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नहीं थम रहीं बर्निंग ट्रेन की घटनाएं

New Delhi

Updated Sun, 02 Dec 2012 05:30 AM IST
नई दिल्ली। रेलवे की तमाम कोशिशों के बावजूद ट्रेनों में आग लगने की घटनाएं थम नहीं रही हैं। तमिलनाडु एक्सप्रेस की घटना आज भी लोग नहीं भूले हैं। इस हादसे में दो दर्जन से अधिक लोगों की जान चली गई थी। पिछले दिनों जीटी एक्सप्रेस के दो कोच में आग लग गई। अगर घटनाओं की तह में जाएं तो इसमें रेलवे प्रशासन की सुरक्षा में कमी के साथ ही यात्रियों की लापरवाही भी सामने आती है।
घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे कोशिश नहीं कर रहा, ऐसा नहीं है। कोच में आग न लगे, इसके लिए विभाग ने जर्मन तकनीक पर आधारित एलएचबी कोच लगाना शुरू किया है। राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी ट्रेनों में ऐसे कोच लगाए जा रहे हैं। घटनाओं को रोकने के लिए ट्रेन में आधुनिक यंत्र लगाने के साथ ही यात्रियों को ज्वलनशील पदार्थों के साथ जाने से रोका जा रहा है। रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने कोच की जांच तेज कर दी है। रेलवे सभी कर्मचारियों को आग बुझाने का प्रशिक्षण देने की सोच रहा है तो संवेदनशील अलार्म लगाने की भी व्यवस्था की बात हो रही है। इन तमाम एहतियात के बावजूद घटनाएं हो रही हैं।

बेफिक्र रेलवे और मुसाफिर
रेलवे सूत्रों की मानें तो इलेक्ट्रिक शॉर्ट की मुख्य वजह मेंटेनेंस का अभाव है। समय पर वायर चेक नहीं करने से आगजनी की घटना देखने को मिलती है। रेलवे अधिकारियों की मानें तो कई यात्री ट्रेन में ज्वलनशील पदार्थ लेकर यात्रा करते हैं। इतना ही नहीं, कई लोग ट्रेन में ही खाना बनाना शुरू कर देते हैं। ऐसे में आग लगने की आशंका बढ़ जाती है। इस तरह के हादसों से बचने के लिए सभी ट्रेनों में जर्मन तकनीक पर आधारित लिंक हॉफ मैन बुश (एलएचबी) कोच का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे कोच आगरोधी सामग्री से लैस होते हैं। इसके निर्माण में करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत होती है। साधारण कोच डेढ़ करोड़ की लागत से तैयार होते हैं। एलएचबी कोच की यह भी खासियत होती है कि ये पटरी से उतरने के बावजूद जल्दी नहीं पलटते।

दिल्ली की थी अपनी फायर सर्विस
ट्रेन या रेलवे स्टेशन पर आग की रोकथाम के लिए दिल्ली रेलवे के पास अपनी फायर सर्विस थी। इससे फायर सेफ्टी की जाती थी, लेकिन वक्त के साथ इसे बंद कर दिया गया। अब रेलवे फायर बिग्रेड के ही भरोसे है। आगजनी की रोकथाम के लिए अब स्टेशन और अन्य जगहों पर रेत के बोरे रखे जाते हैं। इसके साथ ही पानी की पर्याप्त व्यवस्था रहती है।

लापरवाही मुख्य वजह
उत्तरीय रेलवे मजदूर यूनियन के महामंत्री बीसी शर्मा का कहना है कि रेलवे प्रशासन की सुरक्षा में कमी ही ऐसी घटनाओं की मुख्य वजह है। स्टेशन और चलती ट्रेन की निगरानी ठीक से नहीं होती है। ट्रेन में सुरक्षा कर्मचारी होने के बावजूद यात्रियों और आग पर काबू पाने वाले यंत्र की जांच ठीक से नहीं की जाती। कई कर्मचारी ऐसे हैं, जिन्हें आग बुझाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल करना भी नहीं आता। घटिया समान के इस्तेमाल पर कोई निगरानी नहीं की जाती है। आग लगने के बाद मसला छुपाने के लिए मजदूरों पर आरोप मढ़ दिया जाता है। फायर बिग्रेड के स्टेशन तक पहुंचने में आधे घंटे का वक्त लग जाता है। शर्मा कहते हैं घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे को फायर ऑडिट टीम गठित करनी चाहिए, ताकि समय-समय पर यंत्रों और उसकी सुरक्षा की जांच की जा सके।
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