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ले आउट प्लान विवाद सुलझने की राह पर

New Delhi

Updated Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। राजधानी में नियमित की गईं कॉलोनियों के ले आउट प्लान बनाने का खर्च देने का विवाद सुलझने लगा है। नगर निगम द्वारा यह खर्च देने से मना करने के बाद दिल्ली सरकार झुक गई है। उसने नगर निगम को ले आउट बनाने का खर्च देने का आश्वासन दे दिया है। सरकार ने तीनों नगर निगम से प्लान बनाने पर आने वाले खर्च का ब्योरा मांगा है। गौरतलब है कि नियमित की गईं कॉलोनियों का ले आउट प्लान तैयार करने में आने वाला खर्च देने के मामले में दिल्ली सरकार और नगर निगम के बीच पिछले एक सप्ताह से टकराव चल रहा था। सरकार ने खर्च देने से मना करते हुए नगर निगम को कॉलोनियों की आरडब्ल्यूए से खर्च लेने का सुझाव दिया था, लेकिन नगर निगम अधिकारियों ने इस सुझाव को मानने से इनकार कर दिया था। इस मामले का अमर उजाला ने 23 अक्तूबर को खुलासा किया था। इसके बाद दक्षिणी नगर निगम की स्थाई समिति ने प्लान बनाने के लिए राशि देने का प्रस्ताव रद्द कर दिया था। इस बारे में मालूम होने पर दिल्ली सरकार की नींद उड़ गई थी। इसके बाद शहरी विकास विभाग को नगर निगम के अधिकारियों से बात करने की पहल करनी पड़ी, क्योंकि प्लान न बनने पर कॉलोनियों के नियमित होने का मामला खटाई में पड़ गया था। विभाग ने प्लान बनाने का खर्च देने का वादा किया है। वह यह खर्च तभी देगा, जब तीनों नगर निगम प्लान बनाने में आने वाले खर्च की पूरे ब्योरे के साथ जानकारी उपलब्ध कराएगी। सूत्रों के अनुसार विभाग ने तीनों नगर निगम से नियमित की गईं 895 कॉलोनियों के क्षेत्रफल के बारे में जानकारी मांगी है। इसके अलावा ले आउट प्लान बनाने के आधार के संबंध में भी पूछा है। तीनों नगर निगम ने कॉलोनियों के क्षेत्रफल के आधार पर तीन शिक्षा संस्थानों से प्लान बनाने का अनुबंध किया है। दो शिक्षा संस्थानों ने प्लान बनाना आरंभ कर दिया है। मगर एक संस्थान ने अभी प्लान बनाने का कार्य शुरू नहीं किया है। इस संस्थान ने दक्षिणी नगर निगम के इलाके की कॉलोनियों का प्लान बनाना है। विभाग का फरमान मिलने के बाद तीनों नगर निगम ने कॉलोनियों के क्षेत्रफल के बारे में जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। इस संबंध में उन्होंने सर्वे ऑफ इंडिया का सहारा लिया है, क्योंकि दिल्ली सरकार ने उससे ही नियमित की गईं कॉलोनियों की बाउंड्री तय कराई है। उसके पास कॉलोनी स्तर पर ब्योरा उपलब्ध है। नगर निगम अधिकारियों ने विभाग को बताया है कि सभी 895 कॉलोनियों का प्लान तैयार कराने में करीब 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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