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48 वर्षों से जारी है सरकारी जमीन लूटने का खेल

Dehradun

Updated Sun, 23 Dec 2012 05:30 AM IST
देहरादून। दून में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे का खेल पिछले 48 वर्षों से चल रहा है। इस धंधे के फलने फूलने के पीछे सरकारी मुलाजिमों का हाथ रहा है। शीशमबाड़ा की जमीन के बाद अब धोरणाखास में आईटी पार्क से लगी 14 बीघे जमीन का मामला प्रकाश में आया है। मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी ने एसडीएम सदर को कमान सौंपी है।
1964 में धोरणाखास की यह जमीन ग्राम समाज के नाम दर्ज हुई थी। जिसे बाद में सिडकुल को देने का प्रस्ताव बनाया गया था। बाद में जब इसकी कागजी कार्यवाही शुरू हुई तो पता चला कि यह किसी जैतून नामक महिला के नाम दर्ज हो चुकी है। जांच में यह भी बात आई है कि 2004 में तत्कालीन एसडीएम कोर्ट के जरिये यह जमीन जैतून के नाम आई थी। तबसे लेकर आज तक यह मामला संदिग्ध बना हुआ है। ग्राम समाज की इतनी बड़ी जमीन जैतून के नाम कैसे आ गई, इसे कोई भी पचा पा रहा है। बीच में इसकी जांच हुई तो पता चला कि जमीन खतौनी में गड़बड़ी की गई है। इतना ही नहीं जिस आदेश के तहत यह जमीन सिडकुल को दी गई थी, उस आदेश से जुड़ा रजिस्टर भी रिकार्ड रूम से गायब है। इसी तरह खतौनी में जिस जगह जमीन को सरकारी अंकित किया गया था, वह स्थान भी फटा हुआ है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि इसमें तहसील स्तर से ही अधिकारियों कर्मचारियों की मिली भगत है। लेकिन गुनहगार कौन है यह अभी तय नहीं हो पाया है। इसी की जांच करने के लिए शनिवार को एक आदेश डीएम कार्यालय ने जारी किया है।

विजिलेंस करेगी शीशमबाड़ा घपले की जांच
शीशमबाड़ा की सरकारी जमीन में घपले की जांच विजिलेंस से करायी जाएगी। इस संबंध में डीएम ने एक पत्र शासन को भेजा है। जिसमें कहा गया है कि यह काफी बड़ा मामला है। जिसमें सरकारी जमीनों को खुर्द बुर्द किया गया है। अभी तक हुई जांच में यह सामने आया है कि कई कर्मचारी सीधे तौर पर इसमें शामिल हैं।

कोट-
जनपद में सरकारी जमीनों के अवैध कब्जे का खेल बड़े पैमाने पर लंबे समय से चला आ रहा है। इसकी विजिलेंस जांच के बाद बड़ा खुलासा हो सकता है। इसके लिए शासन को भी पत्र लिखा गया है। फिलहाल जहां जहां सूचना मिल रही है विभागीय स्तर पर जांच पड़ताल करायी जा रही है।--बीवीआरसी पुरुषोत्तम जिलाधिकारी
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