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उत्तराखंड के तीन महत्वपूर्ण कॉरिडोर बंद होने से हाथियों पर संकट

Dehradun

Updated Tue, 23 Oct 2012 12:00 PM IST
देहरादून। उत्तराखंड में तीस साल पहले तक यमुना नदी के किनारे स्थित कालसी से लेकर शारदा नदी के किनारे टनकपुर तक करीब 350 किलोमीटर की दूरी हाथी निर्बाध रूप से तय करते थे। चीला-मोतीचूर, चीला-कोटद्वार और गोला कॉरिडोर के जरिये हाथी इन दोनों प्रभागों में आसानी से आवाजाही करते थे। वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) ने वर्ष 2005 में देशभर में हाथियों के कॉरिडोर को लेकर एक अध्ययन किया था, जिसमें इन तीनों का भी उल्लेख था। लेकिन, तीनों जगह लगातार बढ़ती आबादी, अतिक्रमण और अवैध निर्माण ने कॉरिडोर बंद कर दिए हैं। इसके बाद प्रदेश के हाथी अलग-अलग क्षेत्रों में सीमित दायरों में ही कैद होकर रह गए हैं। इसका नतीजा मानव आबादी में हमले, खेती, मकानों को नुकसान के रूप में सामने आ रहा है।
यह है प्रगति
चीला-मोतीचूर: इस गलियारे को खोलने की कवायद गत दो दशक से प्रगति पर है। संभव है कि अगले दो से तीन साल के भीतर यह खुल जाए।
चीला-कोटद्वार: इसको लेकर अभी तक कोई प्रयास ही नहीं हुआ। इस क्षेत्र में सड़क बनने के साथ ही आबादी बस गई है।
गोला: यहां पर काफी अधिक अतिक्रमण हो चुका है, लेकिन यहां भी गलियारा खोलने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया है।

महत्वपूर्ण तथ्य
उत्तराखंड में एलीफेंट रिजर्व एरिया : 5405 वर्ग किलोमीटर
एलीफेंट रिजर्व के लिए केंद्र से बजट: दो करोड़ रुपये
उत्तराखंड के संवेदनशील क्षेत्र : हल्द्वानी, ऋषिकेश, हरिद्वार और कोटद्वार (इन क्षेत्रों में जंगलों के पास लगातार आबादी बढ़ रही है। इसके कारण हाथियों का उत्पात लगातार जारी है। हाथी आबादी में घुस रहे हैं, दुकान-मकान तोड़ रहे और खेती को नुकसान पहुंचा रहे हैं)

हाथी द्वारा हताहत व्यक्ति
वर्ष मृत घायल
2007 14 10
2008 14 13
2009 03 00
2010 07 03
2011 10 01

पंद्रह साल पहले तक हाथी खांडगांव के बगल से गुजर जाते थे। लेकिन कभी किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाते थे। गांव में बच्चे-बुजुर्ग बैठे रहते थे, कोई डर नहीं रहता था। लेकिन, अब तो हाथी पशुओं को भी मारने लगे है। राज्य गठन के बाद से हाथी ज्यादा आक्रामक हो गए हैं।
-बेताल सिंह नेगी, अध्यक्ष खांडगांव विस्थापन समिति

बढ़ती आबादी और विकास कार्यों से हाथियों का वासस्थल प्रभावित हुआ है। उनके रास्ते बंद हो गए है। सामान्य तौर पर हाथी शांत प्रवृत्ति का माना जाता है, लेकिन जिस तरह उत्पात की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि हाथी का जीवन प्रभावित हो रहा है।
-डा. सुशांत चौधरी, वैज्ञानिक भारतीय वन्यजीव संस्थान

यह सच है कि हाथियों के कॉरिडोर बंद हो गए हैं। जंगलों के आसपास आबादी बसती जा रही हैं। इससे हाथियों पर भी संकट खड़ा हो रहा है। इसके कारण ही संघर्ष की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। इसको लेकर विभाग की ओर से जल्द ही कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।
-एसएस शर्मा, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव
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