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छात्रसंग में ‘राजनीति’ का गड़बड़ मेल

Dehradun

Updated Sat, 29 Sep 2012 12:00 PM IST
देहरादून। छात्रसंघ चुनाव अब आम छात्रों के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक पार्टियों के लिए ज्यादा महत्व रखने लगे हैं। तभी तो छात्रसंघ चुनावों में एबीवीपी के लिए भाजपा और एनएसयूआई के लिए कांग्रेस जैसी राजनीतिक पार्टियां एड़ी चोटी का जोर लगा देती हैं। दरअसल, छात्र संगठन और राजनीतिक पार्टियां अपने हितों के लिए एक-दूसरे का प्रयोग करने लगी हैं। छात्र संगठन पावर के लिए और राजनीतिक दल अपनी पहुंच बढ़ाने का स्वार्थ रखते हैं।
इस स्वार्थ के चलते छात्रसंघ का स्वरूप ही बदल गया है। इस बड़े दखल के कारण छात्रसंघ चुनाव मुद्दों की जगह नोट की चमक तक सीमित हो गए हैं। वैचारिक संवाद की जगह लाठियां चलाई जाती हैं। इसलिए ही आम छात्रों का इन चुनावों पर से विश्वास भी उठता जा रहा है।
इस बार हुए छात्रसंघ चुनावों में भी राजनीतिक पार्टियों का सीधा दखल दिखाई पड़ा। बीजेपी के वरिष्ठ नेता हरबंस कपूर और गणेश जोशी छात्रों के समर्थन में डीजीपी निवास पहुंच गए तो कांग्रेस नेता राजकुमार और अन्य डीएवी में एनएसयूआई के चुनाव हारने पर लड़ने-भिड़ने तक को तैयार हो गए। प्रमुख दलों का यह प्रत्यक्ष दखल छात्र राजनीति की दशा और दिशा दोनों के लिए घातक साबित हो रहा है।

क्या कहते हैं नेता

‘कालेजों में राजनीतिक दखल का कोई मतलब नहीं। हमारी पार्टी ऐसा नहीं करती, बीजेपी ही डीएवी में एबीवीपी का प्रत्यक्ष साथ देती दिखाई देती है। वैसे राजनीतिक पार्टियां इसलिए इन छात्र संगठनों को चाहती हैं, क्योंकि यहां से नई लीडरशिप की उम्मीद रहती है। युवाओं को चाहिए वह विचारधारा पर तो काम करें, लेकिन किसी का सीधा दखल न होने दें। - हीरा सिंह बिष्ट, पूर्व मंत्री

‘कालेजों में चुनाव छात्रों के सर्वांगीण विकास का हिस्सा है। लेकिन इसे अब राजनीतिक रूप दे दिया गया है। जरूरी है कि स्वस्थ चुनाव और स्वस्थ प्रतियोगिता हो। क्योंकि कालेज में राजनीतिक दखल इस स्वस्थ प्रतियोगिता को गला-काट प्रतियोगिता में बदल देता है। युवाओं को भी चाहिए, वह अपनी विचारधारा पर चुनाव लड़ें, राजनीतिक पार्टी की नहीं। - विनोद उनियाल, भाजपा नेत्री

‘एबीवीपी भाजपा का विंग ही नहीं है, तो सीधे हस्तक्षेप की बात ही नहीं। लेकिन, कांग्रेस जरूर अपने विंग एनएसयूआई को सीधे तौर पर लाभ पहुंचाने की कोशिश करती है। राजनीतिक दल और छात्र संगठनों के कार्य की रूपरेखा बिल्कुल अलग है। मैं भी छात्रसंघ अध्यक्ष रहा हूं और इस चीज को समझता हूं। इसलिए जरूरी है कि राजनीतिक पार्टियां खुद को इन चुनावों से दूर रखें। तभी हमारे समाज को अच्छे लीडर मिल सकेंगे। - हरबंस कपूर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष
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