आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

फिल्म से ज्यादा रोचक है 'द लास्ट एक्ट' के बनने की कहानी

रोहित मिश्र

Updated Sat, 15 Dec 2012 03:13 PM IST
making of film ' the last act' is intresting
पहले बात इस फिल्म के बनने के बारे में। फिल्म 'द लास्ट एक्ट' बनाने का तरीका फिल्म से भी ज्यादा दिलचस्प है। यह 12 अलग-अलग निर्देशकों की 12 कहानियों की एक फिल्म है। यह सभी निर्देशक नए हैं। यह इनकी पहली फिल्म है। इन निर्देशकों को अनुराग कश्यप और सुधीर मिश्र ने शॉर्टलिस्ट किया है। इन सभी निर्देशकों ने मिलकर इस फिल्म को बनाया है।
दो घंटे से कुछ अधिक समय की यह फिल्म इस बात का एहसास हर समय कराती रहती है कि यह आम हिंदी फिल्म नहीं है। 'द लास्ट एक्ट' दरअसल कहानी से इतर मनोविज्ञान को परखने का प्रयास करती है। कहीं-कहीं यह प्रयास समझ से परे हैं तो कहीं-कहीं यह प्रयास फिल्म को लेकर हमारी एप्रोच के अलावा हमारा आईक्यू भी बढ़ाता हैं। इंटलैक्चुअल फिल्में भारत में नहीं बनती हैं या नहीं बनायी जा सकती हैं यह फिल्म उस धारणा को थोड़ा बहुत ही सही पर खारिज करने का प्रयास करती है।

फिल्म के साथ कुछ वैसी ही दिक्कत है जैसी नए-नए बने साहित्यकारों के साथ होती है। वह यह सुनकर खुश होते हैं कि उन्होंने इतनी जटिल रचना लिखी कि वह लोगों को समझ ही नहीं आई। खुश होने की कुछ यही मानसिकता इन 12 निर्देशकों में दिखी, जो कई बार फिल्म को लोगों से काटकर अलग कर देती है।

कहानी
 फिल्म की कहानी एक मर्डर से शुरू होती है। मुंबई पुलिस को आधी रात को एक बुरी तरह से क्षत-विक्षत लाश मिलती है। लाश के साथ दिलचस्प बात यह है कि उसके बाद 12 ऐसे इवडेंस मिलते हैँ जिनका कंसर्न अलग-अलग शहरों में होता है। यह शहर देश के अलग-अलग 12 राज्यों में है। अब यहीं से हर शहर की कहानी शुरू हो जाती है।

 दिल्ली, लखनऊ, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरू, ग्वालियर, गाजियाबाद, कल्याण, पुणे, नागपुर और हिसार शहरों में लाश से मिले उन प्रमाणों की कहानी है। हर शहर की कहानी को एक अलग निर्देशक ने शूट किया है। यह बिल्कुल फिल्म न लगे इसलिए कल्याण के सारे पात्र एक ठेठ मराठी बोलते हैं, बेंगलुरू के पात्र तेलुगू ‌बोलते हैं और कोलकाता के बंगाली। एक भी शब्द हिंदी का प्रयोग नहीं किया जाता है।

इन शहरों की लोकल पुलिस मुंबई से मिले उस प्रमाण के आधार पर छानबीन करती है। रोचक बात यह है कि हर इवीडेंस, दूसरे इवीडेंस से बिल्कुल अलग है। क्लू को खोजती हुई इन कहानियों में उपकथाएं भी हैं। कुछ रोचक तो कुछ बेदम। फिल्म के क्लाइमेक्स कुछ बौद्घिक किस्म का बना दिया गया है। वह लाश एक भिखारी की निकलती है और उस लाश के यह सारे 12 क्लू जानबूझ कर रखे गए होते हैं।

अभिनय
फिल्म में सौरभ शुक्‍ला के अलावा सिर्फ एक दो कलाकार ही जाने-पहचाने हैं। बाकी के सारे कलाकार एकदम नए और पहली बार देखे हुए। इन कलाकारों से बस इतनी अपेक्षा थी कि वह जिस किरदार में वह बस वैसे दिख जाएं। लखनऊ के अमीनाबाद में घड़ी बेचने वाला दुकानदार, दुकानदार ही लगे और हॉस्टल में पढ़ने वाला छात्र कॉलेज गोइंग स्टूडेंट्स ही लगे। इस मायने में सभी किरदारों ने ठीक-ठाक अभिनय किया है। फिल्म में 100 से अधिक कलाकार हैं ऐसा में किसी एक के बारे में बात करना, बाकी के साथ गलत होगा।

निर्देशन
कहानी, पटकथा और अभिनय से इतर यह फिल्म दरअसल निर्देशकों की फिल्म ‌थी। हर निर्देशक ने अपने तरह का सिनेमा बनाने का प्रयास किया है। कोई रामगोपाल वर्मा से प्रभावित होकर कैमरे से क्रिए‌टीविटी करता दिखा है तो कोई कथ्य को बहुत जटिल बनाकर अपनी पहचान बनाता हुआ। फिल्म के ओवरऑल निर्देशक अनुराग कश्यप और सुधीर मिश्रा हैं इसलिए फिल्म की शुरुआत अच्छी होने के सा‌थ इन कहानियों को लिंक भी बेहतर तरीके से किया गया है।

यह 12 अलग-अलग निर्देशक अपने 'अलगपन' के प्रति इतने गंभीर दिखे कि उन्होंने कहीं-कहीं फिल्म मेकिंग की स्वाभाविक जरूरतों को यह सोचकर नजरंदाज कर दिया कि हम कुछ अलग कर रहे हैं। यहीं पर उनकी कमजोरी और सीमाएं खुलती हैं। दर्शक फिल्म के साथ तभी अपने को जोड़ पाते हैं जब फिल्म उनके साथ बात करती हुई चलती है। ऐसा फिल्म के साथ कई जगह नहीं हुआ है। दर्शकों को लगता है कि वह किसी अंतरराष्ट्रीय समस्या पर एक स्पीज सुन रहे हैं जिसका ‌उनके जीवन से कोई वास्ता नहीं। बावजूद इसके कुछ इन निर्देशकों ने कुछ ऐसी कहानियां भी गढ़ी हैं जिन्हें देखकर लगता हैं कि भारत में फिल्मों की इतनी लंबी रेंज कभी नहीं रही।

क्यों देखें
यदि आपको इस बात में दिलचस्पी हो कि 'दबंग' और 'खिलाड़ी 786' जैसी फिल्मों के अलावा और भी तरीके की फिल्में भारत में बन सकती हैं।

क्यों न देखें
यदि मनोरंजन करना चाहते हों। फिल्म आपका मनोरंजन नहीं करेगी। आप चार लोगों से फिल्म की बुराई करेंगे, बेहतर है कि आप फिल्म देखने न जाएं।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Amarujala Hindi News APP
Get all Entertainment news in Hindi related to bollywood, television, hollywood, movie reviews, etc. Stay updated with us for all breaking news from Entertainment and more news in Hindi.

  • कैसा लगा
Comments

स्पॉटलाइट

कोहली और KRK पीते हैं ऐसा खास पानी, एक बॉटल की कीमत 65 लाख रुपये

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

कहीं गलत तरह से शैम्पू करने से तो नहीं झड़ रहे आपके बाल, ये है सही तरीका

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

मसाज करवाकर हल्का महसूस कर रहा था शख्स, घर पहुंचते हो गया पैरालिसिस

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

यहां खुद कार चलाकर ऑपरेशन थियेटर में जाते हैं बच्चे

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

इस नवरात्रि इन व्यंजनों को जरूर करें TASTE, व्रत रखने वालों की होगी मौज

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

Most Read

Movie Review: अगर हाफ में मिल जाए टिकट तो देख आइए 'हाफ गर्लफ्रेंड'

film review of half girlfriend starting arjun kapoor and shraddha kapoor
  • शुक्रवार, 19 मई 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!