आपका शहर Close

कौन चाहता है संसद चले!

अनुराग दीक्षित

Updated Tue, 25 Dec 2012 12:51 AM IST
who wants parliament session going on
संसद के शीतकालीन सत्र ने 20 दिसंबर को अपने समापन के साथ ही पिछले कई वर्षों की तरह संसदीय व्यवस्था से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए। ये सवाल लंबित विधेयकों, बार-बार बाधित होने वाले प्रश्नकाल, छोटे राजनीतिक दलों वाले सांसदों के विशेषाधिकार को लेकर और सबसे अहम संसदीय व्यवस्था की मौजूदा प्रकिया को लेकर हैं।
 
करीब एक महीने तक चलने वाले इस सत्र में कुल करीब 20 बैठकें तय थीं, जिनमें 25 विधेयक गंभीर चर्चा के बाद पारित होने थे। इन विधेयकों में चार दशक से लंबित लोकपाल विधेयक भी था, जिसकी पहल बरसों पहले हुई थी। पिछले शीतकालीन सत्र के दौरान राज्य सभा में देर रात तक चले संशोधनों के सियासी ड्रामे के बाद प्रवर समिति के रास्ते ये विधेयक इस बार पारित होने की बाट जोह रहा था, लेकिन अब इसे अगले सत्र यानी फरवरी तक इंतजार करना होगा।

दूसरी तरफ संसद और विधानमंडलों में महिलाओं के आरक्षण संबंधी विधेयक पिछले कई सत्रों की तरह इस सत्र में भी पारित नहीं हो सका। इसके अलावा वर्ष 1894 के कानून की जगह लेने वाला भूमि अधिग्रहण विधेयक भी शीतकालीन सत्र में पारित नहीं हो पाया। ऐसे ही कई और विधेयक रहे, जो इस सत्र की शुरुआत में सरकार ने गिनाए थे।  

इसी तरह प्रश्नकाल भी बाधित हुआ। लोकसभा के कुल 400 मौखिक सवालों में से 49 के ही जवाब दिए जा सके, जो काफी कम है। लोकसभा की बात करें, तो कुल 61 घंटे सदन की कार्यवाही चली, जबकि उससे केवल दो घंटे ही कम करीब 59 घंटे हंगामे की भेंट चढ़ गए।

कुल मिलाकर मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई और प्रोन्नति में आरक्षण जैसे मुद्दे पूरे सत्र में हावी दिखे और मूलतः कांग्रेस, भाजपा, सपा और बसपा की राजनीति के इर्द-गिर्द ही पूरा सत्र सिमट गया। बाकी राजनीतिक दलों के सांसदों की पीड़ा भी जायज है। उनके मुद्दों का क्या? अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों की ज्वलंत समस्याओं का क्या? राज्यसभा में मायावती का सभापति की उपस्थिति पर सवाल उठाना, वहीं लोकसभा में विधेयक फाड़ना, ये कुछ ऐसी घटनाएं हैं, जिन्हें शायद ही कोई याद करना चाहेगा।

कम होती बैठकें और कम होता विधायी कामकाज अब आम बात-सी बनती जा रही है। पहली लोकसभा के कार्यकाल में कुल 677 बैठकें हुई थीं। 13वीं लोकसभा के दौरान ये घटकर 356 रह गईं। यह वही समय था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि हम भारतीय संसद को मछली बाजार न बनने दें। सत्ता बदली, दल बदला, लेकिन संसदीय व्यवस्था में कोई सकारात्मक बदलाव नहीं दिखा। 14वीं लोकसभा के कुल कार्यकाल में संसद की बैठकें और घटकर 332 रह गईं। इस दौरान 2008 में साल भर में कुल 48 बैठकें आयोजित की गई थी, जो अब तक की सबसे कम बैठकें हैं।
 
कुछ जानकारों का तर्क है कि लोकतंत्र को परिपक्व होने में समय लगता है। अक्सर सत्र के स्थगित हो जाने के बाद ये चर्चा प्रमुखता से होती है कि संसद क्यों नहीं चलती। हर राजनीतिक दल का नेता संसद चलाने को अपनी प्राथमिकता बताता है। सत्र की शुरुआत में होने वाली सर्वदलीय बैठक में लोकसभा अध्यक्ष को हर राजनीतिक दल आश्वस्त करता है कि सदन चलेगा। लेकिन पहले दिन से ही गतिरोध दिखना शुरू हो जाता है।

वे कौन-सी ‘अदृश्य-शक्तियां’ हैं, जो सदन नहीं चलने देती हैं? संसदीय कार्य मंत्रालय शनिवार, रविवार समेत सभी सरकारी छुटिटयों को गिनाकर साबित कर चुका है कि 100 दिन सदन चलाना संभव नहीं। तब फिर 80 के दशक तक कैसे 100 दिन बैठकें होती थी? इसका जबाव नहीं। कैसे आज भी कई देशों में 150 दिन तक बैठकें होती हैं? इसका भी पता नहीं।

साफ है, ज्यादा दिन सत्र चलेगा, तो सरकार ज्यादा मुद्दों पर घिरेगी। दूसरी ओर विपक्ष की गंभीरता भी किसी से छिपी नहीं। साथ ही मौजूदा राजनीतिक हालात में विपक्ष या सत्ता पक्ष में कोई ज्यादा अंतर नजर नहीं आता। उदाहरणार्थ, भ्रष्टाचार पर सरकार को घेरने से पहले विपक्ष को अपने नेताओं और सरकारों का भ्रष्टाचार ध्यान में रखना होगा। शायद इसीलिए डीएलएफ और पूर्ति दोनों ही मुद्दे इस सत्र में नहीं उठे।
Comments

स्पॉटलाइट

19 की उम्र में 27 साल बड़े डायरेक्टर से की थी शादी, जानें क्या है सलमान और हेलन के रिश्ते की सच

  • मंगलवार, 21 नवंबर 2017
  • +

साप्ताहिक राशिफलः इन 5 राशि वालों के बिजनेस पर पड़ेगा असर

  • मंगलवार, 21 नवंबर 2017
  • +

ऐसे करेंगे भाईजान आपका 'स्वैग से स्वागत' तो धड़कनें बढ़ना तय है, देखें वीडियो

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

सलमान खान के शो 'Bigg Boss' का असली चेहरा आया सामने, घर में रहते हैं पर दिखते नहीं

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

आखिर क्यों पश्चिम दिशा की तरफ अदा की जाती है नमाज

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

Most Read

इतिहास तय करेगा इंदिरा की शख्सियत

 History will decide Indira's personality
  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

सेना को मिले ज्यादा स्वतंत्रता

More independence for army
  • शनिवार, 18 नवंबर 2017
  • +

जनप्रतिनिधियों का आचरण

Behavior of people's representatives
  • मंगलवार, 21 नवंबर 2017
  • +

मोदी तय करेंगे गुजरात की दिशा

Modi will decide Gujarat's direction
  • मंगलवार, 21 नवंबर 2017
  • +

मोदी-ट्रंप की जुगलबंदी

Modi-Trump's Jugalbandi
  • गुरुवार, 16 नवंबर 2017
  • +

खेतिहर समाज की त्रासदी

Tragedy of farming society
  • मंगलवार, 21 नवंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!