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अंजलि ने खाई मैगी, अर्जुन ने खेला क्रिकेट

Dehradun

Updated Tue, 25 Dec 2012 05:30 AM IST
मसूरी। सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन ने सोमवार को वुडस्टॉक स्कूल के स्टाफ के बच्चों के साथ क्रिकेट खेला। हालांकि वह वहां बहुत देर तक नहीं रुकाऔर जल्द ही वापस लौट गया। बाद में अंजलि अर्जुन के साथ लाल टिब्बा स्थित चार दुकान पर करीब एक घंटे रहीं। डा.अंजलि और अर्जुन ने चार दुकान में पैन केक और मैगी खाई। अंजलि जब भी मसूरी आती हैं, यहां उनका काफी वक्त बीतता है।
रेस्टोरेंट के संचालक प्रीतम प्रकाश ने बताया कि भीड़ हो जाने की आशंका के कारण सचिन खुद यहां नही आए। उन्होंने बताया कि अंजलि से बातचीत में उन्होंने अनुरोध किया था कि सचिन को अपने संन्यास के बारे में लोगों को बताना चाहिए। इस पर अंजलि ने बस इतना कहा कि फिलहाल सचिन इस बारे में कुछ बोलने के लिए तैयार नही है। यही कारण है कि वह सार्वजनिक स्थलों पर नही आ रहे हैं। हमें उनके निर्णय का सम्मान करना चाहिए। नाश्ता करने के बाद अंजलि और अर्जुन पैदल ही चार दुकान से रुकबी लौट गए, क्योंकि वहां भी उनके होने की जानकारी होने पर भीड़ जुटने लगी थी।

प्रशंसकों को मायूस किया सचिन ने
सचिन तेंदुलकर ने वर्ष 2010 और 2008 में अपने प्रशंसकों को जमकर ऑटोग्राफ दिए और दिल खोल कर तस्वीरें खिंचवाई थी लेकिन संन्यास की घोषणा के बाद मसूरी पहुंचे सचिन का मूड कैमरा देखते ही उखड़ जा रहा है। ऑटोग्राफ तो दूर वह अपना चेहरा भी छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। सोमवार को वुडस्टॉक स्कूल से लौटते वक्त चार दुकान के पास जैसे ही सचिन ने मीडिया कर्मियों के कैमरे देखे, मुंह मोड़ दिया। उनके मित्र संजय नारंग खुद कार चला रहे थे और सचिन फ्रंट सीट पर बैठकर उनसे हंसते हुए बातचीत कर रहे थे लेकिन जैसे ही उनकी नजर मीडियाकर्मियों पर पड़ी उनके चेहरे पर तल्खी की रेखाएं खिंच गईं।

रुकबी में सचिन के लिए खास इंतजाम
सचिन के लिए रुकबी में खास मेन्यू तैयार किया गया है। सचिन और उनके साथ आए मित्रों के लिए संजय नारंग के घर पर बीते कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं। संजय के दोस्त और व्यापार संघ अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने बताया कि काफी सामान उनकी दुकान से ही लिया गया। सचिन समेत कई वीआईपी के पहुंचने के कारण होटल के स्टॉफ को पहले से ही एलर्ट कर दिया गया था। संजय ने दौरे को गोपनीय रखने की हिदायत स्टॉफ को दी थी। रविवार को सभी कर्मचारियों के मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ करा दिए थे। मेहमाननवाजी के लिए संजय की कोठी में 15 कर्मचारियों को तैनात किया गया है। होटल में करीब 50 कर्मचारी पहले से ही कार्यरत हैं। लंढौर स्थित रामचंद्र ब्रदर्स से खाने-पीने का सामान खरीदा गया है।


इंसेंट
क्रिसमस की पूर्व वेला और सचिन के लाल टिब्बा में होने की सूचना से आज भारी संख्या में प्रशंसक और पर्यटकों ने लाल टिब्बा की और रूख किया। जिससे लंढौर बाजार में आज सुबह दस बजे से जाम लगना शुरू हो गया था। जाम से आम लोगों को भी भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा।


तेंदुलकर्स ने कराई सचिन और संजय की दोस्ती
मसूरी। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर और होटल व्यवसायी संजय नारंग के बीच दोस्ती की सबसे बड़ी कड़ी ‘तेंदुलकर्स’ रही। दोनों ने मिल कर कई शहरों में एक साथ इस रेस्टोरेंट श्रृंखला की शुरुआत की थी। तबसे यह दोस्ती सिर्फ बिजनेस नहीं बल्कि पारीवारिक दोस्ती में तब्दील हो गई।
सचिन के बिजनेस पार्टनर संजय नारंग मुंबई, लंदन और भारत के विभिन्न शहरों में होटल, रेस्तरां और फ्लाइट किचन किंग के रूप में जाने जाते हैं। संजय ने वर्ष 1985 में अमेरिका की कोरनेल विश्वविद्यालय से होटल मैनेजमेंट की डिग्री कैटरिंग में हासिल की। विदेश से लौटते ही संजय ने एंबेसडर स्काई सेफ मुंबई में बतौर हेड ऑफ एअर कैटरिंग काम किया। 1992 में ताज मुंबई ज्वाइन किया। उसके बाद उन्होंने अपनी कैटरिंग और फ्लाइट किचन ग्रुप शुरू किया। मौजूदा समय में वह मार्स स्काई गुरमुट के नाम से कंपनी चला रहे हैं। कंपनी के सीईओ संजय नारंग ही है। मुंबई समेत देश के विभिन्न शहरों में संजय के होटलों और रेस्टोरेंट की एक श्रृंखला है। मुंबई में वाटरस्टोन होटल, गॉर्डन हाउस होटल, लंदन में डब्बावाला रेस्तरां ख्यातिलब्ध हैं। लगभग एक दशक पहले संजय नारंग ने मास्टर ब्लास्ट के साथ कई शहरों में तेंदुलकर्स की शुरुआत की थी।

चर्चाओं में रहते हैं संजय
मसूरी। संजय नारंग वर्ष 2004 में मसूरी आए। यहां लाल टिब्बा में पहले कोठी खरीदी। उसके बाद रुकबी होटल और घंटाघर के पास क्लॉक टावर कैफी रेस्तरां खोला। संजय पिछले दो साल से छावनी क्षेत्र और मसूरी में काफी चर्चाओं में रहे। संजय ने कम्युनिटी अस्पताल का कायाकल्प किया लेकिन बाद में प्रबंधन ने उनसे पीछा छु़ड़ा लिया। कमोवेश यही स्थिति वुडस्टॉक स्कूल में हुई। संजय ने वुडस्टॉक स्कूल में कैटरिंग का काम शुरू किया लेकिन एक साल बाद ही उन्हें यहां काम छोड़ना पड़ा। नगर में संजय तब चर्चाओं में आए। जब वर्ष 2008 में मास्टर ब्लास्टर उनके लाल टिब्बा स्थित बोथवेल बैंक में रुके।
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