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रेलवे ट्रैक पर हंगामा, पैसेंजर ट्रेन रोकी

Ambala

Updated Fri, 21 Sep 2012 12:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला। महंगाई और एफडीआई के विरोध में वीरवार को विपक्ष ने जमकर हंगामा कर बवाल काटा। बाजारों में जहां उन्होंने दुकानें बंद करवा दी, वहीं, अंबाला शहर रेलवे स्टेशन पर भी विपक्ष ने एक पैसेंजर ट्रेन रोककर बवाल काटा। सूचना मिलने पर तुरंत पुलिस वहां पहुंची और विपक्ष के स्थानीय नेताओं को समझाया। जिसके बाद दस मिनट बाद ही विपक्ष के नेताओं ने रेलवे ट्रैक पर लगाया जाम खोल दिया और पुलिस ने पूरी सुरक्षा के साथ पैसेंजर ट्रेन को वहां से गुजरवा दिया। दोपहर तक ट्विनसिटी का अधिकांश बाजार बंद रहा। मगर उसके बाद कारोबारियों ने अपनी दुकानें खोल लीं। इस दौरान शहर के बाजारों में सरकार के पुतले भी फूंके गए।

कारोबार हुआ प्रभावित
बंद के दौरान भाजपा, इनेलो और हजकां तीनों पार्टियों ने मिलकर अपनी पूरी ताकत झोंक दी। भाजपा और हजकां ने जहां मिलकर शहर व छावनी में अलग-अलग रोष जुलूस निकाले, वहीं बाजारों में दुकानों को बंद करवाया। छावनी में इनेलो नेत्रियों ने बाकायदा सिलेंडर उठाकर प्रदर्शन किया। छावनी में जहां भाजपा के बंद का नेतृत्व छावनी विधायक अनिल विज कर रहे थे, वहीं शहर में पूर्व विधायक वीणा छिब्बर, जसबीर मलौर, विनोद गर्ग के नेतृत्व में भाजपाइयों ने रोष जुलूस निकाला। उधर, छावनी में इनेलो नेता ओंकार सिंह व शहर में जिलाध्यक्ष बलविंद्र सिंह पूनिया के नेतृत्व में रोष जुलूस निकाला गया और सदर बाजार छावनी व सराफा बाजार शहर में सड़क पर बैठकर धरने दिए गए। इस दौरान दोपहर तक कारोबार काफी प्रभावित हुआ और कारोबारियों का करोड़ों रुपये का नुकसान हो गया।

जबरन बंद करवाई दुकानें
भाजपा, हजकां व इनेलो कार्यकर्ताओं ने जहां शहर व छावनी के तमाम बाजारों में रोष जुलूस निकाला, वहीं, बाजारों में जबरदस्त दुकानदारों की दुकानें बंद करवाई। इस दौरान कई दुकानदारों से उनकी बहसबाजी भी हुई। लेकिन कार्यकर्ताओं ने जबरन शटर बंद करवाए। छावनी में एक शराब के ठेके पर भी इनेलो कार्यकर्ताओं की बहस हो गई। मगर कार्यकर्ताओं ने ठेका बंद करवाकर ही दम लिया। जबकि कई दुकानदार ऐसे भी रहे, जो आधा शटर खोलकर अपना कामकाज करते रहे।

गच्चा दे गए भाजपाई, शहर में ट्रैक रोका
अप्रैल 2012 में भाजपाइयों का रेल रोको आंदोलन को कुचलने के लिए प्रशासन और रेलवे पुलिस ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। काफी जद्दोजहद के बाद केवल कुछेक कार्यकर्ताओं को बशर्ते ट्रैक के पास जाकर केवल नारेबाजी की इजाजत दी गई थी। लेकिन इस बार भाजपाइयों ने जिला और रेलवे प्रशासन और पुलिस को गच्चा दे दिया। हुआ यूं कि शहर व छावनी में दो रेलवे स्टेशन है। अंबाला छावनी का रेलवे स्टेशन सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन है। जबकि शहर का रेलवे स्टेशन छोटा है। रेलवे व पुलिस प्रशासन को संदेह था कि कई इस बार फिर से विपक्षी कार्यकर्ता हो हल्ला करते हुए अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन नहीं पहुंच जाए। इसके लिए अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन पर तो चाक-चौबंद व्यवस्था की गई थी। अंबाला शहर रेलवे स्टेशन पर ज्यादा पुलिस तादाद नहीं थी। इसका फायदा उठाते हुए भाजपा व हजकां कार्यकर्ता काफी संख्या में अंबाला शहर रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए और वहां एक नंबर प्लेटफार्म पर वहां जाम लगा दिया। इसी दौरान अमृतसर-दिल्ली पैसेंजर आ रही थी, जिसे उन्होंने वहीं रोककर जाम लगा दिया और इंजन व ट्रैक पर जमकर बवाल काटा। तुरंत वहां पुलिस फोर्स भेजी गई। पुलिस ने उन्हें आराम से समझाया और यात्रियों को होने वाली परेशानियों का वास्ता दिया। जिसे भाजपा व हजकां कार्यकर्ताओं ने समझा और दस मिनट बाद ट्रैक से जाम हटा दिया।

मेडिकल की दुकानें बंद करवाई
बंद के दौरान एक बात आम लोगों को रास नहीं आई। वैसे तो आम लोगों ने विपक्ष के इस बंद का समर्थन दिया, मगर जब ये कार्यकर्ता मेडिकल की दुकानें बंद करवा रहे थे, तो मेडिकल दुकानों के संचालकों व वहां खड़े कुछ तीमारदारों ने इनसे आग्रह किया कि ये इमरजेंसी सर्विसेज की दुकानें हैं, इसलिए इन्हें बंद नहीं करवाएं। मगर अति उत्साह से लबरेज कार्यकर्ता कुछ सुनने और समझने को ही तैयार नहीं थे और उन्होंने जबरन मेडिकल की दुकानें भी बंद करवा दी। ये दुकानें फिर दोपहर बाद संचालकों ने फिर खोल ली।

कोट्स
‘बंद का असर बढ़िया रहा। बंद शांतिपूर्ण रहा। बंद को आम जनता ने भी समर्थन दिया। लोग महंगाई से ज्यादा दुखी है। इसलिए लोग भी उनके साथ सड़कों पर उतरे। ये तो अभी शुरुआत है, यदि ये निर्णय वापस नहीं हुए, तो जनता और ज्यादा भड़केंगे।’
-अनिल विज, विधायक छावनी,

‘जनता इस महंगाई से इतनी ज्यादा दुखी है कि लोगों को अब समझ नहीं आ रहा है कि वे क्या करे? ये महंगाई आम आदमी की पहुंच से बहुत ज्यादा दूर है, इसलिए अब और ज्यादा गुस्सा भड़क सकता है।’
-जसबीर मलौर, पूर्व विधायक-

‘गृहिणियों का रसोई का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है। डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ने की वजह से लोग बहुत ज्यादा परेशान है। हर वर्ग बहुत ज्यादा दुखी है। इसमें कोई दोराय नहीं है कि पब्लिक अब खुद सड़कों पर उतरकर अपना गुस्सा व्यक्त करेगी।’
-वीणा छिब्बर, पूर्व विधायक-

‘अर्थव्यवस्था का ये हाल हो रहा है कि अमीर आदमी अमीर होते जा रहा है और गरीब आदमी गरीब होता जा रहा है। ऐसे में मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा पिस रहा है। क्योंकि वह अपनी जीवन शैली कैसे बदले, हालात और ज्यादा खराब होने वाले हैं।’
-बलविंद्र पूनिया, जिलाध्यक्ष इनेलो-

‘सरकार को अपने जनविरोधी निर्णय वापस लेने होंगे। तभी जनता का गुस्सा शांत होगा। सरकार यदि ये सोच रही है कि जनता चिल्ला-चिल्लाकर शांत हो जाएगी, तो यह गलत सोच है। जनता का गुस्सा तो अब और ज्यादा भड़कने के आसार पैदा हो रहे हैं।’
-ओंकार सिंह, छावनी अध्यक्ष, इनेलो

‘राजनीतिक पार्टियां अपनी राजनीतिक रोटियां नहीं सेंक रही है, वे जनता की आवाज को बुलंद कर रही है, अब आम जनता और कारोबारी संगठनों को भी उनके साथ मिलकर महंगाई और जनविरोधी बयानों के प्रति आवाज बुलंद करनी होगी। तभी जाकर सरकार पर दबाव बनेगा और ये जन विरोधी फैसले वापस होंगे।’
-विनोद गर्ग, मंडल अध्यक्ष-

बंद दूसरों के लिए, हमारे लिए नहीं
बंद के दौरान कई हैरानी वाली बातें भी देखने को मिली। इसमें ये देखा गया कि शहर व छावनी में उन स्थानीय नेताओं की अपनी दुकानें तो खुली थी, जो बाजार बंद के जुलूसों में आगे-आगे आवाज बुलंद कर रहे थे। चौड़ा बाजार में कपड़े की दो पास-पास दुकानें भाजपा नेताओं की है। ये दोनों दुकानें खुली थी। ऐसे ही भाजपा कार्यालय के पास भाजपा नेत्री परिवार की मेडिकल दुकान भी खुली थी। इसी तरह शहर की अनाज मंडी में दो भाजपा नेता की आढ़त की दुकानें खुली थी। वहीं अंबाला-हिसार रोड एक इनेलो नेता की हार्डवेयर आइटमों की दुकान भी खुली रही। शहर के बाजार बस्ती में स्थित हजकां नेता का का ढाबा भी बंद के दौरान खुला रहा। पुराना सिविल अस्पताल चौक पर भी हजकां नेता की आटोमोबाइल की दुकान खुली रही।

रिक्शे पर आवाज बुंलद कर रहा रामू
इस बंद के दौरान आकर्षण का केंद्र बना रामू रिक्शेवाला। ये रिक्शे वाला पिछले एक माह से अपने रिक्शे के आगे और पीछे भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी मुक्त होने के नारे लिखकर बाजारों में घूम रहा है। बंद के दौरान भी ये रिक्शे वाला सभी बाजारों व यहां तक की कालोनियों में भी घूमता रहा। रामू रिक्शेवाले का कहना है कि वे मरने से पहले देश को भष्ट्राचार, महंगाई और बेरोजगारी से मुक्त देखना चाहता है। इसलिए वह इस तरह के बोर्ड लगाकर ही अपना कामधंधा भी करता है।
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