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सेट टॉप बॉक्स के नुकसान भी कम नहीं

New Delhi

Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। अक्तूबर के बाद बिना सेट टॉप बॉक्स के आपका टीवी बुद्धू बक्सा बन जाएगा। एनालॉग केबल सिग्नल के माध्यम से चैनल प्रसारण बंद कर डिजिटल एड्रेसेबल केबल टीवी सिस्टम (डैस) के माध्यम से चैनल प्रसारण शुरू हो जाएगा। आम उपभोक्ताओं को इससे कई फायदे हैं, तो नुकसान भी कम नहीं है। अमेरिका में ऐसी कोई व्यवस्था लागू करने के लिए जनता को विश्वास में लिया जाता है, लेकिन यहां जनता पर यह व्यवस्था जबर्दस्ती थोपी जा रही है, ऐसे में इसकी सफलता पर संदेह बरकरार है।
एक ओर नई व्यवस्था से जहां अनचाहे चैनलों से आपको छुटकारा मिल जाएगा, वहीं ज्यादा बिजली बिल भी आपको चुकाना पड़ेगा। अगर आपके घर में एक साथ तीन टेलीविजन चल रहे हैं, तो आपके बिल पर 60 वाट अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसी तरह डैस के लागू होने से केबल ऑपरेटर आपसे मनमर्जी चार्ज तो नहीं वसूल सकेंगे, लेकिन आपको मनोरंजन कर के रूप में 20 रुपया प्रति टेलीविजन सेट सरकार को देना पड़ेगा। यानी अगर तीन टीवी घर में लगे हैं, तो आपको 60 रुपये मनोरंजन कर के रूप में चुकाना पड़ेगा। इतना ही नहीं अगर कल तकनीक बदल जाती है तो आपका एसटीबी बेकार हो जाएगा। क्योंकि इस एसटीबी में स्वैप स्कीम नहीं है। यानी एडवांस तकनीक के आने के साथ ही आपका आठ सौ रुपये का एसटीबी सिर्फ डब्बा बनकर रह जाएगा। हालांकि डिजिटल सिग्नल से तस्वीर साफ उभर कर आएगी। चैनल चुनाव का अधिकार दर्शकों को होगा। अमेरिका में जब डैस लागू किया गया था तो उपभोक्ताओ को 40-40 डॉलर दिए गए थे। लेकिन इस कानून को हमारे यहां जबरदस्ती थोपा जा रहा है। उपभोक्ता केबल ऑपरेटर से तरह-तरह के सवाल करता है। सबसे पहले खर्च के बारे में पूछा जाता है, जिसका जवाब सरकार के पास नहीं है। टेलीकॉम रेग्यूलेटरी ऑफ इंडिया (ट्राई) अभी तक रेट तय नहीं कर पाई है। यही वजह है कि सरकार की यह योजना डेडलाइन के बावजूद परवान नहीं चढ़ पा रही है।
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सरकार के इस फैसले से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। गरीब जनता एसटीबी का खर्च देने को तैयार नहीं है।- रूप शर्मा, अध्यक्ष, केबल ऑपरेटर फेडरेशन ऑफ इंडिया
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