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निगमों के इंजीनियर्स भी कूदे हड़ताल में

Dehradun

Updated Wed, 29 Aug 2012 12:00 PM IST
देहरादून। सरकारी विभागों से जुड़े आम जनता के सारे काम अब भगवान भरोसे हैं। उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की 21 सूत्री मांगों पर अनिश्चितकालीन हड़ताल के दूसरे चरण में निगमों और विकास प्राधिकरणों के इंजीनियर्स भी कूद पड़े हैं। इससे विभिन्न विभागों के कामकाज पर असर पड़ना तय है। ऐसे में पानी समेत अन्य विकास कार्यों को लेकर जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। मंगलवार को धरने पर बैठे इंजीनियर्स ने कहा कि सरकार उनकी मांगों को अनसुना कर रही है। उधर, गंगोत्री विधायक विजयपाल सजवाण ने भी हड़ताल को समर्थन दिया है। धरने पर महासंघ के अध्यक्ष नवीन कांडपाल, वीके डंगवाल, वीडी जोशी, वीरेंद्र सिंह गुसाईं, सिंचाई कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रमेश रमोला आदि मौजूद रहे।
कैसे होंगे आपदा राहत कार्य
लोक निर्माण विभाग में जेई के साथ एई भी हड़ताल में शामिल हो गए हैं। जेई के हड़ताल पर जाने के बाद अब तक एई के भरोसे काम चल रहा था। लेकिन अब आपदा के दौरान राहत कार्यों की प्लानिंग पर असर पड़ेगा। टूटी सड़कों की मरम्मत, मलबा हटाने आदि का काम प्रभावित होगा।

नहीं होगी मानीटरिंग भी
जल संस्थान आम जनता से सीधे जुड़ा विभाग है। हर काम के लिए फील्ड में दौड़भाग जेई ही करते हैं। फील्ड की जानकारी, हर छोटे से छोटे कर्मचारी का नंबर उन्हीं के पास होता है। विभाग की ओर से होने वाली पीआई परमानेंट इंटरेस्ट और टआई टेंपरेरी इंटरेस्ट भी जेई के नाम ही होती है। इसके तहत पेयजल और सीवर कार्यों के लिए दस से बारह हजार रुपये तुरंत मिल जाते हैं। छोटे फाल्ट आने पर इस पैसे से जल्दी काम हो जाता है। लेकिन, अब एई और ईई को फील्ड में दौड़ाया जाएगा। वे स्थिति देखकर स्टीमेट तैयार करेंगे, बजट स्वीकृत होगा, तब काम होगा। यानी एक दिन का काम कितना लंबा खिंचेगा, कहा नहीं जा सकता। दूसरी ओर, जेई सीधे ठेकेदारों पर नजर रखते थे, लेकिन अब पानी खोलने या अन्य कार्यों में ठेकेदारों की कार्यो की मानीटरिंग भी नहीं हो सकेगी। हालांकि, अधिकारी हर स्तर से स्थिति को संभाले रखने की बात कह रहे हैं।

यहां दिखा असर
पेयजल निगम डिप्लोमा इंजीनियर्स के हड़ताल पर जाने से निर्माण संबंधी कार्य प्रभावित रहे। राज्य भर की करीब साढ़े सात सौ पेयजल योजनाओं की मॉनिटरिंग नहीं हो सकी। इसके साथ ही दैवी आपदा के कार्य भी प्रभावित हुए। वहीं जल संस्थान के जेई भी साइट पर नहीं गए।
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