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आरक्षण विरोधी आंदोलन में अब कर्मचारी एक मंच पर

Dehradun

Updated Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
देहरादून। पदोन्नति में आरक्षण के विरोध में पहले अलग-अलग हो गए कर्मचारियों के दो धड़े रविवार को एक मंच साझा करने पर सहमत हो गए। मंजिल एक होने पर भी इनकी राह अभी एक नही हो पाई है। दोनों ही धड़े फिलहाल अपने-अपने तरीके से विरोध जताएंगे। एक धड़ा आवयश्क सेवाओं को ठप करने पर आमादा है तो दूसरा धड़ा कार्यबहिष्कार पर रहेगा।
पदोन्नति में आरक्षण के विरोध कर रहा उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक संघर्ष मोरचा पूर्व में प्रदेश सरकार से बातचीत के बाद बिखराव का शिकार भी हुआ था। जीएस भाकुनी के संयोजन में उतरे धड़े ने सरकार से बातचीत को सफल बताते हुए घोषित हड़ताल से अपने आपको अलग कर लिया था। इस धड़े के नेता दबाव के साथ-साथ बातचीत पर भी विश्वास करते रहे। दूसरी ओर हड़ताल को जारी रखने का इरादा जताने वाले कर्मचारी एसएस वल्दिया के संयोजन में संघर्ष समिति को बनाकर मैदान में डट रहे। एसएस वल्दिया के संयोजन में संघर्ष मोरचे का नाम नही बदला गया पर संयोजक मंडल के पदाधिकारियों को हटा दिया गया था। बाद में वल्दिया धड़ा सरकार से अपनी कुछ मांगों को मनवाने में सफल भी रहा था।
अब पदोन्नति में आरक्षण के विरोध की आग फिर भड़की तो दोनों धड़ों ने अपनी-अपनी तरह से प्रतिक्रिया की। भाकुनी गुट का स्वर तीखा रहा और इस धड़े ने आंदोलन को सीधे आवयश्क सेवाओं को ठप करके विरोध जताने में उतार दिया। दूसरी ओर वल्दिया गुट इस बार संभल कर चल रहा है और उसने कार्यबहिष्कार जैसे पारंपरिक तरीके को अपनाया।
रविवार को अपनी-अपनी रणनीति पर कायम रहने के बावजूद ये दोनों धड़े एक मंच साझा करने पर सहमत हुए। परेड ग्राउंड स्थित संघ भवन में दोनों धड़ों के नेताओं की संयुक्त बैठक में आपस के विरोध के मुद्दों को सुलझाया गया। तय किया गया कि फिलहाल एक साथ बैठकर आंदोलन का संचालन किया जाएगा। सोमवार को दोनों धड़े एक साथ दिखाई देंगे पर संयोजक मंडल कर्मचारियों को अलग-अलग दिशा निर्देश देता दिखाई देगा। तय यह भी किया गया है कि सोमवार के बाद आंदोलन को आगे बढ़ाने पर एक संयोजन मंडल का चयन किया जा सकता है।

सचिवालय का काम काज भी होगा प्रभावित
देहरादून। सोमवार को सचिवालय का काम प्रभावित होना भी तय है। अभी तक सचिवालय में समीक्षा अधिकारी ही कार्य बहिष्कार पर थे। पर एसएस वल्दिया और भाकुनी दोनों के आरक्षण विरोधी आंदोलन में कूदने से अब सचिवालय भी इसकी चपेट में आ गया है। ये दोनो नेता सचिवालय से ही संबंधित हैं।
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