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हाथियों ने दिखाया इंसानियत को आइना

Dehradun

Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
जौलीग्रांट। यह खबर संवेदना के गिरते स्तर और सामुदायिक सहभागिता के हस से जूझ रही इंसानियत को आइना दिखाने वाली है। ऐसे में जब सभ्य समाज में भी परिवार के मायने दिन-ब-दिन सिकु ड़ते जा रहे हों, थानों में हाथियों के एक झुंड ने वह कर दिखाया जो आंखें खोलने वाला है। रविवार को थानो वन रेंज में नहर में फंसे अपने बच्चे को निकालने की हर कोशिश नाकाम होने के बाद परेशान हथिनी की दर्द भरी चिंघाड़ें सुनकर मीलों दूर जंगल से मदद के लिए पहुंचे दो दर्जन हाथियों के झुंड ने आखिरकार गज शावक को नहर से निकाल ही लिया करीब घंटे भर के इस ‘बचाव कार्य’ को देख प्रत्यक्षदर्शियों को आंखें नम हो गईं।
रविवार सवेरे-सवेरे हाथिनी की तेज चिंघाड़ ने कालू सिद्ध मंदिर के करीब कालूवाला गांव में रहने वालों और वन चौकी पर तैनात वनकर्मियों की आंखें खोल दीं। पहले तो वे भयभीत हुए कि कहीं हाथी गांव में न घुस आए हों। लेकिन आवाज का पीछा करते-करते कुछ लोग जब नहर के करीब पहुंचे तो यह देख कर दंग रह गए कि एक विशाल हथिनी सोंग नदी के सिंचाई नहर में गिरे अपने बच्चे को निकालने की हर संभव कोशिश कर रही थी। सफलता न मिलने पर वह बीच-बीच में चिंघाड़ भी रही थी। उसकी आवाज का दर्द साफ था। फिल्मों सरीखा दिखने वाला यह दृश्य यहीं खत्म नहीं हुआ। घंटे भर के अंदर ही दो दर्जन हाथियों का विशाल झुंड नहर पर पहुंच गया। इस झुंड को देख जैसे हथिनी में कई और हाथियों की शक्ति आ गई हो। वह और कई अन्य हाथी देखते ही देखते दो दलों में बंट कर पानी में उतर गए और गज शावक को सूंड धक्का देते हुए कुछ ही मिनटों में नहर से बाहर निकाल दिया। बच्चे के निकलते ही हथिनी की खुशी का ठिकाना न रहा। वह काफी देर तक बच्चे के पास खड़ी रही, जैसे उसका डर दूर कर रही हो। इसके बाद सभी हाथियों ने बच्चे को सूंडों में पानी भर नहलाया और फिर पूरा झुंड जंगल की ओर चला गया।
इस नजारे को देखने वालों को रोंगटे भयमिश्रित खुशी से खड़े हो गए। बेजुबानों के आपसी सहयोग की इस भावना ने उनकी आंखें भी नम कर दीं। इलाके में पूरे दिन इस घटना की चर्चा होती रही।

हाथियों में परिवार और समाज की भावना मनुष्यों की ही तरह होती है। वे बच्चों की सुरक्षा और देखभाल बेहतर तरीके से करते हैं। वन क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं दुर्लभ हैं।
-चिंतामणि ध्यानी, रेंजर (थानो रेंज)
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