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थमे पहिए, दौड़ी मुसीबत

Dehradun

Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
देहरादून। टैक्स बढ़ाने के खिलाफ उत्तराखंड परिवहन महासंघ के पूर्व घोषित चक्काजाम के तहत राजधानी में ही कम से कम 10 हजार वाहन सड़कों पर नहीं उतरे। चक्काजाम को सिटी बस, विक्रम, आटो, टैक्सी, मैक्स कैब, ट्रक, स्कूल वैन चलाने वालों के समर्थन के कारण इसका आम जनजीवन पर जबर्दस्त असर दिखाई पड़ा। महासंघ ने बुधवार से वाहनों पर काले झंडे लगाकर चलने का फैसला किया है। इसके बाद धीरे-धीरे आंदोलन बढ़ाया जाएगा। अनिश्चितकालीन चक्काजाम का फैसला भी लिया जा सकता है। वाहन न मिलने के कारण मसूरी में सैलानियों को काफी परेशानी हुई।
जाम के कारण पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर निर्भर लोगों का पूरा दिन मुसीबतों में बीता। सबसे अधिक मुसीबत आफिस, शिक्षण संस्थान और स्कूल आने-जाने वालों को हुई। बड़ी संख्या में बच्चे स्कूल पैदल ही गए और लौटे। हालांकि जाम को देखते हुए कई स्कूलों ने अवकाश घोषित कर रखा था लेकिन बड़ी संख्या में स्कूल खुले भी रहे। इससे उनके अभिभावक उन्हें स्कूल ले जाने-लाने में परेशान रहे।

जबरन रोके वाहन, हवा निकाली, मारपीट
जुलूस निकाल कर जताया विरोध, मंत्री को ज्ञापन, आज से वाहनों पर काले झंडे
देहरादून। चक्काजाम को सफल बनाने के लिए संयुक्त परिवहन महासंघ पदाधिकारियों ने मनमानी भी की। उन्होंने सड़क पर उतरे लोडरों और अन्य वाहनों को जबरन बंद करा दिया। कई जगह वाहनों केे पहिए से हवा निकाल दी गई और विरोध करने पर धक्का-मुक्की की गई। इस दौरान रेलवे स्टेशन पर तो मारपीट की नौबत आ गई। हालांकि, पुलिस के पहुंचने पर मामला शांत हुआ।
इससे पहले आंदोलन से जुड़े सभी एसोसिएशनों के पदाधिकारी परेड ग्राउंड पर जुटे। यहां सभा के बाद उन्होंने रैली निकाली और विधानसभा कूच किया। विधानसभा के पास परिवहन मंत्री सुरेंद्र राकेश को ज्ञापन सौंप टैक्स वृद्धि वापस लेने की मांग की। बाद में परिवहन मंत्री ने इस मुद्दे पर अफसरों के साथ बैठक भी की। बैठक में परिवहन महासंघ के पदाधिकारियों के साथ वार्ता का निर्णय लिया गया है। बैठक में परिवहन सचिव उमाकांत पंवार और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

बाहर से आए लोग भटकते रहे
चक्काजाम के कारण मंगलवार को दून की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। लगभग सभी चौराहों पर लोग वाहनों का इंतजार करते नजर आए। वाहन न मिलने से बाहर से आने वाले लोगों की भी आईएसबीटी और रेलवे स्टेशन पर भीड़ रही। उन्हें निजी वाहनों से आने-जाने वालों से मदद लेनी पड़ी या किसी को स्टेशन बुलाना पड़ा। सैकड़ों को सामान सहित काफी लंबा सफर पैदल तय करना पड़ा। इतना ही नहीं दिल्ली, मेरठ, सहारनपुर, रुड़की, मुजफ्फरनगर, मथुरा सहित बाहरी क्षेत्रों से आए ऐसे लोगों ने होटलों में ठहरना मुनासिब समझा, जिन्हें यहां से आगे का सफर करना था।

यह है टैक्स (रुपये में)
वाहन पुराना टैक्स नया टैक्स
विक्रम 2900 13200
आटोरिक्शा 1460 3000
बस 24 सीटर 22266 37800
बस 30 सीटर 32292 57360
मैक्सी कैब आठ सीटर 12000 15400
टैक्सी 4820 8800
सात वर्ष से अधिक पुराने वाहन को देना होगा 400 रुपये ग्रीन टैक्स
(नोट : यह टैक्स एक वर्ष के लिए देय होगा)

व्यावसायिक वाहन मालिकों ने एक दिन का सांकेतिक जाम कर सरकार को ताकत का अहसास करा दिया है। परिवहन मंत्री ने मामले में मुख्यमंत्री से बात करने का आश्वासन दिया है।
-उमा नरेश तिवारी, अध्यक्ष, संयुक्त परिवहन महासंघ

पूरे उत्तराखंड में जबर्दस्त जाम रहा। प्रदेश सरकार के रवैये के कारण आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। बुधवार को परेड मैदान में आगे की रणनीति तय की जाएगी।
-जेके कंपानी, संयोजक, संयुक्त परिवहन महासंघ

यात्रियों का दर्द
मसूरी एक्सप्रेस से सुबह पहुंची, लेकिन एक घंटे बाद भी ऑटो नहीं मिला। रिश्तेदार को फोन करके गाड़ी मंगाकर घर पहुंची।
-अदिति, मोहित नगर

जनता एक्सप्रेस से लखनऊ से सुबह साढ़े सात बजे दून पहुंच गया था। दस बजे तक कोई वाहन नहीं मिला। आखिर दोस्त को बाइक लेकर बुलाया।
-रचित, शिमला बाईपास

मुझे इनामउल्लाह बिल्डिंग जाना था। तीन घंटे तक विक्रम या सिटी बस का इंतजार करता रहा। पैदल ही सफर करना पड़ा।
-डा. यासीन, मुजफ्फरनगर

आईआईएमटी राजपुर रोड में पढ़ता हूं। सुबह सात बजे से गाड़ी के इंतजार में खड़ा हूं। चार घंटे बीत गए। कॉलेज छोड़ना पड़ा।
-जितेंद्र कक्कड़, हरिद्वार

मनाली से यहां पहुंचे। सामान भी है। करीब एक घंटे के इंतजार के बाद भी बस विक्रम नहीं मिले। ससुराल से रिश्तेदार को बुलाना पड़ा।
-विकास, दिल्ली


एक नजर में
- वाहन न मिलने के कारण बाहर से आए लोगों ने सामान लॉकर रूम में जमा करा दिया। बाद में घर से वाहन लेकर आए और सामान ले गए।
-चक्काजाम के कारण लोगों को परेशान देख आम शहरियों ने मदद का सुख उठाया। बाइक सवार ही नहीं कार वालों ने भी लिफ्ट देकर लोगों को उनकी मंजिल तक पहुंचाया।

मंडी से नहीं हुई फल-सब्जी की निकासी
काश्तकारों को नुकसान का आंकलन 40 लाख से ऊपर
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। टैक्स बढ़ोत्तरी के खिलाफ संयुक्त परिवहन महासंघ के आह्वान पर व्यावसायिक वाहनों के चक्का जाम का व्यापक असर मंडी से फल-सब्जी की निकासी पर पड़ा। कुछ आटो, लोडर वालों ने सुबह के वक्त फल-सब्जी लाद मंडी से निकलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें गेट पर ही उतार दिया गया। शहर में फल-सब्जी नहीं पहुंचा। काश्तकारों को इससे बड़ा नुकसान पहुंचा है। आंकड़ा तकरीबन 40 लाख के आस-पास है। आढ़ती एसोसिएशन के जितेंद्र के अनुसार फल-सब्जी की आवक पर कोई असर नहीं है, अलबत्ता निकासी जरूरत प्रभावित हुई है। वह इस प्रभाव को 50 प्रतिशत से ज्यादा आंकते हैं। फलों के आढ़ती अनिल अदलखा 30-40 लाख के नुकसान की बात कहते हैं।

हड़ताल का असर अस्पतालों पर भी
देहरादून। विक्रम, सिटी बसें और आटो के नहीं चलने से मंगलवार को दून अस्पताल में मरीजों की कमी रही। रोज डेढ़ से दो हजार के करीब ओपीडी में आने वाले मरीजों की जगह करीब 900 मरीज ही आ पाए। कम मरीज होने की वजह से डाक्टर अपने चैंबर में खाली बैठे रहे।
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