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यमुना मैली : सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कहां खर्च हुए करोड़ों रुपये

New Delhi

Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने की मुहिम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार से सख्त सवाल किया है। शीर्ष कोर्ट ने पूछा कि यमुना की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये आखिरकार कहां खर्च हुए हैं। अदालत ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है जोकि अब तक किए गए कामकाज की समीक्षा करेगी। जस्टिस स्वतंत्र कुमार और जस्टिस मदन. बी लोकुर की पीठ ने दो सदस्यीय समिति से कहा है कि यमुना नदी में नालों से गिरने वाले गंदे पानी और कचरे को रोकने के बारे में समाधान खोजे। अदालत ने समिति से 9 नवंबर तक रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इस समिति में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के सदस्य होंगे। पीठ ने केंद्र से भी यमुना एक्शन प्लान सौंपने को कहा है। पीठ ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई कि सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने के नाम पर केंद्र और राज्य सरकारें करोड़ों रुपये खर्च कर चुकी हैं। इसके बावजूद भी नालों के जरिए मैला नदी में बहाया जा रहा है। नदी का पानी अभी भी अत्यधिक प्रदूषित है। शीर्षस्थ अदालत ने सवाल किया कि आखिर हजारों करोड़ रुपये फूंकने का मतलब क्या है, जब जल प्रदूषण कम ही नहीं हुआ है। सर्वोच्च अदालत ने सीवर ट्रीटमेंट प्लांटों की हालत जानने के लिए समिति को इन संयंत्रों का दौरा करने को भी कहा है। यमुना की सफाई में करोड़ों रुपये बहाने के बाद भी नदी की हालत में सुधार न होने पर सुप्रीम कोर्ट कई बार केंद्र, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगा चुका है। पिछली सुनवाई में केंद्र ने कहा था कि यमुना को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए 1062 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश ने 219 करोड़ 58 लाख रुपये खर्च किए हैं। यमुना की सफाई के मसले पर सर्वोच्च अदालत में 18 साल से सुनवाई हो रही है। केंद्र और तीनों राज्य सरकारों ने अब तक यमुना की सफाई पर 12 सौ करोड़ रुपये खर्च किए हैं लेकिन नदी के पानी की हालत जस की तस बनी हुई है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने यमुना की सफाई के मुद्दे पर 1994 में एक अखबार की खबर पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की थी। इस दौरान अदालत इस मसले पर कई महत्वपूर्ण आदेश जारी कर चुका है।
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