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संगठित षड्यंत्र में घनश्याम सबसे बड़े खिलाड़ी

Ghaziabad Bureau

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Updated Thu, 05 Oct 2017 01:35 AM IST
घोटाले के खेल में घनश्याम सबसे बड़ा ‘खिलाड़ी’
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे से जुड़े मुआवजा घोटाले में तत्कालीन एडीएम भू-अर्जन घनश्याम सिंह ने हर स्तर पर शासन को गुमराह किया। अपने बेटे शिवांग राठौर के नाम पर जमीन खरीदने से लेकर आर्बिट्रेशन तक में नियमों को ताक पर रखकर पूरे घोटाले में अहम भूमिका निभाई। यहां तक की शासन की अनुमति के बिना बेटे के नाम पर साल 2013 में जमीन खरीद ली। नाहल गांव में खरीदी गई इस दो एकड़ जमीन की अनुमति के लिए 9 जून 2015 को शासन को पत्र लिखा, जिसकी अनुमति 15 सितंबर 2016 को मिली। यानी अनुमति की प्रत्याशा में ही जमीन का क्रय कर लिया गया, जो पूरी तरह गैरकानूनी था। तीन साल बाद जमीन खरीद की अनुमति देने में शासन की भूमिका को भी संदिग्ध माना गया है।
मंडलायुक्त की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट है कि घनश्याम सिंह ने शासकीय पद पर रहते हुए अपने निजी हितों के लिए प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल किया और हर स्तर पर शासन की आंख में धूल झोंकी। दो एकड़ जमीन की खरीद गोमती नगर लखनऊ स्थित भूखंड की बिक्री से प्राप्त धन के जरिए दिखाई गई जबकि गोमती नगर का भूखंड एक करोड़ रुपये में बेचा गया और नाहल गांव की जमीन एक करोड़ 78 लाख रुपये में खरीदी गई। ऐसे में सवाल उठता है कि 78 लाख रुपये से अधिक की अतिरिक्त धनराशि कहां से आई। जमीन खरीद स्वीकृति को लेकर शासन को लिखे गए पत्र में घनश्याम सिंह ने स्पष्ट किया कि वो जिन किसानों से जमीन खरीद रहे हैं उनसे-उनका किसी भी तरह का शासकीय संबंध नहीं है जबकि उन्हीं किसानों का आर्बिट्रेशन को लेकर तत्कालीन एडीएम घनश्याम सिंह की कोर्ट में केस लंबित था यानी सीधा शासकीय संबंध था। इसके साथ ही आर्बिट्रेशन में भी अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर करीब 10 गुना तक मुआवजा उठाया। जांच में कहा गया है कि इस सारे कृत्य से साफ है कि शासन को धोखा दिया गया। जांच के दौरान बेटे के नाम पर नाहल, पटना मुरादनगर और कुशलिया गांव में हुए सात बैनामे भी पकड़े गए, जिन पर मोटा मुआवजा उठाया गया।

घनश्याम सिंह के बेटे के नाम पर हुए बैनामे
गांव खसरा नंबर भूमि (हेक्टेयर) अवार्ड क्रय की दर(प्र.मि.) आर्बिट्रेशन में संशोधित दर
नाहल 18 0.1033 1235.18 1582.19 5577.00
नाहल 35 0.0747 1235.18 1582.19 5577.00
नाहल 18 0.1022 1235.18 1582.19 5577.00
नाहल 68 0.0727 1235.18 1582.19 5577.00
कुशलिया 1243 0.1660 617.59 1300.00 6500.00
पटना मुरादनगर 94 0.3470 6812.36 977.23
पटना मुरादनगर 37 0.58175 6812.36 1150.15

बड़ा है घोटाला ?
जांच में माना गया है कि दिल्ली मेरठ के साथ ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे व अन्य योजनाओं में भी घनश्याम सिंह ने अन्य दलालों के साथ मिलकर जमीनें खरीदी हैं, जिसका पूरा रिकार्ड उपलब्ध नहीं कराया गया है इसलिए घोटाला कहीं ज्यादा बड़ा है, जिसका अब विस्तृत जांच के बाद ही खुलासा हो सकेगा।

हापुड़ के डीएम भी कटघरे में
गाजियाबाद के तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी व हापुड़ के वर्तमान डीएम कृष्णा करुणेश की भूमिका भी एक्सप्रेस वे घोटाले में संदिग्ध मानी गई है। जांच में कहा गया है कि केलव शर्मा द्वारा की गई शिकायत पर तत्कालीन सीडीओ कृष्णा करुणेश व तत्कालीन एसडीएम लोनी हनुमान प्रसाद मौर्या से जांच कराई गई थी। इन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में शिकायतों में कोई अनियमितता नहीं पाई थी। केवल किसानों तथा इदरीश के संयुक्त खाते जरूर संदेहास्पद माने थे। ऐसे में कृष्णा करुणेश भी सवालों के घेरे में हैं। मंडलायुक्त की जांच रिपोर्ट में इसका स्पष्ट उल्लेख किया गया है।

अमीन भी षड्यंत्र का मुख्य ‘किरदार’
जांच रिपोर्ट में संतोष कुमार अमीन के परिवार के सदस्यों व पत्नी लोकेश बेनीवाल व उनके रिश्तेदारों के नाम पर हापुड़ व गाजियाबाद जिले में 9 जगहों पर हुई जमीन के कागजात पकड़े गए। इसमें से छह के अंदर भूमि क्रय करने की दर घोषित अवार्ड की दर से अधिक पाई गई है। नाहल गांव में खसरा संख्या 85, 116, 151, 82, 82 और 82 पर अंकित जमीन की अवार्ड दर प्रति वर्ग मीटर में 1235.18 थी जबकि क्रय की दर 1582 और आर्बिट्रे्शन में संशोधित दर 5577.00 रुपये प्रति वर्ग मीटर में कर दी गई। यानी धारा -3 डी का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद जमीन क्रय कर आर्बिट्रेशन में दर को बढ़ा दिया गया।

अधिकांश बैनामों में तीन लोग गवाह
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि पीड़ित किसानों के साथ इदरीश पुत्र यूसुफ इत्यादि दलालों द्वारा संयुक्त बैंक खाते खुलवाकर मुआवजे की धनराशि का ट्रांसफर किया गया, जिसे बाद में उन्होंने अपने खातों में ट्रांसफर कर लिया। यहां पर गौर करने वाले बात यह है कि शिवांग राठौर, दिव्या सिंह, रनवीर सिंह, लोकेश बेनीवाल और इदरीस पुत्र यूसुफ व ताज मोहम्मद पुत्र ममरेज खान के नाम पर हुए बैनामों में गवाह तीन-चार लोग ही रहे हैं। गवाहों में इदरीश, अखलाक, राजपल सिंह, ताहिर, रिजवान विनेश पुत्र सतवीर सिंह का ही नाम है, जिससे साफ होता है कि सारा घोटाला सुनियोजित तरीके से हुआ।

डीएम क्यों नही रोक पाए मामला
सारे घोटाले में गाजियाबाद के तत्कालीन डीएम विमल शर्मा व निधि केशरवानी की भूमिका को भी संदिग्ध माना गया है। आर्बिटेशन के 9 ऐसे मामलों को पकड़ा गया है जो विमल शर्मा व निधि केशरवानी की कोर्ट में तय हुए और करीब 10 गुना से अधिक का मुआवजा दे दिया गया।

इन बैनामों में भी हुआ मुआवजे का खेल
क्रेता आर्बिट्रेर तिथि अवार्ड आर्बिट्रेशन संशोधित दर (प्रति वर्ग मीटर)
शिवांग राठौर विमल शर्मा 15 जनवरी 2016 617.59 6500
रनवीर सिंह विमल शर्मा 4 जुलाई 2016 1235.18 5577
दिव्या सिंह निधि केशरवानी 6 फरवरी 2017 1235.18 6515
दीपक सिंह निधि केशरवानी 6 फरवरी 2017 1482.00 6515
इदरीस, ताज निधि केशरवानी 6 फरवरी 2017 1235.18 6500
लोकेश बेनीवाल विमल शर्मा 4 जुलाई 2016 1235.18 5577
शाहिद व शमीम खां निधि केशरवानी 6 फरवरी 2017 1235.18 6500
यूसुफ, इमरान निधि केशरवानी 6 फरवरी 2017 1235.18 6500


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