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23 साल से तिहाड़ के किसी कैदी को नहीं हुई फांसी

New Delhi

Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। तिहाड़ जेल में करीब 23 साल से किसी भी कैदी को फांसी नहीं दी गई है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारे केहर सिंह और सतवंत सिंह को 6 जनवरी, 1989 को फांसी दी गई थी। उसके बाद किसी भी कैदी को भी तिहाड़ में फांसी नहीं हुई है। 3 जून,1958 को बचन सिंह को तिहाड़ जेल में पहली फांसी दी गई।
मुंबई हमले के गुनहगार अजमल कसाब को फांसी दिए जाने के बाद अब सबकी निगाहें संसद हमले के दोषी तिहाड़ जेल में बंद मोहम्मद अफजल गुरु पर हैं। तिहाड़ की जेल नंबर 3 के हाई सिक्योरिटी सेल में बंद अफजल गुरु की निगाह भी सुबह से टेलीविजन पर थी। अफजल की फांसी पर दया याचिका राष्ट्रपति के पास भेजी गई थी जो फिलहाल गृह मंत्रालय के पास है।
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भुल्लर को है फांसी की मंजूरी
अफजल की तरह ही आईयूसी बम ब्लास्ट में फांसी की सजा पाए देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर भी कैदियों की सूची में है। भुल्लर की दया याचिका राष्ट्रपति खारिज कर चुके हैं। फिलहाल उसका इहबास (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड साइंसेज) में इलाज चल रहा है। इतना ही नहीं, तिहाड़ में विभिन्न अदालतों से फांसी की सजा पाए करीब एक दर्जन ऐसे कैदी हैं, जिनकी सजा पर अंतिम फैसला ऊपरी अदालत में होना है।


तिहाड़ में अभी देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर ही है, जिसकी दया याचिका को राष्ट्रपति ठुकरा चुके हैं, मगर उसकी मानसिक स्थिति खराब होने से उसे फांसी नहीं दी जा सकती।
सुनील गुप्ता, प्रवक्ता, तिहाड़ जेल
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तिहाड़ में कब और किसे मिली फांसी

सतवंत सिंह और केहर सिंह छह जनवरी,1989
मोहम्मद मकबूल भट्ट 11 फरवरी, 1984
उजागर सिंह और करतार सिंह नौ अक्तूबर,1983
कुलजीत सिंह और जसवीर सिंह 31 जनवरी,1982
शिव मोहन सात अप्रैल,1977
बकसीस सिंह एक दिसंबर,1977
अमृत भूषण गुप्ता 18 जनवरी,1977
हुकम सिंह और जय चंद सात अक्तूबर,1974
लोचन पाल 26 जुलाई,1967
मंजूर अहमद और श्रीचंद 26 अक्तूबर, 1966
राम सिंह 13 मार्च, 1964
सोहन सिंह 31 मार्च,1964
भगवान सिंह और हरनाम सिंह 19 जून,1963
मोहम्मद शरीफ 13 नवंबर,1961
नारायण सिंह सात दिसंबर,1960
राम गोपाल 21 सितंबर, 1959
प्यारे लाल 16 जून, 1959
बचन सिंह 23 जून, 1958
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