आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

शहर में गोकथा और गोशालाओं में गोमाता की दुर्दशा

Dehradun

Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
देहरादून। राजधानी में इन दिनों गो-कथा चल रही है। ठीकठाक संख्या में श्रद्धालु जुट भी रहे हैं। कार्यक्रम में गोवंश की महत्ता और संरक्षण की बातें लोग सुन भी रहे। लेकिन दुर्भाग्य है कि इसी शहर में गोवंश की दुर्दशा भी हो रही है। पशु आश्रयों और गोशालाओं में उन्हें भर पेट चारा भी नसीब नहीं है। बीमार पशुओं का इलाज तक नहीं हो रहा। आलम यह कि असमय ही बहुत से गोवंशीय पशु दम तोड़ रहे हैं। ‘अमर उजाला’ ने सोमवार को कुछ गो-शालाओं का भ्रमण किया तो उनकी कड़वी हकीकत सामने आ गई।
सूरते हाल- एक :
पीपुल फॉर एनिमल्स की ओर से संचालित पशु आश्रय और चिकित्सालय ‘राहत’, ननूर खेड़ा, रायपुर

परिसर में बंधे पांच गोवंशों की हौदी खाली थी। एक पशु का पैर सड़ चुका था। उसकी मरहम-पट्टी तो की जा रही थी लेकिन किसी डाक्टर द्वारा नहीं बल्कि पीएफए वालंटियर द्वारा। पीएफए की सचिव मानवी भट्ट ने बताया कि उनकी संस्था की एक सीमा है। शासन अगर एक नियमित डॉक्टर की व्यवस्था करे तो घायल पशुओं की ठीक ढंग से देखभाल हो सके। अफसरों और संबंधित मंत्री को पत्र लिखे हैं लेकिन व्यवस्था का इंतजार है।
सूरते हाल- दो : गोधाम, रायपुर।
यहां बंधे 17 गोवंशीय पशु भूखे ही नजर आ रहे थे। गोशाला में दर्जन भर पशु ही एक साथ रखे जा सकते हैं, लेकिन मानकों की धज्जियां उड़ाई जाती हैं। इलाज की ठीक व्यवस्था नहीं है। पशु चिकित्सक शैलेंद्र वशिष्ठ बताते हैं कि हाल में यहां लाए गए एक बछड़े पर किसी ने तेजाब डाल दिया था। बुरी तरह से झुलसे बछड़े को बमुश्किल बचाया जा सका। यहां हर महीने कम से कम दो पशु दम तोड़ देते हैं।
सूरते हाल -तीन : भद्रराज गोसदन समिति, छरबा
सहसपुर ब्लॉक के छरबा में तो अब तक 12 गोवंशी दम तोड़ चुके हैं। गोसदन की भूमि दून युनिवर्सिटी को दी जा चुकी है। यहां के 103 पशुओं को रखने की समस्या है। समिति के अध्यक्ष रूमी राम बताते हैं कि पुलिस छुड़ाए पशुओं को यहां छोड़ जाती है, लेकिन उनके उपचार और चारे की व्यवस्था नहीं करती। सीमित संसाधनों में बीमार पशुओं को बचा पाना मुश्किल होता है।

गोवंश संरक्षण अधिनियम में यह है व्यवस्था
उत्तराखंड गोवंश संरक्षण अधिनियम-2007 की धारा नौ में प्रावधान किया गया है कि प्रदेश सरकार गैर सरकारी पशु कल्याण संस्थाओं के माध्यम से गोसदनों की स्थापना करेगी। सौ वन पंचायतों में वन पंचायत गो सदनों का गठन किया जाएगा।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

goshalaon rishi

स्पॉटलाइट

पार्टियों में छाया अनुष्का-विराट का स्टाइल स्टेटमेंट, देखकर हो जाएंगे दीवाने

  • गुरुवार, 25 मई 2017
  • +

मूड बेहतर करने के साथ हड्डियां भी मजबूत करते हैं ये बीज, जानें कैसे

  • गुरुवार, 25 मई 2017
  • +

इस हीरो के साथ 'शाम गुजारने' के लिए रेखा ने निर्देशक के सामने रखी थी ये शर्त!

  • गुरुवार, 25 मई 2017
  • +

PHOTOS: जाह्नवी और सारा को टक्कर देने आ रही है चंकी पांडे की बेटी, सलमान करेंगे लॉन्च

  • गुरुवार, 25 मई 2017
  • +

घर बैठे ये टिप्स करेंगे सरकारी नौकरी की तैयारी में मदद

  • गुरुवार, 25 मई 2017
  • +

Most Read

गृह मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट, मायावती बोलीं- भीम आर्मी से कोई संबंध नहीं

mayawati pc on dalits saharanpur violence
  • गुरुवार, 25 मई 2017
  • +

यूपी में 174 पीसीएस अफसरों के तबादले, देखें‌ किसे कहां मिली नई तैनाती

sdm transfer by uttar pradesh government
  • गुरुवार, 25 मई 2017
  • +

MCD उपचुनावः भाजपा का नहीं खुला खाता, आप को मिली जीत

mcd bypoll on 2 seats: know results here as aap won a seat
  • बुधवार, 24 मई 2017
  • +

उत्तराखंड के पांच जिलों में भारी बार‌िश का अलर्ट

Heavy rain alert in five districts of uttarakhand
  • गुरुवार, 25 मई 2017
  • +

अल्पसंख्यकों का कोटा खत्म करने की बातें आधारहीन: यूपी सरकार

 UP govt to end minority quota
  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

सहारनपुर दंगाः SSP व डीएम पर गिरी गाज, योगी ने लगाई डीजीपी को फटकार

ethnic conflict : SSP Subhash Chandra Dubey transferred from Saharanpur
  • बुधवार, 24 मई 2017
  • +
Live-TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top