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साइलेंट लव स्टोरी है 'बर्फी'

अनुराधा गोयल

Updated Wed, 26 Sep 2012 12:42 PM IST
movie review barfi
हैलो फ्रैंड्स! किसी ने सच ही कहा है, हंसाना बहुत मुश्किल काम होता है। जब बात हो बिना बोले लोगों को खुश रखने और उनके मन को सुकून देने की, तब ये बेहद मुश्किल काम हो जाता है। आज हम आपको ऐसी ही फिल्म के बारे में बताने जा रहे हैं जो बिना बोले अपनी भावनाओं को बयान कर रही है और आपको हंसाने में कामयाब भी है।
जी हाँ, हम बात करने जा रहे हैं, पिछले काफी समय से चर्चा में रही फिल्म 'बर्फी' की। किसी कंट्रोवर्सी के कारण नहीं बल्कि इसके साइलेंट होने के कारण और रणबीर-प्रियंका के गेटअप के कारण। चलिए आपको बताते हैं ये 'बर्फी' आपके जीवन में कितनी मिठास भरेगी।

कहानी
'बर्फी' में प्यार को कई एंगल से दिखाया गया है। पूरी फिल्म शुरू से ही फ्लैशबैक में चलती है। फिल्म में श्रुति (इलियाना) का मर्फी यानी बर्फी (रणबीर कपूर) के प्रति प्रेम और बर्फी का झिलमिल चैटर्जी (प्रियंका चोपड़ा) के प्रति प्रेम दिखाते हुए प्रेम के अलग-अलग स्वरूप को दिखाया है जो कि अलग तरीके का त्रिकोणीय है।

गूंगा-बहरा बर्फी दार्जलिंग में पहली बार श्रुति को उसकी सहेली के साथ देखता है तो उसे पहली ही नजर में प्यार कर बैठता है। वह इशारों के जरिए अपने प्यार को बयां करता है लेकिन उसे पता चलता है कि श्रुति ‌की सगाई हो गई है। वो फिर भी श्रुति को प्यार करना नहीं छोड़ता। श्रुति बर्फी को बिना कहें दार्जलिंग छोड़ कोलकाता चली जाती है।

इसी बीच मर्फी की बचपन की दोस्त जो कि ऑटिज्म पीड़ित है झिलमिल उसकी लाइफ में आती है तो उसकी लाइफ बदल जाती है। इसी बीच पूरी फिल्म फ्लैशबैक के साथ-साथ रीयल लाइफ में भी आगे बढ़ती रहती है। लेकिन ये देखने वाली बात है कि झिलमिल का क्या हुआ, क्या श्रुति बर्फी के पास वापिस आई, बर्फी के प्यार का क्या हुआ? क्या झिलमिल और बर्फी एक हो गए?

ये सब दिखाने के लिए फिल्म में कई मोड़ आए। जिसे आप फिल्म में ही देखेंगे तो बेहतर होगा।

अभिनय
रणबीर कपूर एक वर्सेटाइल एक्टर हैं, इस बार भी उन्होंने अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। रणबीर एक पल के लिए भी आपकी नजरों से फिल्म में ओझल होंगे तो आपको अजीब लगेगा, क्योंकि रणबीर फिल्म की जान और जोश हैं।

प्रियंका चोपड़ा मासूमियत भरी एक बीमार लड़की का किरदार निभाने में सफल हुई हैं। लेकिन कहीं-कहीं प्रियंका नर्वस लगी तो कहीं बहुत कॉन्शियस भी लगती है। वैसे प्रियंका को देखकर एक मासूस सी बच्ची की फीलिंग आती है और उसे प्यार करने का दिल करता है। वहीं हिंदी फिल्मों से डेब्यू कर रही इलियाना ने दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। सौरभ शुक्ला भी मनोरंजन करने में कामयाब होंगे।

निर्देशन
निर्देशक अनुराग बसु रणबीर और प्रियंका की कैमिस्ट्री को बखूबी दिखा पाए। 70 के दशक को भी अनुराग ने बखूबी दिखाया है। फिल्म की कहानी को कई तरह से दिखाया है जो कि फिल्म की कमजोरी कहा जा सकता है। फिल्म में आने वाले बार-बार फ्लैशबैक ना सिर्फ कन्फ्यूज करते हैं बल्कि इरिटेट भी करने लगते हैं।

कहानी में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव और एकदम स्लो से फास्ट, फास्ट से स्लो के ट्रैक में आप फिल्म से खुद को जुड़ा हुआ नहीं पाएंगे। जहां कहानी थोड़ी स्टैबलिश होने लगती है, वहीं एकदम खत्म होकर कोई दूसरा ट्रैक पकड़ लेती हैं। इसीलिए कहानी में बोरियत भी आने लगती है।

कहानी के इतने झोल को अनुराग बसु सटीक तरीके से संभाल पाने में सफल नहीं हुए। फिल्म में आपको कई बार जिज्ञासा तो होती है लेकिन कुछ ही सेकेंड में आपको समझ आ जाता है कि सच्चाई क्या है। यह फिल्म का कमजोर पार्ट है। दर्शकों में जिज्ञासा जगाने के चक्कर में अनुराग की फिल्म में ही कई झोल आ गए।

संगीत
प्रीतम का संगीत और बैकग्राउंड संगीत दोनों ही काफी प्रभावित करते हैं। फिल्म का टाइटल सॉन्‍ग 'बर्फी', 'क्यों' और 'फिर ले आया दिल' गाने फिल्म के बीच फिट बैठते हैं।

क्यों देखें
एक सीधी-सादी फिल्म जो ना तो बहुत रोमांचित करेगी ना ही बहुत मायूस। ऐसी फिल्म जिसमें भावनाओं को बहुत महत्व दिया गया है। जिसमें एक्‍शन नहीं है लेकिन बिना बोले आपके चे‌हरे पर मुस्कान ले आएगी। एक ऐसी फिल्म जो कि आपके दिल को कई बार छूएगी और आप 'हाउ स्वीट' कहे बिना नहीं रह पाएंगे।

अगर इस जॉनर की फिल्में आपको पसंद हैं तो फिल्म आपके लिए है। रणबीर का दमदार अभिनय देखने के लिए फिल्म देखी जा सकती है। दार्जलिंग की खूबसूरत वादियों को और कोलकाता की तंग गलियों को देखने के लिए फिल्म देखी जा सकती है।

क्यों न देखें
रणबीर कपूर कई जगह चार्ली चैपलिन को कॉपी करते नजर आएं जो कि ओवर लग रहा था, वहीं फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी है फिल्म के संवाद। फिल्म में संवाद ना के बराबर है, जिससे ये फिल्म 'पुष्पक' की याद तो दिलाती है लेकिन 'पुष्पक' के सामने फीकी सी दिखाई पड़ती है।

फिल्म ना तो पूरी तरह से मूक बन पाई ना ही बोलती फिल्म। जो कि फिल्म की बड़ी खामी है। फिल्म में आपको कई जगह दोहराव दिखाई पड़ेगा, खासकर रणबीर और प्रियंका के सींस में। बेहद रोमांचित करने वाली फिल्में, एक्‍शन और हॉट सींस से भरपूर फिल्में या मसाला फिल्में पसंद करने वालों के लिए ये लिए नहीं है।

फिल्म से जुड़ी खास बातें
फिल्म में बीमारियों को या शारीरिक अक्षमताओं को केंद्र में रखा गया है लेकिन किसी भी पात्र का मजाक नहीं उड़ाया गया। हां, इस फिल्म में इस बात को खासतौर पर केंद्र में रखा गया है कि शारीरिक रूप से अक्षम लोग भी आम लोगों की तरह अपना जीवन आराम से बिता सकते हैं ना कि दुखी रहकर। इनके जीवन में भी खुशियां आ सकती है।

इस फिल्म में 70 के दशक को दिखाया गया है, 70 के दशक को दिखाने का मुख्य कारण था हकीकत और कल्पना के बीच कहानी को असल दुनिया में स्थापित करना। ऐसी दुनिया जहाँ रणबीर और प्रियंका चोपड़ा के किरदार को आसानी से फिट किया जा सकें। इस दशक में फिल्म को दिखाने का एक मुख्य कारण 70 के दशक के लोगों का सादापन दिखना, उनका अपनी संस्कृति में रचे-बसे रहना, उस जमाने की प्रेम कहानी को डेवलप करना भी इसका मकसद था।

इस फिल्म की विशेषता है कि इसमें कम संवाद हैं। साथ ही इस फिल्म में रणबीर और प्रियंका के कुछ सुपर स्टंट्स भी नजर आएंगे। हालांकि रणबीर कपूर ने प्रमोशन के दौरान इस फिल्म को प्रेम कहानी का नाम भी दिया है।
अगर यूं कहें कि रणबीर और प्रियंका आनेवाली फिल्म 'बर्फी' उनकी अब तक की फिल्मों से ज़रा होगी तो ये गलत ना होगा।

फिल्‍म के सितारे
'बर्फी' फिल्म के सितारे कह रहे हैं यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर मिठास नहीं घोल पाएगी। अनुराग बसु की यह फिल्म एक एक्सपेरिमेंटल फिल्म के रूप में इतिहास में याद रखी जाएगी। यह फिल्म ऐसे समय में रिलीज हुई जब मलमास चल रहा है। साथ ही फिल्म रिलीज के दिन कोई अच्छा योग भी नहीं बन रहा है जिससे भय है कि फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरेगी।

जहां तक फिल्म के कलाकारों की बात है तो इससे पहले 'अंजाना अंजानी' फिल्म में प्रियंका चोपड़ा और रणवीर कपूर ने काम किया था। काम अच्छा होने के बावजूद भी इनकी जोड़ी कोई करामत नहीं दिखा पायी। 'बर्फी' के साथ ही भी यही होने वाला है। रणवीर कपूर इन दिनों राहु में चन्द्र की दशा में चल रहे हैं। जो इनके लिए लकी नहीं है। यही कारण है कि 2012 में रणवीर कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं कर पा रहे हैं। प्रियंका के लिए कुल मिलाकर यह साल सामान्य रहेगा।
(राकेश झा)
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