देशाें को मानता है, जब वक्त होगा तो दे देंगे, फिलहाल अभिभावकों की भलाई इसी में हैं, वो मनमानी फीसें देते रहें और चुप्पी साधकर बच्चों को पढ़ाते रहें।

बिजली दे दो, वरना बेहाल हो जाएंगे उद्योग
बिजली महकमे के एसई और एक्सईएन साहब बिजली कटौती को लेकर बहुत परेशान हैं, क्योंकि उन्हें मालूम है, यदि जनता भड़क गई तो धरना देते हुए अंबाला की जनता अफसरों को भी जबरन अपने साथ सड़क पर बिठा लेती है। दूसरा, इस साल इस बिजली के झटकों ने देश की सबसे बड़ी साइंस सिटी से एक अरब के विदेशी आर्डर छीनकर चीन को दिलवा दिए। मिक्सी व दवा उद्योग भी इस बार बिजली कटों की वजह से खासे नुकसान में रहे। बिजली का यही हाल रहा, तो अंबाला के तीन बड़े उद्योगों साइंस, मिक्सी व दवा उद्योग बेहाल हो जाएंगे।

टूटी सड़कों पर अफसर भी दिखाएं चलकर
तीन साल बीतने वाले हैं छावनी के मोहल्लों और कालोनियों की सड़कें देख लो, फिर बताओ क्या ये सड़के चलने लायक है। करोड़ों रुपया सड़कों का आया, पर लग नहीं पाया। इसी मांग को लेकर समाजसेवी शिकायत करते-करते अभी तक थके नहीं हैं, उनके प्रयास जारी है, उम्मीद है कभी तो सड़कें बन ही जाएंगी, लेकिन एक आस जरूर लोगों के मन में हैं, वो ये कि एक बार जिले के अफसर भी पैदल या गाड़ी में ही सही, छावनी की कालोनियों व मोहल्लों में आएं और इन सड़कों का जायजा लें, हो सके तो चलकर देख लें, सड़कों की हालत मालूम चल जाएगी।

अब जेवर बनाने आसान नहीं, स्नैचरों को पकड़वाओ
आज इस वक्त सोना इतना महंगा हो चुका है कि जेवर बनाने आसान नहीं है। लेकिन यहां अंबाला में तो स्नैचर और ठग खुलेआम घूमते हैं और राह चलती महिलाओं को शिकार बनाकर उन्हें लूटते हैं। कोई गाड़ी में लिफ्ट देने के बहाने गहने लूटता है, तो कोई महिलाओं के गले व कान में लटके गहनों पर हाथ डालता है। पिछले दिनों टीटीई ने हिम्मत दिखाकर एक स्नैचर को पकड़ा था। डीसीपी साहब आप भी पुलिस को थोड़ा चुस्त बनाइए और इन स्नैचरों व ठगों को पकड़वाइए, लोगों का सोना यूं ही जाता रहा, तो न जाने इस महंगाई में लोग अपने जेवर फिर बनवा पाएंगे भी या नहीं?

कब्जे और अतिक्रमण: सब सेटिंग का खेल है
शहर में नगर निगम के अफसरों व कर्मचारियों की फौज शहर व छावनी में घूमती रहती है। उसके बावजूद भी बिना बिल्डिंग प्लान पास करवाए लोग अपना बहुमंजिला भवन खड़ा कर देते हैं, कोई दुकानों के बाहर नालों पर थड़े बना लेता है, तो कोई शटर लगाकर कब्जा कर लेता है। लेकिन हैरत की बात यह है कि बाजारों में निरीक्षण के लिए निकलने वाली निगम की फौज शायद बापू के ‘तीन बंदरों’ की तरह निकलती है और वापस आ जाती है। कब्जों की कोई शिकायत न उन्हें सुनती है, न दिखती है और न ही इस पर कोई बोलना चाहता है। क्यों भई? क्योंकि यहां सब सेटिंग का खेल है। जब तक आला अफसर इशारा नहीं करेंगे, तब तक कार्रवाई संभव नहीं। अब बताओ, अवैध कब्जे तुड़वाने के लिए एक व्यक्ति को हाईकोर्ट तक जाना पड़ गया, लेकिन शायद प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश मानने को भी तैयार नहीं है?

समस्याओं के खिलाफ जारी रहेगा संघर्ष
उक्त समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रही विभिन्न सामाजिक संस्थाओं का कहना है कि उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलती और उक्त समस्याओं से छुटकारा नहीं मिलता। सांझा मोर्चा के सदस्य कमल किशोर जैन, सुरेश गर्ग, विजेंद्र चौहान, ओंकार नाथी, निवर्तमान पार्षद महेश गोयल व गगन डांग, भारत विकास परिषद के अध्यक्ष सुरेश शर्मा, प्रदीप खेड़ा, ग्रीन सर्कल सदस्य अनिल श्रीवास्तव, सदर बाजार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय गुलाटी, एल्डर फोरम के अध्यक्ष केएल चोपड़ा, समाजसेवी राजदीप सिद्धू, अर्बन स्टेट वेलफेयर सोसाइटी के सदस्य एडवोकेट संदीप सचदेवा, समाजसेवी मदनलाल शर्मा, आनंद मोहन शुक्ला, पुरुषोत्तम लाल शर्मा, डिफेंस एंक्लेव वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष तीर्थराम काला, समाजसेवी कर्नल सतनाम, संतोष कुमार खिंची, शम्मी चौहान कहते हैं उक्त समस्याएं गंभीर समस्याएं हैं, जिनके लिए वे लोग संघर्षत हैं। इन समस्याओं से ट्विनसिटी की समस्याओं से निजात मिलनी चाहिए। क्योंकि बुनियादी सुविधाएं लोगों का हक है। कमल किशोर जैन के अनुसार छावनी के सदर क्षेत्र में लोगों की म्यूटेशन न होना और बिल्डिंग प्लान पास न होना भी बड़ी समस्या है।

‘प्रशासन सभी समस्याओं को लेकर गंभीर है। धीरे-धीरे सभी समस्याओं पर फोकस कर उन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। लोगों की परेशानी को प्रशासन गंभीरता से ले रहा है, कोशिश करूंगा कि अंबाला में सभी लोगों को कम से कम बुनियादी सुविधाएं जरूर मिले।’
-शेखर विद्यार्थी, डीसी अंबाला-
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