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हिमालय के लिए अलग मौसम संस्थान

Dehradun

Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
देहरादून। बादल फटने और भारी हिमपात से आपदा समेत मौसम की विपरीत परिस्थितियां हिमालयी क्षेत्रों का पर्याय रही हैं। उत्तराखंड, हिमाचल जैसे राज्यों में हर वर्ष ऐसी घटनाओं में जान-माल का भारी नुकसान होता है। ऐसे में हिमालय के मौसम के पूर्वानुमान के लिए अलग से मौसम विज्ञान संस्थान की स्थापना की जानी जरूरी है। मौसम विज्ञानियों की राष्ट्रीय संगोष्ठी ट्रापमेट-2012 के दौरान यह प्रस्ताव पारित किया गया। इसके अलावा दस अन्य प्रस्तावों पर भी गहन विमर्श हुआ।
उत्तराखंड भारतीय मौसम विज्ञान सोसाइटी और उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र की ओर से इंडियन इंस्टीट्यूट आफ रिमोट सेंसिंग परिसर में आयोजित संगोष्ठी के आखिरी दिन बृहस्पतिवार को भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सलाहकार डाक्टर एम. राजीवन की अध्यक्षता में गठित पैनल के समक्ष विभिन्न प्रस्ताव रखे गए। सदस्य डा. बी थंपी, डा. आनंद शर्मा, डा. एमएम कीमोठी, डा. वीएस प्रसाद, डा. एम महापात्रा, पीएलएन राजू और मनमोहन सिंह, डा. अजित त्यागी, डा. कृष्णमूर्ति, डा. पीसी जोशी, डा. जीबी पंत आदि वैज्ञानिक मौजूद रहे।

प्रमुख प्रस्ताव
-पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम पूर्वानुमान को इसरो/ भारत मौसम विज्ञान विभाग और दूसरी संस्थाओं से उपग्रह आधारित सुविधाएं दी जाएं
-भारी वर्षा, बादल फटना और भूस्खलन की जानकारी के लिए उपग्रह आंकड़ों का प्रयोग कर नाउ कास्टिंग के तरीकों को विकसित करना
-विभिन्न क्षेत्रों में मौसम, जलवायु की सूचना के लिए 3डी जीआईएस के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए
-हिमालयी राज्यों के विश्वविद्यालयों/विद्यालयों में स्थानीय मौसम ,जलवायु और इससे जुड़े क्षेत्र कृषि जलवायु विज्ञान, पर्यटन व आपदा प्रबंधन में अध्ययन को प्रोत्साहित करना
-मौसम पूर्वानुमान तथा चेतावनियों को प्रभावी ढंग से जारी करने के लिए संचार सिस्टम का विकास

राज्य सरकारों से सहयोग की मांग
भारतीय मौसम विज्ञान सोसाइटी का विचार है कि ट्राप मेट की ओर से यहां को लागू करने में केन्द्र सरकार तथा संबंधित हिमालयी राज्यों को सहयोग करना चाहिए। हिमालयी राज्य सरकारों को वेधशालाओं तथा स्थानीय प्रशासन, अकादमिक व अनुसंधान संस्थाओं को इसमें शामिल करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
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