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चार महीने का मानसून, उम्र भर की सजा

Dehradun

Updated Thu, 27 Sep 2012 12:00 PM IST
देहरादून। चार महीने के मानसून ने अनेक लोगों को उम्र भर की सजा दे दी। प्रदेश में बादल फटने की कई घटनाओं ने पहाड़ का जीवन झकझोर डाला। हालांकि कई अन्य मामलों में यह बारिश जीवनदायिनी भी साबित हुई। भूगर्भिक जल का स्तर बेहतर हो गया तो, जल विद्युत परियोजनाओं के डैम लबालब हो गए। जिनसे संकट के समय में बिजली पैदा हो सकेगी। आम तौर पर मानसून का समय एक जून से लेकर 23 सितंबर तक का होता है। इस बार मानसून आने में देरी हुई। 20 जून के बाद ही प्रदेश में इसकी दस्तक सुनाई। शुरू में ऐसा लगा कि बिना बरसे ही बादल निकल जाएंगे लेकिन, आखिरी के दो महीने अगस्त और सितंबर काफी बेहतर रहे। मौसम विभाग के अनुसार यह उत्तराखंड में बारिश के हिसाब से यह सामान्य स्थिति रही।
मानसून में दैवी आपदा से क्षति-
कुल मरने वालों व्यक्तियों की संख्या-148
घायलों की संख्या----------------89
कुल मरने वाले पशुओं की संख्या-1004
घायल पशुआें की संख्या-----53
जमींदोज हुए आवासों की संख्या-277
क्षतिग्रस्त हुए मकानों की संख्या-700
कुल खेती की जमीन का नुकसान-40.43 हेक्टेयर
क्षतिग्रस्त सड़कें---------------286 किलोमीटर
पैदल मार्ग------------------14 किमी
सार्वजनिक भवन क्षतिग्रस्त----05
नष्ट हुए जल स्रोत की संख्या--1000
ऊर्जा निगम को नुकसान--7 करोड़ 72 लाख

सबसे अधिक मरने वाले व्यक्तियों की संख्या रुद्रप्रयाग में--58 लोग
दूसरे नंबर पर उत्तरकाशी में-----------------------35 लोग
पिथौरागढ़ में-----------------------------------16 लोग
चमोली में कुल -------------------------------13 लोग
अभी तक लापता(सभी रुद्रप्रयाग के)---------------16 लोग

इसी तरह राजधानी दून में 2, हरिद्वार में 3, अल्मोड़ा में 3, बागेश्वर में 10, नैनीताल में 4 लोगों ने दैवी आपदा में अपनी जान गंवाईं। अन्य जनपदों में भी ऐसी ही घटनाएं हुई।

(स्रोत--आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र)

मानसूनी बारिश- सामान्य स्थिति-1213 मिमी
कुल बारिश हुई--------------1122 मिमी

1000 जल स्रोत भी नष्ट
आम तौर पूरे प्रदेश में 25 हजार जल स्रोत हैं। इस बार की बारिश में कुल 1000 जल स्रोत नष्ट हो गए हैं। भारी बारिश से भू जल स्तर बेहतर हुआ है। इस बार गर्मी में कम दिक्कत आएगी। जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई के लिए काम किया जा रहा है। पहाड़ों में जहां काफी दिक्कत है, पेयजल आपूर्ति के लिए टैंकर और अन्य माध्यमों का सहारा लिया जा रहा है।
डीडी डिमरी, मुख्य महाप्रबंधक, जलसंस्थान
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