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बोल बच्चन

Radha Krishna

Radha Krishna

Updated Thu, 09 Aug 2012 12:28 PM IST
movie review of bol bachchan
हैलो फ्रेंड्स! मैंने 'बोल बच्चन' से पहले रोहित शेट्टी की 'गोलमाल' सीरिज देखी थी। मुझे यकीन था कि ये फिल्म भी मुझे खूब हँसाएगी। अब फिल्म देखने बैठे तो मन को समझाया कि अभी तो यह शुरू ही हुई है थोड़ी देर में मजा आएगा। फिल्म जिस स्पीड से आगे बढ़ रही थी, उससे कोई नहीं कह सकता था कि आप रोहित शेट्टी की कॉमेडी फिल्म देखने आए हैं। बीच-बीच में हंसी के फुग्गे निकले लेकिन सिर्फ कुछ सेकेंड्स के लिए। फिल्म में असली मजा तब आने लगा जब एंट्री हुई मां की यानी अर्चना पूरनसिंह की।
तब तक मैं समझ चुकी थी कि फिल्म 1979 में रिलीज हुई अमोल पालेकर की 'गोलमाल' और बॉबी देओल की 2002 में रिलीज हुई 'चोर मचाए शोर' की थीम पर ही आधारित है। बेशक फिल्म की स्टार कास्ट और सिचुएशन बदल दी गई लेकिन फिल्म के मुख्य पात्र इन्हीं दोनों फिल्मों से मिलते जुलते थे। इतना ही नहीं अर्चना पूरनसिंह का रोल आपको 'आंटी नंबर 1' की गोविंदा की याद दिलाएगा। कहने का मतलब ये है फिल्म पूरी तरह से अमोल पालेकर की 'गोलमाल' का रीमेक है लेकिन सिचुएशंस बदलने के लिए कई फिल्मों की खिचड़ी भी पकाई गई है।

कहानी
पृथ्वीराज रघुवंशी (अजय देवगन) राजस्थान के रनकपुर इलाके में बादशाह हैं और उन्हें झूठ से सख्त नफरत है। अब्बास अली (अभिषेक बच्चन) अपनी बहन सानिया (असिन) के साथ तंगहाली के कारण इसी जगह आकर बस जाते हैं। अब्बास जाकर पृथ्वी के यहां नाम बदलकर नौकरी करने लगता है। नाम भी उसने रखा अभिषेक बच्चन। इस नाम के लिए एक कहानी गढ़नी पड़ती है। यही से शुरू होता है अब्बास के झूठ को छिपाने का सिलसिला। इसी दौरान अब्बास को पृथ्वीराज की बहन राधिका (प्राची देसाई) से इश्क़ हो जाता है। इसी प्यार और झूठ के दौरान पैदा होती हैं कुछ हास्यास्पद स्थितियां।

अभिनय
अभिषेक बच्चन का बिना मूछों वाला किरदार अच्छा है और अभिषेक ने उसे सही तरीके से प्रस्तुत भी किया है। वहीं अजय देवगन कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाए। असिन और प्राची के बारे में कुछ ना ही कहा जाए तो अच्छा है। फिल्म में अर्चना पूरन सिंह बहुत फूहड़ लगी हैं। जबकि असरानी का काम ठीकठाक था। कृष्णा अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे हैं।

क्यों है खास
या तो आप क्लासिक हास्य फिल्म 'गोलमाल' के फैन रहे हों या अभिषेक बच्चन के। बच्‍चन नाम को कैसे भुनाया गया है ये आप फिल्म में हर पल देख सकते हैं। अमोल पालेकर ‌की फिल्म 'गोलमाल' की झलकियों को बार-बार याद किया गया है। कभी अफलातून नाटक कंपनी के जरिए तो कभी टीवी के जरिए। अजय देवगन अपने रोल में फिट नहीं है लेकिन उनके डायलॉग- खासकर उनकी इंग्लिश दर्शकों को हंसाने में सफल रही है।

क्या है बकवास
बीच-बीच में एक्‍शन सीन बहुत लंबे हो गए खासतौर पर जब पृथ्वीराज अपनी बहन राधिका को अब्बास अली के साथ छुड़ाने जाता है। अर्चना पूरनसिंह की एंट्री के बाद फिल्म के जान आ जाती है वो भी कुछ देर के लिए। कहीं-कहीं एकाध बार डबल मीनिंग शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया है खासतौर पर जब अर्चना पूरनसिंह की एंट्री होती है।

फिल्म में प्राची देसाई के करने के लिए कुछ खास नहीं था जबकि 'चोर मचाए शोर' फिल्म के ऐसे ही रोल में शिल्पा शेट्टी ने कमाल कर दिया था। फिल्म गुदगुदाने वाले संवाद न के बराबर हैं। रोहित शेट्टी की गोलमाल सीरिज में जो लोट-पोट होने वाली कॉमेडी होती है वो 'बोल बच्चन' में कहीं भी नहीं है, और हां, रोहित शेट्टी गोलमाल सीरिज का मोह नहीं छोड़ पाए तभी तो यहां भी मिनी बस और कारें हवा में उड़ती नजर आती हैं।

निर्देशन
इसके बारे में ज्यादा कुछ कहने को नहीं है। रोहित शेट्टी की पिछली फिल्में सिंघम (2011), गोलमाल 3 (2010), ऑल द बेस्ट (2009), गोलमाल रिटर्न्स (2008) और गोलमाल (2006) अच्छी रही हैं, लेकिन इस फिल्म में कसी हुई स्क्रिप्ट ना होने से सब कुछ फीका सा लग रहा था।

संगीत
संगीत साधारण है, बस टाइटल सान्ग अमिताभ बच्चन की वजह से हिट है।

एक्स्ट्रा शॉट्स : अजय देवगन के डायलॉग
"तुझे पाकर मेरी छाती और भी चौड़ी हो गई- माई चेस्ट हैज बिकम ब्लाउज"
"मैं तुझे छठी का दूध याद दिला दूंगा- आई विल मेक यू रिमेंबर मिल्क नंबर 6"
"साले को कुत्ते की मौत मारूंगा- ब्रदर इन लॉ विल डाइ टॉमीज डैथ"
"जब बड़े बात कर रहे हो तो बीच में टोका नहीं करते- वैन एल्डर्स गेट कोजी, यंगर्स डोंट पुट देअर नोजी"
"तुम्हारे कान बज रहे हैं- यूअर इयरड्रम्स आर प्लेइंग ड्रम्स"

'बोल बच्चन' के सितारे
'बोल बच्चन' से रोहित शेट्टी के कैरियर में एक और सफल फिल्म का नाम जुड़ेगा। फिल्म को सफल बनाने में रोहित शेट्टी के सितारे पूरा साथ दे रहे हैं। रोहित इन दिनों केतु में केतु की दशा के प्रभाव में हैं। यह इन्हें अचानक सफलता दिलाएगा और इनका नाम और यश बढ़ेगा। फिल्म का भाग्यांक सात है और सात अंक का स्वामी शुक्र फिल्मों का कारक माना जाता है। फिल्म छह तारीख को पर्दे पर आ रही है इस अंक का स्वामी व्यवसाय का कारक ग्रह बुध है। इस दृष्टि से देखे तो शुक्र, बुध और केतु तीनों ही बोल बच्चन को सफल बनाने में अपना पूरा योगदान दे रहे हैं। अजय के सितारे इन दिनों सही नहीं चल रहे हैं इन्हें कोई बड़ा फायदा नहीं होगा। अभिषेक बच्चन इस मौके का लाभ उठा सकेंगे।

बैनर: अजय देवगन फिल्म्स, श्री अष्टविनायक सिनेविजन लिमिटेड
निर्माता: ढिलिन मेहता, अजय देवगन
निर्देशक: रोहित शेट्टी
संगीत: हिमेश रेशमिया, अजय-अतुल
कलाकार: अजय देवगन, अभिषेक बच्चन, असिन, प्राची देसाई, कृष्णा अभिषेक, अर्चना पूरनसिंह, असरानी, नीरज वोरा, अमिताभ बच्चन(आइटम नंबर)
रेटिंग्‍ा: **



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