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अधिकारी को मिली मनमर्जी करने की सजा

अमर उजाला, देहरादून

Updated Tue, 21 Jan 2014 10:43 AM IST
assembly speaker gave orders
देहरादून विधानसभा स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने वन विकास निगम के एमडी को हटाकर दूसरे स्थान पर अटैच करने का निर्देश दिया है।
सदन में उठाया मामला
उन्होंने जमीन के टेंडर मामले में श्रीकांत चंदोला पर लगे आरोपों की जांच मुख्य सचिव से करवाने तथा मामले से तीन सप्ताह के भीतर सदन को अवगत कराने की बात कही। सोमवार को सदन में मामला कांग्रेस विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने उठाया।

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विपक्ष ने इस मसले पर प्रणव का साथ दिया। प्रणव के साथ समूचा विपक्ष भी वेल में आ गया। श्नकाल शुरू होते ही चैंपियन ने सदन में कहा कि निगम के एमडी श्रीकांत चंदोला ने काष्ठ डिपो लगाने के लिए सरकारी भूमि चयनित नहीं की, बल्कि निजी भूमि की खरीद के लिए नौ जनवरी को टेंडर खोल दिए।

जबकि शासन का आदेश है कि इस कार्य के लिए सरकारी भूमि ही प्रयोग में लाई जाए। चैंपियन का आरोप था कि जिस भूमि को खरीदने की तैयारी थी, वह एमडी के रिश्तेदार की है। इस पर संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश ने कहा कि टेंडर की प्रक्रिया निरस्त कर मामले की मुख्य सचिव से जांच करने को कहा है।

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इससे संतुष्ट नहीं होने पर प्रणव वेल में आ गए। इसके बाद भाजपा विधायक मदन कौशिक के साथ पूरा विपक्ष प्रणव के पीछे वेल में आ डटा। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट, मदन कौशिक, संजय गुप्ता ने इस मामले को लेकर कई सवाल किए।

चंदोला को हटाने का भरोसा नहीं मिलने पर प्रणव और विपक्ष दोनों भड़क उठे। इसके बाद स्पीकर ने हस्तक्षेप करते हुए सरकार को निर्देश दिया कि एमडी को तत्काल निगम से हटाकर दूसरी जगह अटैच किया जाए।

संज्ञान में पहले से ही था जमीन खरीदने का मामला
वन विकास निगम के एमडी श्रीकांत चंदोला पर कार्रवाई के बाद कई सवाल भी उठ रहे हैं। दस्तावेज में दर्ज तथ्यों के मुताबिक लकड़ी (काष्ठ) डिपो के लिए जमीन खरीदने का निर्णय अकेले चंदोला का नहीं था।

वन विकास निगम के तत्कालीन चेयरमैन कुंवर प्रणव चैंपियन की अध्यक्षता में 16 अगस्त 2013 को प्रबंध मंडल की 42वीं बैठक में जमीन खरीदने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए प्रबंध निदेशक को अधिकृत किया गया था।

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इसके बाद अपर मुख्य सचिव बीपी पांडे की अध्यक्षता में 29 नवंबर 2013 के बैठक में जिलाधिकारी से उपयोगिता के आधार पर सरकारी जमीन के लिए अनुरोध करने का निर्णय लिया गया। जिलाधिकारी से भूमि उपलब्ध न होने की स्थिति में अभिरुचि प्रस्तावों के आधार पर कार्यवाही करने का फैसला हुआ था।

डीएम से किया था अनुरोध
इसकी जानकारी समय-समय पर देने और जमीन की खरीद से पहले प्रबंध मंडल की अनुमति प्राप्त करना भी तय हुआ था। प्रबंध निदेशक चंदोला का दावा है कि जिलाधिकारी देहरादून से सरकारी जमीन आवंटित करने का अनुरोध किया गया था।

आठ जनवरी 2014 को डीएम देहरादून का पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें प्रशासन ने जमीन आवंटित करने से मना कर दिया। इसके बाद नौ जनवरी को निजी जमीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसकी पूरी जानकारी 10 जनवरी को शासन को भेज दी गई।

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प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण एस रामास्वामी को भी प्रकरण की जानकारी थी। बहरहाल, मुख्य सचिव की जांच के बाद, कौन दोषी या निर्दोष है, यह साफ हो सकता है। लेकिन फिलहाल कहा यह भी जा रहा है कि प्रमुख वन संरक्षक की दौड़ से बाहर रखने के लिए चंदोला को इस मामले में उलझाया गया।

यह भी एक पक्ष
कहा जाता है कि श्रीकांत चंदोला लंबे समय से प्रदेश के एक ताकतवर वरिष्ठ अफसर की आंखों की किरकिरी बने हैं। दरअसल, वन विकास निगम के कर्मचारी प्रदेश की नदियों में खनन पट्टे निजी हाथों में देने का विरोध करते रहे।

कहा जा रहा है कि श्रीकांत चंदोला से विरोध को नियंत्रित करने की अपेक्षा की गई। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। चंदोला से सहानुभूति रखने वाले कह रहे हैं कि इसका ‘खामियाजा’ भी उन्हें भुगतना पड़ा है।

वैसे, इस पूरे प्रकरण को चैंपियन और चंदोला के बीच वन विकास निगम में रहते कई बार हुए विवाद से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

मेरे कार्यकाल में जमीन खरीदने का निर्णय हुआ था। यह तय नहीं हुआ था कि निजी जमीन खरीदी जाएगी। मेरा विरोध निजी जमीन खरीदने का है। जो जमीन के प्रस्ताव आए हैं, उसमें से एक जमीन प्रबंध निदेशक के सुसर का है।
- कुंवर प्रणव चैंपियन, विधायक

अभी निगम ने कोई जमीन नहीं खरीदी है। बोर्ड बैठक में तय निर्णय के अनुसार ही जमीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की गई। मेरे ससुर का देहरादून में एक इंच में जमीन नहीं है। आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है।
- श्रीकांत चंदोला, प्रबंध निदेशक
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