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गन्ना संकट कम कर सकता है चीनी की मिठास

कृष्णेंदु कुमार / अमर उजाला, देहरादून

Updated Fri, 02 Dec 2016 10:25 AM IST
Less acreage of sugarcane plantation
उत्तराखंड की चीनी मिलों को चालू पेराई सीजन में गन्ना संकट से जूझना पड़ सकता है। वजह यह है कि इस साल गन्ने की बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले कम है। लिहाजा, चीनी मिलें अपनी स्थापित क्षमता का उपयोग नहीं कर पाएंगी, जिसका असर चीनी के उत्पादन पर भी पड़ेगा।
इस साल प्रदेश में गन्ने की बुवाई का रकबा 84,763 हेक्टेयर के स्तर पर है, जो पिछले साल 93000 हेक्टेयर पर था। पिछले साल प्रदेश में गन्ने का 283 लाख क्विंटल उत्पादन हुआ था और चीनी का उत्पादन 27.26 लाख टन रहा। इस साल गन्ने का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले दस फीसदी तक कम रहने की आशंका जताई जा रही है।

सरकार द्वारा निर्धारित मापदंड के मुताबिक चीनी मिलों का पेराई सत्र 180 दिनों का है। जबकि प्रदेश के आठ चीनी मिलों की पेराई क्षमता लगभग 36,750 टन प्रतिदिन की है। इस स्थिति में चीनी मिलों को पेराई के लिए 100 दिनों तक भी गन्ना नहीं मिल पाएगा।

स्थापित क्षमता से कम गन्ना मिलने की स्थिति में चीनी मिलों का घाटा और बढ़ जाएगा, क्योंकि पेराई सत्र के दौरान के खर्च को कम नहीं किया जा सकता है। गन्ने की उपलब्ध कम होने को लेकर ऐसी संभावना जताई जा रही हैं कि प्रदेश की चीनी मिलों में फरवरी माह से उत्पादन बंद होना शुरू हो जाएगा। 

चीनी मिलों की क्षमता प्रतिदिन 
सितारगंज       2500 टन 
बाजपुर          4000 टन 
नादेही           2000 टन
किच्छा          4000 टन 
डोईवाला        2500 टन 
लिब्बरहेडी      6250 टन
इकबालपुर       5500 टन 
लक्सर           10,000 टन
कुल क्षमता     36,750 टन प्रतिदिन 

इस साल गन्ने का रकबा कम है। रिकवरी भी कम मिल रही है। गन्ने का रेट 317 रुपये निर्धारित कर दिया गया है, रिकवरी लगभग 8.5 फीसदी की है। ऐसे में एक क्विंटल गन्ना से 8.5 किलो चीनी तैयार होगी। गन्ना से चीनी तैयार करने में लगभग 90 रुपये प्रति क्विंटल का खर्च होगा। इस हिसाब से चीनी मिलों को 100 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ेगा। 
- एलएस लांबा, जीएम, उत्तम शुगर मिल्स लिमिटेड, लिब्बरहेडी

प्रदेश में गन्ने का रकबा जरूर थोड़ा सा कम है, लेकिन संकट जैसी स्थिति नहीं है। प्रदेश की आठों चीनी मिलें चल चुकी हैं। अभी रिकवरी भी अच्छी आ रही है।  
- प्रदीप सिंह रावत, अपर सचिव, गन्ना
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