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प्रकृति मेहरबान, लेकिन सरकार नहीं

Dehradun

Updated Thu, 27 Sep 2012 12:00 PM IST
त्यूनी। क्षेत्र के धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटक स्थल सरकारी उदासीनता के कारण बदहाल अवस्था में हैं। राज्य गठन के 12 साल बाद भी क्षेत्र के पर्यटक स्थलों में बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की दिशा में कोई ठोस पहल तक नहीं हुई है, जिसका खामियाजा यहां आने वाले सैलानियों को उठाना पड़ रहा है।
जौनसार बावर अपने नैसर्गिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। यहां अनेक ऐसे पर्यटक स्थल हैं, जो सैलानियों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं, लेकिन इन स्थलों पर सुविधाएं न होने से अक्सर सैलानियों को मायूसी ही हाथ लगती है।
हनोल स्थित महासू देवता मंदिर को लंबे समय से उत्तराखंड के पांचवें धाम के रुप में विकसित करने की बात कही जा रही है, लेकिन इस ओर अभी तक संबंधित विभाग और सरकार द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया है। यहां हर साल हजारों की संख्या में लोग दर्शनों को पहुंचते हैं। इसके साथ ही ऐतिहासिक स्थल बैराटखाई भी उपेक्षित पड़ा है।

ये हैं प्रमुख पर्यटक स्थल
बासिक देवता मंदिर मैंद्रथ, शिरकुडिया देवता मंदिर रायगी, ठडियार स्थित पवासी देवता मंदिर, लक्खसियार और थैना स्थित महासू देवता मंदिर ऐसे धार्मिक पर्यटक स्थल हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इन मंदिरों की समिति ही धर्मस्थलों की देखरेख का जिम्मा संभालती हैं। सरकार की ओर से उन्हें कोई मदद नहीं मिलती। ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल लाखामंडल में भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना है। इसके अलावा वन क्षेत्र के अंतर्गत कोटी कनासर, मुुंडाली, खडंबा, देववन, बुधेर, मोहिला ट्रैक, चूड़धार चोटी, कथियान और मोराची की रमणीय पहाड़ियां भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। क्षेत्र में वहीं चकराता-लाखामंडल मार्ग स्थित टाइगर फाल भी आकर्षण का केंद्र है। यहां सुविधाएं तो दूर यहां पहुंचने तक का रास्ता नहीं है।

पर्यटक स्थलों के विकास के लिए एडीबी के तहत छह करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। बजट स्वीकृत होने पर इससे पर्यटक स्थलों का सुंदरीकरण किया जाएगा।
-वाईएस गंगवार, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी

पर्यटन विकास से रुकेगा पलायन
रोजगार के अभाव में क्षेत्र से युवा पलायन कर रहे हैं। गांव खाली हो रहे हैं। त्यूनी के व्यापार मंडल अध्यक्ष बाबी चौहान का मानना है कि सरकार यदि क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देती है, तो युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, साथ ही पलायन भी रुकेगा।
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