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शिक्षा निदेशालय में फिर फर्जीवाड़े की गूंज

Dehradun

Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
देहरादून। शिक्षा निदेशालय में एक बार फिर फर्जी पत्र का मामला सामने आया है। इस बार पूर्व शिक्षा महानिदेशक डा. निधि पांडेय के एक वर्ष पुराने पत्र को लेकर विभाग में हड़कंप है। जानकारी के मुताबिक 25 अगस्त 2011 इस पत्र में डा. पांडेय की ओर से सहायक लेखाधिकारी जगदीश प्रसाद भट्ट को शिक्षा विभाग से किसी अन्य विभाग में स्थानांतरित करने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, तब इस पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। लेकिन, अब विभागीय अपर सचिव अर्जुन सिंह ने इस पत्र का संज्ञान लिया है। उन्होंने निदेशक (लेखा एवं हकदारी) को पत्र लिखकर भट्ट के ट्रांसफर को कहा। उधर, सहायक लेखाधिकारी भट्ट ने डा. पांडेय की ओर से जारी पत्र को फर्जी करार दिया है। भट्ट का दावा है कि आरटीआई से उन्हें इसकी जानकारी मिली। उनके मुताबिक उन्होंने पूर्व महानिदेशक से बात की तो उन्होंने ऐसा कोई पत्र जारी करने से इनकार किया। भट्ट का कहना है कि विभाग फर्जी पत्र के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। वहीं, अपर सचिव ने मामले में निदेशक लेखा को जांच के लिए भी कह दिया है। बता दें कि डा. पांडेय वर्तमान में अपर सचिव मुख्यमंत्री पद पर तैनात हैं।
उपनिदेशक के भी फर्जी हस्ताक्षर
गत वर्ष शिक्षा उपनिदेशक माधुरी नेगी के हस्ताक्षर से खेल टीम प्रभारी को लेकर जारी आदेश को फर्जी बताया गया था। इस पत्र के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर गई उत्तराखंड की टीम की प्रभारी को कोई भी निर्णय लेने के लिए अधिकृत किए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, नेगी ने पत्र पर अपने हस्ताक्षर होने से इनकार किया था। उन्होंने मामले में एफआईआर कराने की बात भी कही थी। लेकिन, वक्त के साथ यह ठंडे बस्ते में चला गया।

शिक्षक गया था जेल
जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक के कार्यालय में भी तबादलों को लेकर पूर्व में फर्जी आदेश का मामला पकड़ में आ चुका है। प्रकरण में एक शिक्षक ने अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर अपना तबादला दून में करवा लिया था, लेकिन तत्कालीन अपर जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक राजेंद्र सिंह रावत ने मामला पकड़ लिया। इसके बाद संबंधित शिक्षक को जेल की हवा खानी पड़ी थी।

मेरे जिस आदेश की बात की जा रही है, उसे देखने के बाद ही हस्ताक्षर की पहचान की जा सकेगी।
-डा. निधि पाण्डेय, अपर सचिव मुख्यमंत्रीशिक्षा निदेशालय में फिर फर्जीवाड़े की गूंज
पूर्व महानिदेशक के एक वर्ष पुराने पत्र को लेकर मचा हड़कंप
-सहायक लेखाधिकारी के तबादले की थी सिफारिश
-लेखाधिकारी ने पत्र को फर्जी बताया
-मामले में अपर सचिव ने दिए जांच के आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। शिक्षा निदेशालय में एक बार फिर फर्जी पत्र का मामला सामने आया है। इस बार पूर्व शिक्षा महानिदेशक डा. निधि पांडेय के एक वर्ष पुराने पत्र को लेकर विभाग में हड़कंप है। जानकारी के मुताबिक 25 अगस्त 2011 इस पत्र में डा. पांडेय की ओर से सहायक लेखाधिकारी जगदीश प्रसाद भट्ट को शिक्षा विभाग से किसी अन्य विभाग में स्थानांतरित करने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, तब इस पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। लेकिन, अब विभागीय अपर सचिव अर्जुन सिंह ने इस पत्र का संज्ञान लिया है। उन्होंने निदेशक (लेखा एवं हकदारी) को पत्र लिखकर भट्ट के ट्रांसफर को कहा। उधर, सहायक लेखाधिकारी भट्ट ने डा. पांडेय की ओर से जारी पत्र को फर्जी करार दिया है। भट्ट का दावा है कि आरटीआई से उन्हें इसकी जानकारी मिली। उनके मुताबिक उन्होंने पूर्व महानिदेशक से बात की तो उन्होंने ऐसा कोई पत्र जारी करने से इनकार किया। भट्ट का कहना है कि विभाग फर्जी पत्र के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। वहीं, अपर सचिव ने मामले में निदेशक लेखा को जांच के लिए भी कह दिया है। बता दें कि डा. पांडेय वर्तमान में अपर सचिव मुख्यमंत्री पद पर तैनात हैं।

उपनिदेशक के भी फर्जी हस्ताक्षर
गत वर्ष शिक्षा उपनिदेशक माधुरी नेगी के हस्ताक्षर से खेल टीम प्रभारी को लेकर जारी आदेश को फर्जी बताया गया था। इस पत्र के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर गई उत्तराखंड की टीम की प्रभारी को कोई भी निर्णय लेने के लिए अधिकृत किए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, नेगी ने पत्र पर अपने हस्ताक्षर होने से इनकार किया था। उन्होंने मामले में एफआईआर कराने की बात भी कही थी। लेकिन, वक्त के साथ यह ठंडे बस्ते में चला गया।

शिक्षक गया था जेल
जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक के कार्यालय में भी तबादलों को लेकर पूर्व में फर्जी आदेश का मामला पकड़ में आ चुका है। प्रकरण में एक शिक्षक ने अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर अपना तबादला दून में करवा लिया था, लेकिन तत्कालीन अपर जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक राजेंद्र सिंह रावत ने मामला पकड़ लिया। इसके बाद संबंधित शिक्षक को जेल की हवा खानी पड़ी थी।

मेरे जिस आदेश की बात की जा रही है, उसे देखने के बाद ही हस्ताक्षर की पहचान की जा सकेगी।
-डा. निधि पाण्डेय, अपर सचिव मुख्यमंत्री
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