आपका शहर Close

उत्तरी अमेरिका ही क्यों?

यादवेंद्र

Updated Sat, 01 Dec 2012 10:25 PM IST
why sandy storm came in north america
ऐसा नहीं है कि पहली बार ऐसा कुछ कहा जा रहा है, पर हाल में अमेरिका के बड़े हिस्से में तबाही का मंजर फैलाने वाले सैंडी चक्रवात से हुए विनाश का जायजा लेते हुए एकाधिक दिशाओं से यह संदेश आ रहा है कि ईश्वर ने गलत और अनैतिक काम करने की सजा जनता को चक्रवात की मार्फत दी है।
दिलचस्प बात यह है कि जहां ईसाई पादरी समलैंगिकता और समलिंगी विवाह जैसे अनैतिक कदमों को तबाही का कारण मानते हैं और इस तरह के फैसलों में अग्रणी रहने वाले अमेरिका के पूर्वोत्तर राज्यों की ज्यादा कीमत चुकाने की बात भी कहते हैं, वहीं मिस्र के एक बड़े इसलामी धर्मगुरु इनोसेंस ऑफ मुसलिम्स जैसी विवादास्पद फिल्म बनाने वाले अमेरिका को दंड देने की बात कहते हैं। सऊदी अरब के एक बड़े धर्मगुरु का सुझाव है कि यदि अमेरिका को ऐसे दंडों से बचना है, तो इसलाम स्वीकार कर लेना चाहिए।

इन सब के बीच अमेरिकी ईसाई पादरी यह कहने से भी नहीं चूके कि एक मुसलिम को राष्ट्रपति चुनकर ह्वाइट हाउस भेजने से भी यीशु नाराज हैं, इसीलिए सैंडी जैसे चक्रवात को मृत्यु का तांडव करने के लिए अमेरिका भेज देते हैं। बहुत दूर न भी जाएं, तो पिछले कुछ वर्षों में सुमात्रा या जापान की भूकंप जनित सुनामी हो, हैती का भूकंप हो या आइसलैंड के ज्वालामुखी विस्फोट से दुनिया के बड़े हिस्से में आकाश पर छा जाने वाली राख हो-सभी मामलों में वैज्ञानिकों के विश्लेषण के साथ-साथ पादरियों और मौलानाओं के धार्मिक और अप्रमाणित निष्कर्ष सामने आ ही जाते हैं।

भारत भी ऐसे मामलों से अछूता नहीं हैं। पर प्राकृतिक आपदाओं की बात करें, तो एक जर्मन इंश्योरेंस कंपनी म्यूनिख रे द्वारा हाल में प्रकाशित एक रिपोर्ट अभी गहन चर्चा में हैं। इस रिपोर्ट में पिछले तीन दशक के आंकड़े दिए गए हैं, जो बताते हैं कि इस दौरान प्राकृतिक आपदाओं का जैसा कहर उत्तरी अमेरिका में देखा गया है, वैसा दुनिया के किसी और हिस्से में नहीं। अमेरिका में इस दौरान एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा आर्थिक नुकसान और तीस हजार से ज्यादा मौतें हुई हैं। गौरतलब है कि इस अवधि में अमेरिका में प्राकृतिक आपदाओं की विभीषिका पांच गुना बढ़ गई है, जबकि एशिया में यह चार गुना, अफ्रीका में ढाई गुना, यूरोप में दोगुना और दक्षिणी अमेरिका में सिर्फ डेढ़ गुना बढ़ी है।

ब्रिटेन के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार सर बेडिंगटन ने चेतावनी दी है कि इतिहास के अध्ययन से यह नतीजा निकाला जा सकता है कि प्राकृतिक अतिवाद के जो मामले अब तक अमूमन बीस साल में एक बार आते थे, उनके अब हर पांच साल पर दोहराए जाने की आशंका है। दुनिया के सबसे बड़े इंश्योरेंस प्रतिष्ठान लॉयड्स की हालिया रिपोर्ट बताती है कि प्राकृतिक आपदाओं के बीमा भुगतान की दृष्टि से 2011 अब तक के सैकड़ों वर्षों के इतिहास में सबसे ज्यादा खराब वर्ष रहा-उस साल सबसे ज्यादा दावे निपटाए गए और कंपनियों को 516 मिलियन पौंड का घाटा उठाना पड़ा।

उसने यह भी चेताया कि इंश्योरेंस कंपनियों का अनुभव बताता है कि प्राकृतिक आपदाएं निरंतर ज्यादा से ज्यादा उग्र रूप धारण करती जा रही हैं। यहां चौंकाने वाली बात यह भी है कि वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के शीर्ष पर बैठे जिस समाज को अनियंत्रित प्राकृतिक आपदाओं से ज्यादा अप्रभावित और सुरक्षित बन जाना चाहिए, वही आज सबसे ज्यादा आक्रांत क्यों है?
Comments

स्पॉटलाइट

'दीपिका पादुकोण आज जो भी हैं, इस एक्टर की वजह से हैं'

  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

B'Day Spl: 20 साल की सुष्मिता सेन के प्यार में सुसाइड करने चला था ये डायरेक्टर

  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

RBI ने निकाली 526 पदों के लिए नियुक्तियां, 7 दिसंबर तक करें आवेदन

  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

B'Day Spl: जीनत अमान, सुष्मिता सेन को दिल दे बैठे थे पाक खिलाड़ी

  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

'पद्मावती' विवाद पर दीपिका का बड़ा बयान, 'कैसे मान लें हमने गलत फिल्म बनाई है'

  • शनिवार, 18 नवंबर 2017
  • +

Most Read

इतिहास तय करेगा इंदिरा की शख्सियत

 History will decide Indira's personality
  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

सेना को मिले ज्यादा स्वतंत्रता

More independence for army
  • शनिवार, 18 नवंबर 2017
  • +

आधार पर अदालत की सुनें

Listen to court on Aadhar
  • सोमवार, 13 नवंबर 2017
  • +

मोदी-ट्रंप की जुगलबंदी

Modi-Trump's Jugalbandi
  • गुरुवार, 16 नवंबर 2017
  • +

युवाओं को कब मिलेगी कमान?

When will the youth get the command?
  • शुक्रवार, 17 नवंबर 2017
  • +

मानवाधिकार पर घिरता पाकिस्तान

Pakistan suffers human rights
  • मंगलवार, 14 नवंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!