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4 लाख वाहनों पर भारी पड़ रहीं 700 अवैध टैक्सियां

Dehradun

Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
देहरादून। राजधानी में रोज दौड़ने वाले करीब चार लाख वाहनों पर 700 अवैध टैक्सियां भारी पड़ रही हैं। शहर में रोज लगने वाले जाम की एक बड़ी वजह यह प्राइवेट धंधे में लगे वाहन भी हैं। यह खुला खेल काफी समय से चल रहा है। इससे राजस्व का भी करोड़ों का नुकसान हो रहा। इनके खिलाफ किसी तरह का आज तक एक्शन नहीं हुआ। दिन में एक दर्जन से अधिक बार चक्कर लगाने वालों इन प्राइवेट वाहनों को पार्क करने में भी दिक्कत आती है। अक्सर यह सड़कों पर ही खड़े नजर आते हैं। यह निजी वाहन हैं और इनका प्रयोग किना किसी कामर्शियल लाइसेंस के टैक्सी के रूप किया जा रहा है। मजे की बात यह है जिन सरकारी विभागों के पास इनको रोकने का अधिकारी है उनके यहां भी यह वाहन टैक्सी के रूप में प्रयोग में लाए जा रहे हैं।
टूर एंड ट्रेवल्स एजेंसियों से लेकर प्रदेश और केंद्र सरकार तक के कार्यालयों में ऐसे कारों का इस्तेमाल किया जा रहा है। निजी कार्यालय भी इसमें पीछे नहीं है। इन वाहनों के सड़कों पर उतरने से सबसे अधिक दिक्कत ट्रैफिक जाम की समस्या होती है। क्योंकि, ऐसे वाहनों का अगर निजी उपयोग किया जाए तो उस अनुपात में सड़क पर नहीं उतरेंगी।
इन शहरों में सबसे अधिक चलन
देहरादून, ऋषिकेश, मसूरी और हरिद्वार
इन विभागों में किया जाता है उपयोग
उत्तराखंड पावर कारपोरेशन, जल विद्युत निगम, पॉवर ट्रांसमिशन, लोक निर्माण विभाग, ओएनजीसी, परिवहन निगम, वन विभाग, वन विकास निगम सहित तमाम विभागों को वाहनों की जरूरत है। ऐसे में इनकी ओर से टेंडर किया जाता है, जिसमें केवल टैक्सी परमिट वाले वाहनों को ही लिया जाना चाहिए। इसमें वे लोग भी आवेदन करते है, जिनके वाहनों का पंजीकरण प्राइवेट वाहन के तौर पर हुआ रहता है।
कैसे लग रहा सरकार को फटका
टैक्सी के तौर पर किसी वाहन का पंजीकरण कराने की स्थिति में परमिट बनाने की जरूरत होती है। परमिट के लिए न्यूनतम 15 से 20 हजार रुपये खर्च करने पड़ते है। इसके अलावा हर तीन माह के बाद न्यूनतम 2220 रुपये रोड परिवहन टैक्स के तौर पर जमा करना पड़ता है। वाहनों के अनुसार परमिट और परिवहन टैक्स का खर्च की रकम बढ़ती है। प्राइवेट वाहन के लिए ऐसा करने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में प्राइवेट वाहन मालिक एक वाहन से सालाना लाखों रुपये की कमाई तो करते है, लेकिन सरकार को परमिट शुल्क और टैक्स नहीं जमा करते।
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राजधानी और आसपास के शहरों में बड़े पैमाने पर निजी वाहनों का उपयोग टैक्सी के तौर पर किया जा रहा है। ऐसी जानकारी है। इसको लेकर जल्द ही परिवहन विभाग की ओर से ठोस कदम उठाया जाएगा, जिससे निजी वाहनों का उपयोग टैक्सी के तौर पर बंद कराया जा सकें। -- सुधांशु गर्ग, संभागीय परिवहन अधिकारी
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