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जिसके लिए घर छोड़ा वहीं बनी जान की दुश्मन

Dehradun

Updated Thu, 27 Sep 2012 12:00 PM IST
ऋषिकेश। देश को बिजली देने के लिए अपना घर-बार, खेत-खलिहान छोड़ने वाले टिहरी विस्थापित उसी बिजली की हाइटेंशन लाइन के नीचे जीने को मजबूर हैं। पुनर्वास विभाग ने विस्थापितों को हाइटेंशन लाइन के नीचे प्लाट आवंटित तो कर दिए, लेकिन लाइन शिफ्ट करना भूल गया।
वर्ष 2002 में टिहरी डैम डूब क्षेत्र के खांड गांव, आसीना, गोबरा, बड़कोट के करीब 600 परिवारों को श्यामपुर में बसाया गया था। हाइटेंशन लाइन की जद में आ रहे प्लाटों के आवंटन के समय आपत्ति जताने पर विभाग द्वारा हाइटेंशन लाइन को शिफ्ट करने की बात कही गई थी। लेकिन, लाइन की शिफ्ंिटग अभी तक जमीं पर नहीं उतरी है। विभागीय उदासीनता और क्षेत्र में हुए हादसों के चलते लोग दो मंजिला भवन बनाने का सपना तो छोड़ चुके हैं। कई लोगों ने तो लाइन के नीचे मकान ही नहीं बनाए है। जोखिम में रह रहे विस्थापित अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।


केस 1
जुलाई 2003 में स्थानीय निवासी रुप चंद सिंह अपने घर की छत पर खडे़ थे, तभी अचानक हाइटेंशन लाइन की चपेट में आकर बुरी तरह से झुलस गए। इसी दौरान घर में लगे सभी बिजली से संचालित उपकरण फुंक गए।

केस 2
जनवरी 2010 में मुंशी सिंह नेगी अपने घर का लिंटर डलवा रहे थे। इसी बीच मकान के ऊपर से गुजर रही हाइटेंशन लाइन की चपेट में आकर एक श्रमिक की मौत हो गई। जबकि कार्य कर रहे अन्य मजदूर बुरी तरह झुलस गए थे।

विस्थापितोें का दर्द
विस्थापित सोहन सिंह बिष्ट, गंभीर सिंह रावत, मुंशी सिंह, रुप चंद नेगी, जगदीश बेलवाल, मोहन सिंह रावत, खुशहाल सिंह पंवार ने बताया कि विभाग ने हमें प्लाट आवंटन के वक्त हाइटेंशन लाइन को विस्थापित क्षेत्र से शिफ्ट करने का भरोसा दिया था। कई बार विभाग के चक्कर लगाए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही। करंट लगने की घटनाओं के बाद से लोग मकान की छत पर जाने से डरने लगे हैं।


श्यामपुर विस्थापित क्षेत्र की हाइटेंशन लाइन का मामला संज्ञान में है। शिफ्टिंग का एस्टीमेट शासन को भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही धनराशि ऊर्जा निगम को जमा कराकर लाइन शिफ्ट करा दी जाएगी। -प्रीतमपाल सिंह, सहायक अभियंता अनुसंधान एवं नियोजन खंड ।
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