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पुराने पूरे नहीं, दिखा रहे नए सपने

Dehradun

Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
देहरादून। राजधानी के विकास की बड़ी जिम्मेदारी संभालने वाला मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) का हाल भी अजब है। छह माह में प्राधिकरण दून की जनता को 14 महत्वाकांक्षी योजनाओं का सपना दिखा चुका है। दूसरी ओर कई ऐसी योजनाएं ऐसी भी हैं, जिन्हें स्वीकृति मिले डेढ़ से पांच वर्ष पूर्व स्वीकृत छह योजनाओं पर अब तक काम शुरू भी नहीं हो सका है। एमडीडीए के पास अभी चकराता रोड पुनर्वास के अलावा कोई काम नहीं है। इससे पहले भी प्राधिकरण महज मानचित्र पास करने और अवैध निर्माण रोकने तक ही सीमित रहा। लेकिन, इन जिम्मेदारियों को भी ठीक से निभाया नहीं जा रहा। ऐसे में राजधानी के कई क्षेत्रों में अवैध निर्माणों की बाढ़ सी आ गई है। ऐसे में नई योजनाएं कब जमीन पर आकार लेंगी, खुद प्राधिकरण अधिकारी भी नहीं बता पा रहे।
ये हैं एमडीडीए की नई योजनाएं
- ढाकपट्टी में जमीन खरीदकर आवासीय योजना
- निरंजनपुर सब्जी मंडी में आवासीय योजना
- मसूरी में दो स्थानों पर आवासीय योजना
- मसूरी में 22 बीघा जमीन पर ईको पार्क
- इंदिरा मार्केट रिडेवलपमेंट प्लान
- आढ़त बाजार की शिफ्टिंग
- रेलवे स्टेशन को हर्रावाला में शिफ्ट करना
- शिमला बाईपास पर सब्जी मंडी और आढ़त बाजार बनाना
- न्यू ग्रेटर दून बनाने की योजना
- बुद्ध चौक का सौंदर्यीकरण
- चकराता रोड रिडेवलपमेंट (पीपीपी मोड पर)
- दून में पर्सनल रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (पीआरटीएस) लागू करना
- सरकारी भूमि पर दस हजार आवासों का निर्माण करना
- एमडीडीए को पूरी तरह ई-कार्यालय बनाना
लटकी हैं कई अहम योजनाएं
योजनाएं कितने समय से लंबित
आईएसबीटी के पास आवासीय योजना डेढ़ साल से
डिफेंस कालोनी के पास वाटर पार्क बनाना पांच साल से
भट्टा फाल सुंदरीकरण योजना ढाई साल से
डिस्पेंसरी रोड पार्किंग डेढ़ साल से
राजपुर रोड का सुंदरीकरण तीन साल से
ग्रीन दून का मास्टर प्लान दो साल से
नई और पुरानी योजनाओं पर एक साथ काम किया जा रहा है। छह माह से एक साल के भीतर बेहतर नतीजे सामने आएंगे। हर योजना पर तेजी से काम चल रहा है। योजना बनेगी नहीं तो उसे शुरू कैसे किया जाएगा।
-आर मीनाक्षी सुंदरम वीसी एमडीडीए
अमर उजाला पड़ताल
एमडीडीए की प्रस्तावित नई योजनाएं कब तक सिरे चढ़ेंगी, इस बारे में फिलहाल कुछ कहना कठिन है, लेकिन इस बहाने हम ऋंखला के रूप में प्राधिकरण की छह अटकी योजनाओं की पड़ताल करेंगे। ये वे योजनाएं हैं जिन्हें शुरू करने में कोई तकनीकी अड़चन नहीं है, लेकिन इच्छाशक्ति के अभाव में ये योजनाएं फाइलों से नहीं निकल पा रही हैं।
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