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कयास न लगाइए, आपको चौंका देगी 'तलाश'-आमिर खान

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क

Updated Wed, 28 Nov 2012 05:52 PM IST
don't assume for 'talaash' you will surprise- aamir khan
आमिर परदे पर साल में एक ही बार नजर आते हैं पर उनकी फिल्‍में ऐसी होती हैं कि दर्शक पूरे साल उस फिल्म के लिए इंतजार करते हैं। लगभग एक साल के बाद आमिर की फिल्म 'तलाश' रिलीज हो रही है। एक संस्पेंस फिल्म तलाश को लेकर बॉलीवुड और आम दर्शक इस बात का कयास लगा रहे हैं कि यह फिल्‍म कैसी होगी। लेकिन आमिर दावा करते हैं कि फिल्म दर्शकों की सोच से कहीं अलग है। पेश है आमिर से हुई बातचीत के मुख्य अंश,
'तलाश' को लेकर काफी उत्सुकता है। लोगों ने कई तरह के कयास लगाने शुरू कर दिये हैं। अलग-अलग तरह की बातें हो रहीं हैं, फिल्म के बारे में कुछ बताएं?
फिलहाल सिर्फ इतना कहूंगा कि यह एक सस्पेंस थ्रीलर फिल्म है और लोगों ने जितने भी अनुमान लगाये हैं। सारे गलत साबित होनेवाले हैं। बल्कि हमने तो इसके लिए एक उपाय भी सोच लिया है। फिल्म की रिलीज के साथ ही हम कुछ अफवाहें उड़ा देंगे। जिससे लोग यह अनुमान ही नहीं लगा पायेंगे कि कौन सी कहानी सच है। इससे यह होगा कि दर्शकों में दिलचस्पी बनी रहेगी।

'तलाश' चुनने की कोई खास वजह?
मैं साल में एक ही फिल्म करता हूं तो जाहिर है काफी सावधानी से विषय का चुनाव करता हूं। 'तलाश' न सिर्फ एक एंटरटेनिंग फिल्म है, बल्कि इनवॉल्विंग भी है। साथ में इमोशनल भी। मुझे इमोशनल टच किसी भी कहानी का काफी आकर्षित करता है। आप देखेंगे मेरी फिल्मों में इमोशनल टच होता ही है।

रीमा ने कहानी सुनाई तो मैं समझ गया था कि कहानी में कुछ तो अलग बात है। सस्पेंस थ्रिलर है। लेकिन अलग तरह का है। फैमिली ड्रामा भी है इसमें। क्राइम भी है। और साथ ही एक रहस्य भी है। सो, मेरे दिल ने कहा हां, कहने को तो कह दिया मैंने। फिल्म में आप देखेंगे कि इस कहानी के पात्रों में कितने लेयर्स हैं। वे सभी आपको चौंकायेंगे।

किरदार के बारे में बतायें?
फिलहाल किरदार के बारे में सबकुछ नहीं बताऊंगा। सिर्फ इतना बताऊंगा कि पुलिस इंसेपक्टर की भूमिका में हूं। 'तलाश' की वजह से ही मैंने ऐसी कई नयी चीजें सीखी। जो मैंने कभी नहीं सीखी थी। स्वीमिंग सीखी है मैंने। जिससे कि मैं पहले कितना डरता था।

मार्केटिंग व प्रमोशन के आधार पर फिल्म को कामयाब बनाने में तो आप गुरु माने जाते हैं। आप इसे अपनी यूएसपी मानते हैं क्या?
नहीं, आप यह नहीं कह सकते कि सिर्फ प्रमोशन के बलबूते पर मेरी फिल्में कामयाब होती है। मेरी कहानी हमेशा और कलाकारों से अलग होती है। मैं कभी एक सी फिल्में नहीं करता। एक सी कहानियां मुझे कभी एक्साइट ही नहीं करती। एक जमाना था। जब मैंने कुछ वैसी फिल्में कीं। लगातार फिल्में की। अब लेकिन जबकि एक फिल्म करता हूं तो बहुत सावधानी से चुनाव करता हूं विषय का और फिर लग जाता हूं पूरी मेहनत से। पूरा वक्त देता हूं।

फिल्म में मेरी मेहनत दिखती है इसलिए फिल्म कामयाब होती है। हां, यह जरूर है कि मैं इस बात को स्वीकारता हूं कि फिल्म बना रहा हूं तो लोगों तक तो पहुंचनी ही चाहिए। यही वजह है कि मैं जब भी प्रोमोशन करता हूं तो फिल्म की थीम से मेल खाता हुआ करता हूं। जैसा कि मैंने 'तलाश' के प्रोमोशन के लिए रात का समय चुना है। गूगल साइट को चुना है। वगैरह-वगैरह। मैं मानता हूं कि लोगों तक जब तक बात नहीं पहुंचेगी, वे नहीं आयेंगे सिनेमा देखने।

पिछले 20 सालों से खान की तिकड़ी का ही हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में दबदबा है, क्या वजह है इसकी?
लोग हमें पसंद कर रहे हैं। आज भी इतने सालों के बाद भी तो इस बात का कोई लॉजिक नहीं हो सकता। चूंकि प्यार का कोई लॉजिक नहीं है, और दर्शकों का यह प्यार ही है। दूसरों की बात मैं नहीं जानता, लेकिन मेरा अपना मानना है कि मैंने हमेशा अपने दर्शकों को अलग दिया है। मेरी कोई भी फिल्म अगर एक जैसी होती और मैं साल में एक बार दर्शक के सामने आता हूं तो लोग मुझे भूल जाते। कहते क्या कचड़ा कर रहा है। लेकिन मुझे खुशी होती है कि उन्हें उत्सुकता रहती है कि मैं क्या नया करने जा रहा हूं या उम्मीद रहती है कि आमिर कुछ अलग ही करेंगे।

हां, जैसा आपने 'डेली बेली' जैसी फिल्में बना कर सबको चौंका दिया था।
जी हां, बिल्कुल वह भी अनोखा ही प्रयोग था। मुझे इसके लिए इंडस्ट्री से कितनी गालियां पड़ी। लेकिन मैं खुश हूं कि मैंने कुछ नया किया। अलग विषय था। ट्रीटमेंट अलग था। आप देखें युवाओं ने कैसे पसंद भी किया उसको।

लेकिन आपकी फिल्मों से दर्शकों को उम्मीद होती है कि उसमें कुछ न कुछ मेसेज भी होगा?
देखिए मैं खुद को एंटरटेनर मानता हूं। मैंने कभी खुद को बुद्धिजीवियों के वर्ग में शामिल नहीं किया। लेकिन शायद लोग मुझे मानते हैं क्योंकि मैंने ज्यादातर फिल्में संवेदनशील विषयों की है। तो लोग मानने लगे, लेकिन यहां भी यही कहना चाहूंगा कि मैंने कभी एक स्ट्रीम को लेकर आगे बढ़ने के बारे में कभी सोचा ही नहीं है। वैसे मैंने 'दिल चाहता है' जैसी कूल फिल्में भी की हैं। तो मैं मानता हूं कि मैंने हर तरह के किरदार निभाये हैं।

आपको लेकर हमेशा यह खबरें आती हैं कि आपकी फिल्म में आप ही होते हैं। आपके को-स्टार्स के लिए बहुत मौके नहीं रहते?
(हंसते हुए) मतलब आप यह कहना चाहते हैं कि करीना व रानी का किरदार भी मैं ही एक्ट करता हूं फिल्म में। अरे, यह तो बहुत स्वभाविक सी बात है कि निर्देशक ने जैसी कहानी लिखी है। जैसे उसके किरदार हैं। कलाकार को वही निभाना है। मेरे हिस्से में अधिक दृश्य लिखे जाते हैं तो यह तो प्रश्न आपको निर्देशक से करना चाहिए कि वे क्यूं लिखते हैं। वैसे आप मेरे सारे को-स्टार्स से बात कर सकते हैं कि मैं उन्हें सेट पर कितना परेशान करता हूं या नहीं। या उन्हें कितने मौके देता हूं या नहीं। सीन रखना या हटाना मेरे हाथ में तो नहीं होता।

लेकिन निर्देशकों के काम में भी आपका काफी दखल होता है। ऐसी खबरें आती रहती है। रीमा से भी काफी तनाव रहा आपका फिल्म के दौरान
अगर लोगों को ऐसा लगता है तो मैं क्या कर सकता हूं। लेकिन मैं बस यह कहूंगा कि मैं किसी फिल्म में उस निर्देशक के विजन को लेकर चलता हूं। अगर मैं हर फिल्म में दखल देता और निर्देशक के काम में टांग अड़ाता तो आपको सारी फिल्में एक सी लगतीं। मैं आपको हमेशा अलग नहीं दिखता। जहां तक बात है रीमा की तो वे लेखक हैं और लेखक होने की वजह से उनकी फिल्म तो टेबल पर ही बन जाती है।

वह तो जानती हैं कि उन्हें क्या चाहिए क्या नहीं चाहिए और इतने सालों से मैं जितने भी निर्देशकों के साथ काम कर रहा हूं सभी अपनी शर्तों पर फिल्म बनानेवालों में से हैं। आपको लगता है कि मैं आशुतोष से कहता कि 'लगान' में ये नहीं ये होना चाहिए और वह मान जाता। या राकेश मेहरा को मैं कहता कि भई मेरे किरदार को ऐसा दिखाओ और वे अपना विजन छोड़ कर कहते कि अरे चलो आमिर के विजन से फिल्म बनाते हैं। ऐसा कभी नहीं होता। रीमा बहुत टैलेंटेड हैं और उन्हें किसी की नसीहत की जरूरत नहीं।

आपकी फिल्में आने में इतना वक्त लग जाता है?
मैं देर करता नहीं देर हो जाती है। दरअसल, मुझे काम को बारीकी से करना पसंद है और संयोग से मुझे मेरे निर्देशक भी वैसे ही मिल जाते हैं। जो मेरे जैसे ही हैं। मैं चाहता हूं कि फिल्म की रिलीज के बाद हमें ऐसा न लगे कि अरे कोई कमी छूट गयी। अगर कमी है तो उसी वक्त उसे दूर कर दो। सो, मैं वक्त लगा कर जी लगा कर काम करने में विश्वास करता हूं।
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