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खुद ही जज बन बैठी हैं बिजली कंपनियां

New Delhi

Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। बिजली कंपनियां कहीं अपने कार्यालय में समानांतर अदालत तो नहीं चला रहीं? क्योंकि बिजली अदालत बनने के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं उससे ऐसा ही लग रहा है। वर्ष-2005 से अब तक बिजली चोरी, मीटर से छेड़छाड़ अथवा अन्य खामियों के करीब सवा तीन लाख मामले सामने आए, जिनमें करीब 21 हजार मामले ही अदालत पहुंचे। बाकी मामलों का निपटारा डिस्कॉम्स कार्यालय में ही कर दिया गया।
दरअसल जन सुनवाई में उपभोक्ताओं ने आयोग के समक्ष डिस्कॉम्स पर आरोप लगाते हुए कहा था कि बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं को परेशान करने के लिए इस तरह के मामले बनाती हैं। डिस्कॉम्स के कहने के अनुसार यदि उपभोक्ता जुर्माना नहीं देता, तब उसे अदालत में घसीटने की बात कही जाती है। कोई भी उपभोक्ता अदालती कार्रवाई से बचना चाहता है, इसलिए उपभोक्ता न चाहते हुए भी डिस्कॉम्स द्वारा जुर्माना चुकाने को मजबूर होता है।
बिजली निजीकरण के बाद वर्ष-2005 में दिल्ली में विशेष बिजली अदालत का गठन किया गया। बावजूद इसके बिजली चोरी और मीटर से छेड़छाड़ के मामलों का निपटारा बिजली कंपनियां अपने कार्यालयों में करती रहीं। वर्ष-2005 से अब तक बीएसईएस की यमुना पावर लिमिटेड इलाके में 80 हजार ऐसे मामले दर्ज किए गए, लेकिन महज आठ हजार मामले ही अदालत पहुंचे।
बीएसईएस की राजधानी पावर लिमिटेड इलाके में विशेष बिजली अदालत बनने के बाद एक लाख 75 हजार मामले दर्ज किए गए, जिनमें 8795 मामले अदालत पहुंचे। इनमें 2443 मामले अदालती सुनवाई के दौरान वापस ले लिए गए। टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) इलाके का भी यही हाल है। वर्ष-2004-05 से अब तक बिजली चोरी सहित 76 हजार 185 मामले दर्ज किए गए। जिसमें से तीन हजार 798 मामले ही अदालत पहुंचे। 72 हजार से अधिक मामलों का निपटारा कंपनी ने अपने कार्यालय में ही कर लिया।

क्या कहती है डिस्कॉम्स
बिजली वितरण कंपनियों का कहना है कि बिजली चोरी के मामले सामने आने के बाद उनका एंफोर्समेंट एसेसमेंट सेल यह आकलन करता है कि कितनी बिजली की चोरी की गई है। उसके बाद उनके ऊपर जुर्माना लगाया जाता है। जुर्माने की रकम अदा करने पर कुछ रियायत देने का प्रावधान है, उसी आधार पर डिस्कॉम्स काम करती हैं।

उपभोक्ताओं से इस तरह की शिकायतें मिली हैं। इसलिए इस बार जो नियम-कानून बनाए जा रहे हैं, उनमें डिस्कॉम्स के प्रति सख्ती बरती जाएगी। उनकी कार्यप्रणाली पर भी शिकंजा कसा जाएगा। बिजली चोरी के मामले दर्ज करने के तरीके, मीटर टेस्टिंग, मीटर सील की जांच के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। - पीडी सुधाकर, चेयरमैन, डीईआरसी
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