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सरकार के पास सेरेब्रल पाल्सी पीड़ितों के आंकड़े नहीं

New Delhi

Updated Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। सेरेब्रल पाल्सी के दिल्ली या देश में कितने मरीज हैं इसकी कोई आधिकारिक संख्या मौजूद नहीं है। दिल्ली सरकार के चौधरी ब्रह्म प्रकाश चरक संस्थान गांवों में घूम कर इस बीमारी के मरीजों की संख्या का पता लगा रहा है। मरीजों की पहचान कर उनको बेहतर इलाज दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बीमारी के मरीजों की संख्या गांवों में अधिक होती है। चरक संस्थान के परियोजना निदेशक डॉ. बीएस बनर्जी ने बताया कि इस बीमारी से पीड़ित बच्चों की संख्या पता लगाने के लिए काम किया जा रहा है। पहले नजफगढ़ व उसके आसपास के गांव और उसके बाद दिल्ली के अन्य गांव में भी इस बीमारी का पता लगाकर उनका इलाज किया जाएगा।
गोबिन्द बल्लभ पंत अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. विनोद पुरी ने कहा कि बच्चे के जन्म के समय सावधानी बरती जाए तो इस बीमारी को बहुत हद तक टाला जा सकता है। जन्म के बाद मां यदि बच्चे को दूध पिलाने में देर करती है तब भी इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। नवजात को अक्सर पीलिया हो जाता है, इससे दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ने से सेरेब्रल पाल्सी का खतरा रहता है। गर्भवती महिलाओं में कैल्शियम की कमी से भी सेरेब्रल पाल्सी (सीपी) बीमारी का खतरा रहता है। एम्स की शिशु रोग विभाग की सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष डॉ. वीणा कालरा ने बताया कि जब बच्चे का दिमाग विकसित हो रहा होता है उस समय किसी तरह की परेशानी आने से इसका खतरा बढ़ जाता है। गर्भवती को यदि एनीमिया, थॉयराइड, किसी तरह का संक्रमण होता है तब होने वाले बच्चे को सेरेब्रल पाल्सी का खतरा बढ़ जाता है। चरक संस्थान के डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि गर्भ के समय होने वाली दिक्कतों की वजह से इस बीमारी की संभावना 70 प्रतिशत रहती है। जन्म के दौरान दस प्रतिशत और जन्म के बाद किसी दिक्कत आने से 20 प्रतिशत बीमारी होने का खतरा रहता है। उन्होंने बताया कि संस्थान में पिछले कुछ वर्ष में इस बीमारी से पीड़ित चार सौ मरीज आए हैं। कई मरीजों को उम्मीद से ज्यादा फायदा हुआ है।

सेरेब्रल पाल्सी के लक्षण
जन्म के बाद बच्चे का देर से रोना, समय पर बैठ नहीं पाना, गर्दन का नहीं टिकना, पैर-हाथ में कड़ापन, दोनों पैर कैंचीनुमा आकार में होना आदि।

बचाव के तरीके
गर्भवती को कैलोरी युक्त खान-पान पर ध्यान देना चाहिए। किसी प्रकार के संक्रमण से बचना चाहिए, बच्चे को जन्म के बाद तुरंत मां का दूध पिलाना चाहिए, नवजात आम बच्चों से अलग दिखे तो तुरंत जांच करवानी चाहिए।
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