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ड्रोन को लेकर सुस्ती क्यों

अनंत पद्मनाभन

Updated Tue, 28 Feb 2017 07:19 PM IST
Why slowness about the drones

अनंत पद्मनाभन

लगभग एक साल हो गया है, जब भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने ड्रोन संबंधी दिशा-निर्देश का मसौदा जारी किया था। भारत में एक अपेक्षाकृत युवा उद्योग को आकार देने वाले इन दिशा-निर्देशों की महत्ता को देखते हुए कई उद्योग संगठनों और स्टार्टअप ने अपनी प्रतिक्रिया दी और समय पर कार्रवाई पर जोर दिया। उनका कहना है कि ड्रोन जबर्दस्त व्यावहारिक अनुप्रयोग है, जिसे अब विवादित नहीं रखा जा सकता। भारत के कुछ स्टार्टअप आपदा प्रबंधन, सटीक कृषि और फसल बीमा, खनन, इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजना और भूमि रिकॉर्ड जैसे विविध क्षेत्रों में ड्रोन के अनुप्रयोग से क्रांति कर रहे हैं। रेलवे, भूतल परिवहन, ऊर्जा एवं कानून प्रवर्तन जैसे विभिन्न सरकारी विभागों और मंत्रालयों में ड्रोन सक्षम समाधानों का बढ़ता प्रयोग उसके प्रभाव की पुष्टि करते हैं।
फिर भी ड्रोन नियामक का दृष्टिकोण ड्रोन नवाचार और अनुप्रयोगों को लेकर अब तक अनुकूल नहीं रहा है। शुरू में सामान्य नौकरशाही की जड़ता के बाद भी दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप देने में भारी देरी की गई। अक्तूबर, 2014 में डीजीसीए ने अपनी पहली सार्वजनिक सूचना जारी करते हुए घोषणा की कि जब तक बाध्यकारी दिशा-निर्देश जारी नहीं किए जाते, तब तक कोई भी गैर-सरकारी एजेंसी, संगठन, या किसी व्यक्ति को किसी भी उद्देश्य के लिए मानवरहित विमान प्रणाली को शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह शासनादेश अब भी जारी है, क्योंकि अप्रैल, 2016 का दिशा-निर्देश अब भी मसौदे के रूप में ही है। अट्ठाइस महीने का यह निषेध न तो नवाचार और न ही प्रौद्योगिकी अपनाने की दृष्टि से शुभ है।

भले ही दिशा-निर्देश अक्सर नवाचार से पीछे रहते हैं, आम चूक की स्थिति में काफी आश्वस्त करने वाले होते हैं। लेकिन असैन्य ड्रोन के मामले में जारी निषेध उन्हें गंभीर जोखिम में रखते हैं, वे कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आधिकारिक रूप से परीक्षण गतिविधियों को रोकने का अवसर देते हैं और मामले दर्ज करने और यहां तक गिरफ्तार करने का भी अधिकार देते हैं। उचित वैध सुरक्षित हार्बर बनाने में नियामक की शिथिलता निश्चित रूप से निवेशकों की दिलचस्पी और अनुसंधान पहल को हतोत्साहित करेगी।

दिशा-निर्देश का मसौदा गंभीर विनियामक कमियों और गलतियों से ग्रस्त है। मसौदे में सुरक्षा चिंताओं पर ज्यादा जोर दिया गया है और यह होना भी चाहिए, लेकिन इसमें दो बेहद महत्वपूर्ण मुद्दों-संपत्ति और गोपनीयता की अनदेखी की गई है। संपत्ति से संबंधित चिंताएं इसलिए उठ रही हैं, क्योंकि असैन्य ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़ान भर आंकड़े इकट्ठा करते हैं और हवाई रिमोट सेंसिंग की पहुंच से बाहर रहते हैं। लेकिन इस उद्योग के विकास के साथ भूस्वामी और ड्रोन ऑपरटेरों के बीच विवाद बढ़ेगा, क्योंकि हवा में जगह के स्वामित्व को लेकर अस्पष्टता है।

इसी तरह गंभीर गोपनीयता संबंधी चुनौतियां भी हैं। प्रौद्योगिकी के विकास के साथ अधिक ऊंचाई से बेहतर गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेना उत्तरोतर आसान होता जाएगा। भारत में एक मजबूत गोपनीयता कानून के अभाव में ड्रोन गोपनीयता की धारणा पर कहर बरपा सकता है, खासकर तब, जब उसे पत्रकारों और कानून प्रवर्तकों की ओर से तैनात किया जाएगा। दिशा-निर्देशों की जगह एक व्यापक रूपरेखा तैयार करने की जरूरत है, जो डेटा इकट्ठा करने को नियंत्रित करे और दृढ़तापूर्वक गोपनीयता उल्लंघन के मामले का निवारण कर सके।

लेखक कार्नेगी इंडिया, नई दिल्ली के फेलो हैं
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