विश्व समुदाय ‘अंग्रेजी नव वर्ष’ 2012 का स्वागत कर रहा है, जबकि वैदिक गणना से ‘विश्वावसु’ नामक नव संवत्सर 23 मार्च 2012 के दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होगा। चूंकि वर्ष का प्रारंभ पौष शुक्ल अष्टमी रविवार से उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में हो रहा है, इसलिए यह काल सभ्यता को उन्नति की ओर अग्रसर करेगा और मानसिक रूप से जातकों को सक्षम बनाएगा।
तकनीकी, आर्थिक, औद्योगिक और विज्ञान क्षेत्र में उत्तरोत्तर प्रगति कराएगा। यह वर्ष शुक्र के प्रभुत्व से महिलाओं का वर्ष होगा। वे हर क्षेत्र में आगे नजर आएंगी। बेमेल विवाहों, प्रेम विवाहों में बढ़ोतरी होगी। अनेक देशों की सत्ता स्त्रियों के हाथ में होगी, उन्नति के साधन बढ़ेंगे। अनेक जनोपयोगी कानून बनेंगे।
भारत के लिए श्रेष्ठ काल होगा। तकनीक, सुरक्षा और औद्योगिक विकास के लिए अनेक देशों से नए अनुबंध होंगे। इस दौरान भारत का प्रभाव बढ़ेगा। इस काल में बुद्धिजीवियों को सम्मान मिलेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, तकनीक का विस्तार होगा। राज्यों में उद्योग व्यापार में उन्नति होगी। अनेक देशों में सत्तापलट के लक्षण हैं, किसी राष्ट्रप्रमुख या विशिष्ट व्यक्ति की हत्या भी हो सकती है। संक्रामक रोग और महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ेंगे। महंगाई, बेरोजगारी बढ़ेगी, गठबंधन सरकारें शासन करेंगी। अग्नि और आकाशीय बिजली गिरने और बादल फटने से भी जन धन हानि की आशंका है।
इस वर्ष के राजा शुक्र होने से देश में फलों व अनाज की उपज में वृद्धि होगी, शुक्र के ही मंत्री होने और बृहस्पति के वर्षापति होने से नदियों का जल बढ़ेगा, बाढ़ से संक्रामक रोगों में बढ़ोतरी होगी। बृहस्पति के ही सेनापति होने से सरकार को जन कल्याण के कानून बनाने पड़ेंगे। चंद्रमा के उपजपति होने से दुधारु पशु बढ़ेंगे। धर्म और संस्कारों का महत्व बढ़ेगा।
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