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खरी-खोटी सुनी, मुस्कराकर किया अनसुना

New Delhi

Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
नई दिल्ली। इंडिया गेट पर आंसू गैस, पानी की बौछार और लाठियों का जोर दिखा चुकी पुलिस दिल्ली गोल्फ कोर्स पर खेल खराब नहीं करना चाहती थी। लिहाजा, रविवार के उलट बृहस्पतिवार को दिल्ली पुलिस बदली-बदली दिखी। यह नरम रवैया कारगर भी दिखा। निजामुद्दीन से शांतिपूर्ण मार्च करते हुए एक घेरा तोड़कर आगे बढ़े प्रदर्शनकारी गोल्फ कोर्स सिग्नल से आगे बढ़ने पर नहीं अड़े। बीच सड़क पर बैठकर लोगों ने पीड़िता के समर्थन में आवाज बुलंद की। थोड़ी सहूलियत इसलिए भी रही कि रविवार की तुलना में प्रदर्शनकारियों की संख्या कम थी।
रविवार को जोर-जबरदस्ती प्रदर्शनकारियों को हटाने की पुलिसिया कार्रवाई से दिल्ली पुलिस की काफी किरकिरी हुई थी। सवाल उठने लगे थे कि पुलिस न तो युवाओं का गुस्सा समझ सकी और न ही नए तरह के आंदोलनों से निपटने का तरीका। इसके बाद पुलिस ने नए सिरे से रणनीति तैयार की और बृहस्पतिवार को उस पर बखूबी अमल भी किया। निजामुद्दीन गोलचक्कर पर तैनात पुलिस अधिकारी प्रदर्शनकारियों से बातचीत करके लोगों का गुस्सा शांत करने की कोशिश करते दिखे। दोपहर बाद जब लोग आगे बढ़े तो पुलिस ने प्रतिरोध खड़ा किया लेकिन प्रदर्शनकारियों की जिद को मानते हुए आगे बढ़ने की इजाजत दे दी। काफिला गोल्फ कोर्स से आगे बढ़ा। यहां भारी पुलिस तैनात करने के साथ सिग्नल के दोनों तरफ बैरीकेटिंग की गई थी। पहले वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तैनात थे जबकि करीब दो सौ मीटर दूर की गई दूसरी बैरीकेटिंग पर आरपीएफ के जवानों के साथ वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले लिए पुलिसकर्मी खड़े थे।
प्रदर्शनकारियों के यहां पहुंचते ही अतिरिक्त पुलिस आयुक्त व पुलिस उपायुक्त स्तर के अधिकारियों ने मोर्चा संभाल लिया। धारा-144 का हवाला देते हुए इन्होंने काफिले को रोकने की कोशिश की। इस बीच आगे चल रहे कुछ लोगों ने आगे शांति भंग न करने की शर्त पर जाने को कहा लेकिन अधिकारी कभी नौकरी तो कभी रविवार के हंगामे की बात करते हुए मजबूरी बताते रहे। इस बीच किसी ने निजी शिकायत की तो उसे डायरी मेें दर्ज करके इंसाफ दिलाने का भरोसा भी दिलाया। हालांकि, कई बार अधिकारियों को झिड़की भी सुननी पड़ी लेकिन ज्यादातर ने मुस्कराकर इसे अनसुना करना ही बेहतर ही समझा। पुलिस का यह तरीका कारगर भी रहा। करीब 30 मिनट की कहासुनी के बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और नुक्कड़ नाटक व नारेबाजी से आवाज बुलंद करते रहे और दो घंटे तक रोष जाहिर करके लोग वापस लौट गए।
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