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बोड़ाकी रेलवे हब प्रोजेक्ट का जिम्मा डीएमआईसी को

New Delhi

Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
ग्रेटर नोएडा। ग्रेनो प्राधिकरण के प्रस्तावित बोड़ारी रेलवे हब का स्वरूप बदल गया है। पहले इस प्रोजेक्ट को प्राधिकरण बना रहा था, लेकिन अब यह जिम्मेदारी डीएमआईसी को दे दी गई है। प्राधिकरण इसके लिए 10 हजार हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत करके सौंपेगा। प्राधिकरण ने दादारी-बोड़ाकी के पास 10 हजार हेक्टेयर जमीन रेलवे हब बनाने के लिए चिह्नित की है। इसके पीछे प्राधिकरण की मंशा थी कि आवाजाही के अलावा माल ढुलाई का काम भी आसान हो सकेगा। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का काम भी चल रहा है, जिसका सेंटर भी दादरी, बोड़ाकी और अजायबपुर के आसपास बनेगा। प्रदेश सरकार भी इस प्रोजेक्ट में रुचि ले रही है और जमीन अधिग्रहण को लेकर कई दौर की बात भी हो चुकी है। डीएमआईसी के अधिकारियों से भी प्रदेश सरकार सीधे संपर्क है। सीईओ रमा रमन ने बताया कि कुछ साल पहले रेलवे और प्राधिकरण में बातचीत हुई थी, लेकिन अब प्रदेश सरकार ने तय किया है कि डीएमआईसी ही रेलवे हब बनाएगी। इसके लिए डीएमआईसी और रेलवे के बीच ही करार (एमओयू) होना है। प्राधिकरण शीघ्र ही जमीन अधिग्रहण के लिए काम करेगा।
प्राधिकरण कर रहा हाई पावर कमेटी में बदलाव का प्रयास
ग्रेटर नोएडा। आबादी निस्तारण के लिए प्रदेश सरकार की बनाई हाई पावर कमेटी को लेकर प्राधिकरण चिंतित है। इसमें बदलाव को लेकर प्राधिकरण उच्च अधिकारियों से बात रहा है।
सितंबर-2010 में प्रदेश सरकार ने किसानों की आबादी के मामलों के निस्तारण के लिए शासनादेश जारी करके डीएम की अध्यक्षता में हाई पावर कमेटी गठित की थी। इसके सदस्य एसएसपी, एसीईओ, एडीएम समेत अन्य अधिकारी हैं। कमेटी जो निर्णय लेती है, उसे सीईओ के पास भेजा जाता है। अगर कमेटी का एक भी सदस्य सहमत नहीं है, तो कमेटी निर्णय नहीं ले सकती। पिछले तीन साल से इसी आधार पर किसानों की आबादी के मामलों का निस्तारण किया जा रहा है। कमेटी के अधिकारियों में आपसी तालमेल नहीं हो पाता, जिस कारण कमेटी की बैठक नहीं हो पा रही। बैठक तभी हो सकती है जब सभी सदस्य शामिल हों। किसी न किसी कारण से कमेटी के अधिकारी व्यस्त रहते हैं, इसलिए आबादी निस्तारण में लंबा वक्त लगता है। सीईओ की मंजूरी के बाद आबादी छोड़े जाने का प्रस्ताव बोर्ड में रखा जाता है। गठिन और जटिल प्रक्रिया के चलते प्राधिकरण जमीन अधिग्रहण समेत विभिन्न प्रोजेक्टों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता है। प्राधिकरण के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शासनादेश में बदलाव करना कठिन है। इसके लिए लखनऊ में उच्चाधिकारियों से बात भी की गई है। अगर सहमति हो गई तो कमेटी के सदस्यों में बदलाव किया जा सकता है। अगर प्राधिकरण के मुताबिक हो गया तो किसानों की समस्या का समाधान आसानी से हो सकेगा।
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