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शहर में गोकथा और गोशालाओं में गोमाता की दुर्दशा

Dehradun

Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
देहरादून। राजधानी में इन दिनों गो-कथा चल रही है। ठीकठाक संख्या में श्रद्धालु जुट भी रहे हैं। कार्यक्रम में गोवंश की महत्ता और संरक्षण की बातें लोग सुन भी रहे। लेकिन दुर्भाग्य है कि इसी शहर में गोवंश की दुर्दशा भी हो रही है। पशु आश्रयों और गोशालाओं में उन्हें भर पेट चारा भी नसीब नहीं है। बीमार पशुओं का इलाज तक नहीं हो रहा। आलम यह कि असमय ही बहुत से गोवंशीय पशु दम तोड़ रहे हैं। ‘अमर उजाला’ ने सोमवार को कुछ गो-शालाओं का भ्रमण किया तो उनकी कड़वी हकीकत सामने आ गई।
सूरते हाल- एक :
पीपुल फॉर एनिमल्स की ओर से संचालित पशु आश्रय और चिकित्सालय ‘राहत’, ननूर खेड़ा, रायपुर

परिसर में बंधे पांच गोवंशों की हौदी खाली थी। एक पशु का पैर सड़ चुका था। उसकी मरहम-पट्टी तो की जा रही थी लेकिन किसी डाक्टर द्वारा नहीं बल्कि पीएफए वालंटियर द्वारा। पीएफए की सचिव मानवी भट्ट ने बताया कि उनकी संस्था की एक सीमा है। शासन अगर एक नियमित डॉक्टर की व्यवस्था करे तो घायल पशुओं की ठीक ढंग से देखभाल हो सके। अफसरों और संबंधित मंत्री को पत्र लिखे हैं लेकिन व्यवस्था का इंतजार है।
सूरते हाल- दो : गोधाम, रायपुर।
यहां बंधे 17 गोवंशीय पशु भूखे ही नजर आ रहे थे। गोशाला में दर्जन भर पशु ही एक साथ रखे जा सकते हैं, लेकिन मानकों की धज्जियां उड़ाई जाती हैं। इलाज की ठीक व्यवस्था नहीं है। पशु चिकित्सक शैलेंद्र वशिष्ठ बताते हैं कि हाल में यहां लाए गए एक बछड़े पर किसी ने तेजाब डाल दिया था। बुरी तरह से झुलसे बछड़े को बमुश्किल बचाया जा सका। यहां हर महीने कम से कम दो पशु दम तोड़ देते हैं।
सूरते हाल -तीन : भद्रराज गोसदन समिति, छरबा
सहसपुर ब्लॉक के छरबा में तो अब तक 12 गोवंशी दम तोड़ चुके हैं। गोसदन की भूमि दून युनिवर्सिटी को दी जा चुकी है। यहां के 103 पशुओं को रखने की समस्या है। समिति के अध्यक्ष रूमी राम बताते हैं कि पुलिस छुड़ाए पशुओं को यहां छोड़ जाती है, लेकिन उनके उपचार और चारे की व्यवस्था नहीं करती। सीमित संसाधनों में बीमार पशुओं को बचा पाना मुश्किल होता है।

गोवंश संरक्षण अधिनियम में यह है व्यवस्था
उत्तराखंड गोवंश संरक्षण अधिनियम-2007 की धारा नौ में प्रावधान किया गया है कि प्रदेश सरकार गैर सरकारी पशु कल्याण संस्थाओं के माध्यम से गोसदनों की स्थापना करेगी। सौ वन पंचायतों में वन पंचायत गो सदनों का गठन किया जाएगा।
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